कर्नाटक के तटीय जिलों में मछुआरों की जान जाने की घटनाओं में चिंताजनक वृद्धि हुई है, जहां पिछले वित्तीय वर्ष में कुल 102 मौतें दर्ज की गईं। सरकार ने सुरक्षा उपकरणों के लिए बजट आवंटित किया है, लेकिन जीवन रक्षक जैकेटों के वितरण में भारी कमी देखी गई है।
- पिछले वित्तीय वर्ष (2025-26) में तटीय जिलों में कुल 102 मछुआरों की मौत हुई।
- उत्तरा कन्नड़ जिले में सबसे अधिक 57 मौतें हुईं, जहां कोई लाइफ जैकेट नहीं बांटा गया था।
- सरकार ने 2026-27 में उपकरण किट के लिए ₹6.04 करोड़ का प्रावधान किया है।
कर्नाटक के तटीय क्षेत्रों से एक हृदयविदारक खबर सामने आई है। मत्स्य, बंदरगाह और अंतर्देशीय जल परिवहन मंत्री के. एस. बसवंथप्पा ने विधान परिषद में सूचित किया कि पिछले वित्तीय वर्ष (2025-26) के दौरान तीन तटीय जिलों में मछली पकड़ने के दौरान होने वाली मौतों की संख्या में भारी उछाल आया है। आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष कुल 102 मछुआरों ने अपनी जान गंवाई, जो पिछले दो वर्षों की तुलना में काफी अधिक है।
मृत्यु दर का तुलनात्मक विश्लेषण
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि 2023-24 में 57 मौतें हुई थीं और 2024-25 में 56 मौतें दर्ज की गई थीं। हालांकि, 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर 102 हो गया है। यह वृद्धि न केवल चिंताजनक है बल्कि समुद्र में काम करने वाले समुदायों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
| जिला | 2023-24 मौतें | 2024-25 मौतें | 2025-26 मौतें |
|---|---|---|---|
| दक्षिण कन्नड़ | 4 | 4 | 5 |
| उडुपी | 57 | 56 | 40 |
| उत्तरा कन्नड़ | 56 | 56 | 57 |
सुरक्षा उपकरणों का अभाव और लापरवाही
सबसे चौंकाने वाला तथ्य उत्तरा कन्नड़ जिले से सामने आया है, जहां कुल 102 मौतों में से सर्वाधिक 57 मौतें इसी जिले में हुईं। रिपोर्ट के अनुसार, मत्स्य विभाग द्वारा इस जिले में मछुआरों को एक भी लाइफ जैकेट वितरित नहीं किया गया था। इसके विपरीत, उडुपी जिले में 40 मौतें हुईं, लेकिन वहां 193 लाइफ जैकेट वितरित किए गए थे।
सुरक्षा उपकरणों की अनुपलब्धता और समुद्र की अनिश्चितता के बीच मछुआरों का जीवन दांव पर लगा हुआ है।
BozokMedia विश्लेषण: क्या सरकार पर्याप्त कदम उठा रही है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि हालांकि सरकार ने 2026-27 के लिए उपकरण किट वितरित करने हेतु ₹6.04 करोड़ का बजट आवंटित किया है, लेकिन जमीनी स्तर पर जीवन रक्षक उपकरणों की कमी जानलेवा साबित हो रही है। मंत्री ने कहा कि लाइफ जैकेट की मांग और फंड की उपलब्धता के आधार पर वितरण किया जाएगा। वर्तमान में, लाइफ जैकेट खरीदने के लिए निविदा (bidding) प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
कर्नाटक का तटीय क्षेत्र अपनी समृद्ध मछली पकड़ने की अर्थव्यवस्था के लिए जाना जाता है, लेकिन मानसून और समुद्र की लहरों के कारण यह क्षेत्र हमेशा से जोखिम भरा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में, जलवायु परिवर्तन और समुद्र के बढ़ते तापमान के कारण मछुआरों के लिए जोखिम और बढ़ गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
क्या सरकार नई सुरक्षा तकनीक अपना रही है?
हाँ, सरकार ने मशीनीकृत मछली पकड़ने वाली नावों में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 'टू-वे कम्युनिकेशन ट्रांसपोंडर' स्थापित करने का निर्णय लिया है।
लाइफ जैकेट की कीमत क्या है?
बाजार में एक लाइफ जैकेट की कीमत लगभग ₹1,500 से ₹2,500 के बीच होती है।