भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने दिल्ली के मंडोली में छापेमारी कर 2,350 से अधिक मानक रहित एल्युमिनियम फॉयल रोल जब्त किए हैं। यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए की गई है।
- BIS ने दिल्ली के मंडोली में छापेमारी कर 2,350 से अधिक अवैध एल्युमिनियम फॉयल रोल जब्त किए।
- यह कार्रवाई BIS अधिनियम, 2016 के तहत मानकों के उल्लंघन के कारण की गई।
- उपभोक्ताओं को ISI मार्क और BIS लाइसेंस की जांच करने की सलाह दी गई है।
नई दिल्ली: यदि आप अपने घरों में रोटियों, पराठों या अन्य खाद्य पदार्थों को गर्म रखने के लिए एल्युमिनियम फॉयल का उपयोग करते हैं, तो यह खबर आपकी सेहत से जुड़ी हो सकती है। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली के मंडोली इलाके में एक बड़ी छापेमारी की है, जिसमें लगभग 2,350 घटिया गुणवत्ता वाले एल्युमिनियम फॉयल रोल बरामद किए गए हैं।
BIS की गाजियाबाद शाखा की टीम ने यह कार्रवाई BIS अधिनियम, 2016 की धारा 28 के तहत की। अधिकारियों को सूचना मिली थी कि एक स्थानीय इकाई बिना किसी वैध प्रमाणन और निर्धारित मानकों के एल्युमिनियम फॉयल का उत्पादन और भंडारण कर रही है। तलाशी के दौरान भारी मात्रा में रोल मिले, जिन्हें तुरंत जब्त कर लिया गया।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि खाद्य संपर्क सामग्री (Food Contact Materials) में मिलावट या खराब गुणवत्ता सीधे तौर पर मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है। एल्युमिनियम फॉयल का उपयोग करते समय यदि वह मानकों के अनुरूप नहीं है, तो गर्म भोजन के संपर्क में आने पर हानिकारक रसायन भोजन में मिल सकते हैं, जो दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकते हैं।
गुणवत्ता मानकों का उल्लंघन केवल व्यापारिक धोखाधड़ी नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के साथ एक गंभीर खिलवाड़ है।
एल्युमिनियम फॉयल के निर्माण के लिए क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर (QCO) 2020 लागू है। इसके अनुसार, प्रत्येक निर्माता के पास वैध BIS लाइसेंस होना अनिवार्य है और उत्पाद पर ISI मार्क का होना आवश्यक है। मंडोली की इस इकाई के पास इन महत्वपूर्ण दस्तावेजों और प्रमाणों का अभाव पाया गया।
BIS गाजियाबाद के वरिष्ठ निदेशक जी. भवानी ने पुष्टि की है कि संबंधित फर्म के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अधिकारियों ने अब यह जांचने का काम शुरू किया है कि ये उत्पाद किस स्तर की सामग्री से बनाए जा रहे थे और इनका वितरण नेटवर्क कहाँ तक फैला हुआ था।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए BIS ने समय-समय पर विभिन्न उत्पादों के लिए अनिवार्य प्रमाणन लागू किया है। 2020 में एल्युमिनियम फॉयल के लिए QCO लाना एक बड़ा कदम था ताकि बाजार में बिकने वाले सस्ते और असुरक्षित उत्पादों पर लगाम लगाई जा सके।
Frequently Asked Questions
1. मैं असली ISI मार्क वाले फॉयल की पहचान कैसे करूँ?
हमेशा उत्पाद के पैकेट पर BIS लोगो और लाइसेंस नंबर देखें। आप 'BIS CARE' ऐप के जरिए इसकी प्रमाणिकता जांच सकते हैं।
2. अगर मुझे नकली उत्पाद मिले तो कहाँ शिकायत करें?
आप BIS की आधिकारिक वेबसाइट, गाजियाबाद शाखा या BIS CARE मोबाइल ऐप के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।