कर्नाटक राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष नागलक्ष्मी चौधरी ने परपन्ना अग्रहारा जेल में विदेशी महिलाओं की लंबी हिरासत पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने जमानत राशि और जमानतदारों की कमी के कारण कैदियों के अधिकारों के उल्लंघन पर चिंता व्यक्त की है।

  • विदेशी महिला कैदी जमानत राशि न भर पाने के कारण सजा पूरी होने के बाद भी जेल में हैं।
  • सरकार ₹40,000 तक की जमानत सहायता दे सकती है, लेकिन आवश्यकता इससे कहीं अधिक है।
  • जेल में महिला कर्मचारियों की भारी कमी और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां भी सामने आई हैं।

बेंगलुरु: कर्नाटक राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष नागलक्ष्मी चौधरी ने परपन्ना अग्रहारा केंद्रीय कारागार में विदेशी महिला कैदियों की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। मंगलवार को जेल का निरीक्षण करने के दौरान, डॉ. चौधरी ने पाया कि कई विदेशी महिलाएं अपनी सजा पूरी करने के बावजूद केवल जमानत राशि और जमानतदार (surety) की व्यवस्था न कर पाने के कारण जेल में ही कैद हैं।

निरीक्षण के दौरान यह बात सामने आई कि विदेशी महिलाओं, विशेष रूप से पाकिस्तान, बांग्लादेश और दक्षिण अफ्रीका से संबंधित महिलाओं को कानूनी प्रक्रिया में भारी बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। डॉ. चौधरी ने बताया कि कुछ मामलों में अदालतों द्वारा जमीन या संपत्ति आधारित जमानत की मांग की जाती है, जो कि विदेशी नागरिकों के लिए लगभग असंभव है क्योंकि भारत में न तो उनकी कोई संपत्ति है और न ही कोई स्थानीय रिश्तेदार जो उनकी जमानत ले सके।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल प्रशासनिक विफलता का नहीं, बल्कि मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का है। जब कोई व्यक्ति अपनी कानूनी सजा काट चुका होता है, तो उसे केवल आर्थिक कारणों से हिरासत में रखना न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है। यह स्थिति अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक संबंधों और मानवाधिकार मानकों पर भी सवाल खड़े करती है।

जमानत की जटिल प्रक्रिया और स्थानीय संपत्तियों की अनिवार्यता विदेशी कैदियों के लिए एक अदृश्य दीवार बन गई है।

डॉ. चौधरी ने इस बात पर भी जोर दिया कि हालांकि सरकार के पास पात्र कैदियों के लिए ₹40,000 तक की जमानत राशि प्रदान करने का प्रावधान है, लेकिन कई मामलों में जमानत की आवश्यकता ₹1 लाख से अधिक है। उन्होंने राज्य सरकार के साथ इस मुद्दे को उठाने और कानूनी रूप से स्वीकार्य वैकल्पिक समाधान खोजने का वादा किया है।

इसके अलावा, जेल के भीतर महिला कर्मचारियों की कमी एक और गंभीर मुद्दा बनकर उभरा है। रिपोर्ट के अनुसार, रात के समय एक ही सुपरवाइजर को 200 से अधिक महिला कैदियों की निगरानी करनी पड़ती है, जो सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत जोखिम भरा है। महिला कर्मचारियों को देर रात ड्यूटी खत्म करने के बाद परिवहन की समस्या का भी सामना करना पड़ रहा है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

परपन्ना अग्रहारा जेल कर्नाटक की सबसे पुरानी और प्रमुख जेल प्रणालियों में से एक है। वर्षों से, जेल सुधारों और कैदियों के मानवाधिकारों को लेकर यहाँ समय-समय पर बहस होती रही है, विशेष रूप से विदेशी नागरिकों के प्रबंधन के संबंध में।

Frequently Asked Questions

1. विदेशी महिलाएं जेल में क्यों अटकी हुई हैं?
जमानत के लिए आवश्यक राशि और स्थानीय जमानतदार (property-based surety) की कमी के कारण वे जेल में हैं।

2. क्या सरकार जमानत में मदद कर सकती है?
हाँ, प्रावधान के अनुसार सरकार पात्र कैदियों को ₹40,000 तक की सहायता दे सकती है, लेकिन यह अक्सर पर्याप्त नहीं होता।

Did You Know?: जेलों में कैदियों के पुनर्वास के लिए कौशल विकास और शिक्षा को अब कानूनी रूप से अनिवार्य बनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।