Indeed के एक हालिया सर्वे से पता चला है कि भारत में 10 में से 6 पेशेवर मानते हैं कि उनका जॉब टाइटल उनके वेतन के अनुरूप नहीं है, जो कॉर्पोरेट जगत में 'टाइटल इन्फ्लेशन' की ओर इशारा करता है।

  • 60% भारतीय पेशेवरों का मानना है कि उनका पद (Designation) उनके वेतन से मेल नहीं खाता।
  • लगभग 33% लोगों को पदोन्नति तो मिली, लेकिन वेतन में कोई वृद्धि नहीं हुई या 5% से कम की बढ़ोतरी हुई।
  • 57% नियोक्ताओं ने स्वीकार किया कि वे बजट की कमी के कारण कर्मचारियों को रोकने के लिए 'भारी-भरकम' टाइटल का उपयोग करते हैं।

भारत के कॉर्पोरेट जगत में एक नई और चिंताजनक प्रवृत्ति देखी जा रही है जिसे 'टाइटल इन्फ्लेशन' कहा जा रहा है। Indeed के नवीनतम तिमाही हायरिंग ट्रैकर के अनुसार, लगभग 60% पेशेवरों का कहना है कि उनके जॉब टाइटल और उनके वेतन के बीच एक बड़ा अंतर है। यह दर्शाता है कि कंपनियां कर्मचारियों को 'सीनियर' तो बना रही हैं, लेकिन उसके साथ मिलने वाले वित्तीय लाभों को नजरअंदाज कर रही हैं।

Valuvox द्वारा 2,533 कर्मचारियों और 1,211 नियोक्ताओं के बीच किए गए इस सर्वे में पाया गया कि लगभग 80% पेशेवरों का मानना है कि विभिन्न उद्योगों में टाइटल इन्फ्लेशन आम हो गया है। कई उत्तरदाताओं ने बताया कि उन्होंने अपने सहकर्मियों को बिना किसी महत्वपूर्ण वेतन वृद्धि के वरिष्ठ पद मिलते देखा है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह प्रवृत्ति प्रतिभा प्रबंधन (Talent Management) में एक रणनीतिक बदलाव की ओर इशारा करती है। नियोक्ता अब 'पद' को एक सस्ते विकल्प के रूप में उपयोग कर रहे हैं ताकि कर्मचारियों को संतुष्ट रखा जा सके। हालांकि, यह एक ऐसा भ्रम पैदा करता है जहां कर्मचारी की बाहरी बाजार वैल्यू तो बढ़ जाती है, लेकिन आंतरिक रूप से उसकी वित्तीय स्थिति वैसी ही रहती है, जिससे भविष्य में असंतोष और बर्नआउट की संभावना बढ़ जाती है।

"जॉब टाइटल तब सबसे प्रभावी होते हैं जब वे वास्तविक करियर प्रगति को दर्शाते हैं, न कि जब वे उसकी जगह ले लेते हैं।" - शशि कुमार, मैनेजिंग डायरेक्टर, Indeed इंडिया।

वित्तीय विसंगतियों के बावजूद, कर्मचारी अभी भी अपने पद को महत्व देते हैं। लगभग 70% का मानना है कि उनका जॉब टाइटल भविष्य के करियर अवसरों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वहीं, 73% का मानना है कि एक प्रभावशाली पद संभावित नियोक्ताओं की नजर में उनकी छवि को बेहतर बनाता है।

नियोक्ताओं के नजरिए से देखें तो, लगभग 57% कंपनियों ने स्वीकार किया कि वे कर्मचारियों को आकर्षित करने या उन्हें बनाए रखने के लिए वरिष्ठ पदों का उपयोग करते हैं, खासकर तब जब वेतन बजट सीमित होता है। यह एक तरह की 'कॉर्पोरेट चालाकी' है जहाँ वित्तीय लाभ के बजाय केवल नाम दिया जाता है।

पैमाना कर्मचारी का नजरिया नियोक्ता का नजरिया
मुख्य लक्ष्य वित्तीय वृद्धि और पहचान प्रतिभा को बनाए रखना
टाइटल का महत्व भविष्य के अवसरों का पासपोर्ट कम लागत वाला प्रबंधन उपकरण
प्राथमिकता 52% पद से ऊपर वेतन को प्राथमिकता देते हैं बजट की कमी को पद से ढकना
क्या आप जानते हैं?: 'टाइटल इन्फ्लेशन' उस प्रक्रिया को कहते हैं जब कंपनियों द्वारा कर्मचारियों को उनकी वास्तविक जिम्मेदारियों या वेतन से अधिक वरिष्ठ पद दिए जाते हैं ताकि उनका मनोबल बढ़ाया जा सके।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: क्या सीनियर टाइटल से दूसरी जगह बेहतर नौकरी मिलने में मदद मिलती है?
हाँ, 73% पेशेवरों का मानना है कि एक मजबूत पद संभावित नियोक्ताओं की नजर में उनकी वैल्यू बढ़ाता है, जिससे भविष्य में बेहतर बातचीत संभव होती है।

प्रश्न 2: क्या अधिकांश पेशेवर वेतन वृद्धि के बजाय पद परिवर्तन को प्राथमिकता देते हैं?
नहीं, 52% पेशेवरों ने कहा कि वे नई नौकरी के अवसर देखते समय बेहतर पद के बजाय उच्च वेतन को प्राथमिकता देंगे।