भारत में 'फिलीसाइड-सुसाइड' (संतान हत्या और आत्महत्या) के बढ़ते मामले पारिवारिक स्थिरता के गहरे संकट को उजागर कर रहे हैं। वैवाहिक विवादों में बच्चे अब महज 'कोलेटरल डैमेज' बनकर रह गए हैं।
- भारत में फिलीसाइड-सुसाइड एक गंभीर मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक संकट के रूप में उभर रहा है।
- NCRB के अनुसार, भारत में आत्महत्या का सबसे बड़ा कारण पारिवारिक समस्याएं हैं (34% से अधिक मामले)।
- इसके पीछे 'परोपकारी संतान हत्या' और 'विस्तारित आत्म-धारणा' जैसे मनोवैज्ञानिक कारण हैं।
पिछले कुछ महीनों में भारत के विभिन्न हिस्सों से एक दिल दहला देने वाला पैटर्न सामने आया है। गोवा के रिसॉर्ट्स से लेकर बेंगलुरु की सड़कों और हरियाणा के ग्रामीण इलाकों तक, बच्चे अपने ही माता-पिता के हाथों मारे जा रहे हैं। ये घटनाएं, जो अक्सर आत्महत्या के समझौते (suicide pact) के रूप में होती हैं, घर जैसे सुरक्षित स्थान को विश्वासघात के केंद्र में बदल रही हैं।
इन मामलों की क्रूरता चौंकाने वाली है। जनवरी 2024 में, एक एआई स्टार्टअप की सीईओ सुचना सेठ ने तलाक के विवाद के बीच अपने चार साल के बेटे की गला घोंटकर हत्या कर दी। इसी तरह, कर्नाटक में शिवलाल राठौड़ नामक एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी के कथित अफेयर के शक में अपने ससुराल में विस्फोट कर दिया, जिसमें उसकी 15 वर्षीय बेटी और वह खुद मारा गया।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि ये केवल अलग-थलग आपराधिक घटनाएं नहीं हैं, बल्कि घरेलू मुकाबला तंत्र (coping mechanisms) के व्यवस्थित पतन का लक्षण हैं। वित्तीय तनाव, वैवाहिक अस्थिरता और सुलभ मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की कमी एक विस्फोटक माहौल बनाती है। जब माता-पिता अपने बच्चों को स्वतंत्र व्यक्ति के बजाय अपने दुख का विस्तार मानने लगते हैं, तो परिणाम विनाशकारी होते हैं।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े इस मुद्दे की गंभीरता को दर्शाते हैं। हालांकि फिलीसाइड-सुसाइड के लिए कोई अलग श्रेणी नहीं है, लेकिन व्यापक आत्महत्या डेटा चिंताजनक है। भारत में कुल आत्महत्याओं में 34% से अधिक मामलों का कारण पारिवारिक समस्याएं हैं, जो इसे देश में आत्म-नुकसान का सबसे बड़ा कारण बनाती हैं।
"गंभीर अवसाद या तीव्र संकट की स्थिति में, माता-पिता की सोचने की क्षमता इतनी विकृत हो जाती है कि उन्हें लगता है कि अपने बच्चों को मारना उन्हें इस क्रूर दुनिया से बचाने का एक तरीका है।"
हालिया त्रासदियां इस संकट के भौगोलिक विस्तार को दर्शाती हैं। बेंगलुरु में, एक कैब कंपनी मैनेजर एसजी इमरान ने एक पांच सितारा होटल में अपनी दो बेटियों की हत्या करने और फिर खुदकुशी करने की कोशिश की। हरियाणा के फतेहाबाद में, एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने अपने दो बच्चों को जहर देकर और पानी की टंकी में डुबोकर मार डाला, और फिर खुद अपनी जान ले ली।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
ऐतिहासिक रूप से, भारत में घरेलू हिंसा को पितृसत्तात्मक नियंत्रण या सामाजिक-आर्थिक दबाव के नजरिए से देखा गया है। हालांकि, 'विस्तारित फिलीसाइड' की ओर झुकाव—जहां माता-पिता मानते हैं कि पूरे परिवार को एक साथ खत्म हो जाना चाहिए—मनोवैज्ञानिक संकट में बदलाव का संकेत देता है। NCRB द्वारा इन मामलों की अलग से ट्रैकिंग न किए जाने के कारण यह घटना लंबे समय तक अंधेरे में रही, जिससे लक्षित हस्तक्षेप करना कठिन हो गया।
| मामले का कारण | मनोवैज्ञानिक प्रेरणा | सामान्य परिणाम |
|---|---|---|
| परोपकारी फिलीसाइड | यह विश्वास कि दुनिया बच्चे के लिए बहुत क्रूर है | संतान की हत्या के बाद आत्महत्या |
| विस्तारित आत्म-धारणा | बच्चे को अपने शरीर या पहचान का हिस्सा मानना | पूरे परिवार का विनाश |
| वैवाहिक प्रतिशोध | बच्चे को दूसरे साथी के खिलाफ हथियार बनाना | हत्या के बाद गिरफ्तारी या आत्महत्या |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: फिलीसाइड और फिलीसाइड-सुसाइड में क्या अंतर है?
फिलीसाइड का अर्थ है माता-पिता द्वारा बच्चे की हत्या करना; फिलीसाइड-सुसाइड तब होता है जब माता-पिता बच्चे की हत्या के बाद खुद भी आत्महत्या कर लेते हैं।
प्रश्न 2: इन मामलों के लिए NCRB डेटा अपर्याप्त क्यों है?
NCRB के पास वर्तमान में फिलीसाइड-सुसाइड के लिए कोई समर्पित उप-श्रेणी नहीं है, जिससे ये मामले सामान्य हत्या या आत्महत्या के आंकड़ों में मिल जाते हैं।