चार साल तक गुमनामी और अकेलेपन में भटकने के बाद, केरल पुलिस की तत्परता से नागपुर का एक उच्च शिक्षित इंजीनियर अपने परिवार के पास वापस लौट आया है।
- नागपुर के 37 वर्षीय इंजीनियर राष्ट्रपाल मनोहर चंदांडे चार साल तक तमिलनाडु और केरल में भटकते रहे।
- केरल पुलिस के मानवीय दृष्टिकोण के कारण वह अपने परिवार से मिल सके, अन्यथा उन्हें मानसिक अस्पताल भेजा जा सकता था।
- चंदांडे महिंद्रा एंड महिंद्रा में कार्यरत थे और उनके पास इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री थी।
कोच्चि के मुलावुकदु पुलिस स्टेशन में सोमवार को एक अत्यंत भावुक दृश्य देखने को मिला, जब राष्ट्रपाल मनोहर चंदांडे, जो पिछले चार वर्षों से लापता थे, अपने परिवार से दोबारा मिले। महाराष्ट्र के नागपुर से लगभग 1,600 किलोमीटर दूर, केरल की सड़कों पर भटकते हुए चंदांडे का जीवन पूरी तरह से बदल चुका था।
चंदांडे, जो इंजीनियरिंग में स्नातकोत्तर (Postgraduate) हैं, कभी मुंबई में महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसी प्रतिष्ठित कंपनी में प्रति माह 1 लाख रुपये कमाते थे। हालांकि, माता-पिता के निधन और अकेलेपन के कारण वे गहरे अवसाद (Depression) में चले गए और 2022 में घर छोड़कर दक्षिण भारत की ओर निकल पड़े।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि यह मामला केवल एक लापता व्यक्ति के मिलने की खबर नहीं है, बल्कि यह पुलिस प्रशासन के मानवीय चेहरे को भी दर्शाता है। अक्सर ऐसे मामलों में पुलिस व्यक्ति को सीधे शेल्टर होम या मानसिक अस्पताल भेज देती है, लेकिन केरल पुलिस ने उनके अतीत को खोजने का अतिरिक्त प्रयास किया।
पुलिस की संवेदनशीलता ने एक टूटे हुए जीवन को फिर से जोड़ने का काम किया है।
मुलावुकदु पुलिस स्टेशन के सब-इंस्पेक्टर थॉमस पल्लान ने बताया कि चंदांडे अक्सर पानी पीने के लिए स्टेशन के पास आते थे। पुलिस ने उनके साथ धैर्यपूर्वक बातचीत की और उन्हें एक मनोचिकित्सक के पास ले गए। पुलिस ने उनकी अंग्रेजी बोलने की क्षमता और उनके द्वारा बताए गए कॉलेज (वी के पाटिल कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, अहिल्यानगर) के विवरण का उपयोग करके उनके परिवार तक पहुँचने का रास्ता खोजा।
चंदांडे की बहन प्रियंका सिद्धार्थ भषारकर और जीजा अमन संपतराव रामटेके ने पुलिस के इस प्रयास की सराहना की। नागपुर में उनके परिवार ने 2022 में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी, लेकिन समय के साथ वे उम्मीद खो चुके थे।
Frequently Asked Questions
1. चंदांडे कहाँ काम करते थे?
वे मुंबई में महिंद्रा एंड महिंद्रा कंपनी में एक इंजीनियर के रूप में कार्यरत थे।
2. पुलिस ने उन्हें कैसे पहचाना?
पुलिस ने उनके द्वारा बताए गए कॉलेज और उनके अंग्रेजी बोलने के कौशल की मदद से उनके परिजनों का पता लगाया।