यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) ने जेवर क्षेत्र को एक वैश्विक औद्योगिक केंद्र बनाने के लिए फार्मा क्लस्टर और यूनिवर्सिटी टाउनशिप सहित कई मेगा प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है।
- सेक्टर 13 और 14 में 500 एकड़ के मेडिकल हब और 480 एकड़ की यूनिवर्सिटी टाउनशिप को मंजूरी।
- इलेक्ट्रॉनिक्स निवेश को बढ़ावा देने के लिए 300 एकड़ में 'ताइवान सिटी' का निर्माण।
- कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे के लिए इंटरनेशनल स्टेडियम, फार्मा क्लस्टर और अंतरराज्यीय बस टर्मिनल का विकास।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की आर्थिक दिशा बदलने के लिए यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) ने जेवर स्थित आगामी नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं के एक व्यापक समूह को मंजूरी दी है। ग्रेटर नोएडा में YEIDA की 92वीं बोर्ड बैठक में लिए गए ये निर्णय इस क्षेत्र को स्वास्थ्य, शिक्षा और उच्च-तकनीकी विनिर्माण के एकीकृत पारिस्थितिकी तंत्र में बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं।
इस विस्तार के केंद्र में सेक्टर 13 और 14 में विकसित होने वाला 500 एकड़ का मेडिकल हब और 480 एकड़ की यूनिवर्सिटी टाउनशिप है। इन परियोजनाओं के माध्यम से राज्य सरकार न केवल विश्व स्तरीय स्वास्थ्य सेवा और उच्च शिक्षा प्रदान करना चाहती है, बल्कि संबद्ध सेवा क्षेत्रों में रोजगार के व्यापक अवसर पैदा करना चाहती है, जिससे देश-विदेश से पेशेवर और छात्र आकर्षित हों।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि 'ताइवान सिटी' (इलेक्ट्रॉनिक्स और तकनीक के लिए 300 एकड़ का समर्पित क्षेत्र) और फार्मा क्लस्टर का एक साथ आना यह दर्शाता है कि यूपी खुद को वैश्विक विनिर्माण केंद्रों के एक प्रतिस्पर्धी के रूप में स्थापित कर रहा है। जेवर एयरपोर्ट की निकटता का लाभ उठाकर, सरकार विदेशी निवेशकों, विशेष रूप से पूर्वी एशिया के देशों के लिए लॉजिस्टिक बाधाओं को कम कर रही है।
खेल और परिवहन बुनियादी ढांचे में भी बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। सेक्टर 23D में 50 एकड़ भूमि एक आधुनिक अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम के लिए चिन्हित की गई है, जहाँ वैश्विक खेल आयोजनों की मेजबानी होगी। साथ ही, सेक्टर 23C में एक अंतरराज्यीय बस टर्मिनल बनाया जाएगा, जो एयरपोर्ट को औद्योगिक गलियारों से जोड़ने वाली मुख्य धमनी के रूप में कार्य करेगा।
एक वैश्विक हवाई अड्डे का विशेष औद्योगिक क्लस्टरों के साथ मिलन एक 'मल्टीप्लायर इफेक्ट' पैदा करता है, जो क्षेत्रीय जीडीपी को तेजी से बढ़ा सकता है।
फार्मास्युटिकल क्षेत्र को भी बढ़ावा मिलेगा, जिसके लिए 100-125 एकड़ का एक समर्पित क्लस्टर बनाया जाएगा। यह सुनिश्चित करने के लिए कि यहाँ बनने वाली दवाएं वैश्विक मानकों के अनुरूप हों, YEIDA ने US FDA मान्यता के अनुरूप एक मेडिकल डिवाइस टेस्टिंग सुविधा को मंजूरी दी है, जिससे 'मेड इन यूपी' उत्पाद निर्यात के लिए तैयार होंगे।
स्थानीय हितधारकों के साथ तालमेल बनाए रखने के लिए, बोर्ड ने गौतम बुद्ध नगर और बुलंदशहर के किसानों के लिए भूमि खरीद दरों में संशोधन किया है। आपसी सहमति से ली जाने वाली जमीन की दर 6% बढ़ाकर 4,558 रुपये प्रति वर्ग मीटर कर दी गई है, ताकि स्थानीय आबादी को शहरीकरण का सीधा लाभ मिले।
| परियोजना | भूमि क्षेत्र | मुख्य उद्देश्य |
|---|---|---|
| मेडिकल हब | 500 एकड़ | स्वास्थ्य सेवा उत्कृष्टता |
| ताइवान सिटी | 300 एकड़ | इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक निवेश |
| यूनिवर्सिटी टाउनशिप | 480 एकड़ | उच्च शिक्षा |
| फार्मा क्लस्टर | 125 एकड़ | दवा निर्माण |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: 'ताइवान सिटी' क्या है और इसे क्यों बनाया जा रहा है?
ताइवान सिटी 300 एकड़ का एक समर्पित औद्योगिक क्षेत्र है, जिसे विशेष रूप से ताइवान से इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर विनिर्माण में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) आकर्षित करने के लिए बनाया जा रहा है।
प्रश्न 2: नई परियोजनाओं से स्थानीय किसानों को कैसे लाभ होगा?
सरकार ने भूमि खरीद दर को बढ़ाकर 4,558 रुपये प्रति वर्ग मीटर कर दिया है, जिससे अधिग्रहण प्रक्रिया के दौरान किसानों को उचित मुआवजा सुनिश्चित होगा।