भारत की 16वीं जनगणना 2027 के दूसरे चरण में पहली बार व्यापक जाति गणना की जाएगी। फरवरी 2027 में होने वाले इस जनसंख्या गणना चरण के लिए विस्तृत प्रश्नावली और प्रक्रिया स्पष्ट कर दी गई है।

  • 2027 की जनगणना भारत की पहली डिजिटल जनगणना होगी।
  • फरवरी 2027 में होने वाले दूसरे चरण (Population Enumeration) में जाति की पहचान दर्ज की जाएगी।
  • जनगणना के लिए लगभग 30 लाख फील्ड कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी।
  • नागरिकों के लिए 'सेल्फ-एन्यूमरेशन' (स्व-गणना) की सुविधा भी उपलब्ध होगी।

भारत सरकार ने 2027 की जनगणना के दूसरे चरण, जिसे 'जनसंख्या गणना' (Population Enumeration - PE) कहा जाता है, के लिए विस्तृत रूपरेखा तैयार कर ली है। यह ऐतिहासिक जनगणना न केवल भारत की 16वीं जनगणना होगी, बल्कि स्वतंत्र भारत की पहली ऐसी जनगणना भी होगी जिसमें सभी समुदायों की जातिगत पहचान को रिकॉर्ड किया जाएगा। अब तक, जनगणना के दौरान केवल अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) की गणना की जाती थी।

जनगणना प्रक्रिया दो मुख्य चरणों में विभाजित है: हाउसिंग लिस्टिंग ऑपरेशंस (HLO) और जनसंख्या गणना (PE)। HLO चरण, जो 1 अप्रैल 2026 को शुरू हुआ था, 30 सितंबर 2026 को समाप्त होगा। इसके बाद, फरवरी 2027 में PE चरण शुरू होगा, जहाँ वास्तविक जनसंख्या डेटा और विस्तृत जातिगत जानकारी एकत्र की जाएगी।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि जातिगत डेटा का यह समावेश भारत के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य को समझने के लिए एक क्रांतिकारी कदम है। यह डेटा भविष्य की कल्याणकारी योजनाओं, आरक्षण नीतियों और संसाधनों के न्यायसंगत वितरण के लिए आधार तैयार करेगा। राजनीतिक गलियारों में भी इस कदम को लेकर काफी चर्चा है, जहाँ कुछ दल इसे सामाजिक न्याय के लिए आवश्यक मान रहे हैं, तो कुछ इसके निहितार्थों को लेकर चिंतित हैं।

जातिगत जनगणना का डेटा भारत के लोकतांत्रिक ढांचे और नीति निर्माण की दिशा को मौलिक रूप से बदल सकता है।

जनसंख्या गणना चरण के दौरान कुल 40 प्रश्न पूछे जाएंगे। इन प्रश्नों में व्यक्ति का नाम, धर्म, व्यवसाय, शिक्षा, प्रवास का कारण, और सबसे महत्वपूर्ण—जाति शामिल है। इसके अलावा, डिजिटल साक्षरता, बैंक खातों की संख्या और आधार जैसे महत्वपूर्ण डेटा भी एकत्र किए जाएंगे।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

स्वतंत्रता के बाद से अब तक भारत में कुल सात जनगणनाएं पूरी हो चुकी हैं। 2027 की यह कवायद आठवीं जनगणना होगी। ऐतिहासिक रूप से, जनगणना का उपयोग जनसंख्या के रुझानों को समझने के लिए किया जाता रहा है, लेकिन जातिगत डेटा का व्यापक विस्तार एक नया मोड़ है जो दशकों बाद हो रहा है।

विशेषताप्रथम चरण (HLO)द्वितीय चरण (PE)
मुख्य उद्देश्यआवास और घर की सूची बनानाजनसंख्या और जातिगत विवरण
समय सीमाअप्रैल 2026 - सितंबर 2026फरवरी 2027
मुख्य प्रश्न33 प्रश्न (आवास संबंधी)40 प्रश्न (व्यक्तिगत और जातिगत)
Did You Know?: 2027 की जनगणना भारत की पहली पूरी तरह से 'डिजिटल जनगणना' होगी, जो डेटा संग्रह में सटीकता लाएगी।

Frequently Asked Questions

1. क्या जाति की जानकारी देना अनिवार्य है?
हाँ, जनगणना के इस चरण का मुख्य उद्देश्य ही सभी समुदायों की जातिगत पहचान को रिकॉर्ड करना है।

2. क्या मैं स्वयं अपनी जानकारी भर सकता हूँ?
हाँ, सरकार ने 'सेल्फ-एन्यूमरेशन' की सुविधा प्रदान की है, जिसके लिए विशेष समय सीमा निर्धारित की गई है।