सीमा पार से होने वाली ड्रोन तस्करी और हमलों को रोकने के लिए बीएसएफ ने मोबाइल एंटी-ड्रोन शील्ड और ड्रोन वॉरफेयर स्कूल की शुरुआत की है। अब जवान न केवल जमीन बल्कि आसमान से होने वाले खतरों का भी मुकाबला करने के लिए तैयार हैं।

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  • BSF ने सीमा पार से होने वाली ड्रोन तस्करी रोकने के लिए मोबाइल एंटी-ड्रोन शील्ड तैनात की है।
  • टेकनपुर में विशेष 'स्कूल ऑफ ड्रोन वॉरफेयर' की स्थापना की गई है।
  • जवानों को 'सॉफ्ट-किल' और 'हार्ड-किल' दोनों तकनीकों में प्रशिक्षित किया जा रहा है।
  • ड्रोन के जरिए हथियार और ड्रग्स की तस्करी पर लगाम लगाने का लक्ष्य।

भारत-पाकिस्तान सीमा पर सुरक्षा की रणनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव आया है। पिछले कुछ वर्षों में, घुसपैठियों ने जमीन के बजाय आसमान का रास्ता चुनना शुरू कर दिया है। छोटे और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन अब सीमा पार से हथियार, गोला-बारूद और नशीले पदार्थों की तस्करी का एक प्रमुख माध्यम बन गए हैं। इस उभरते खतरे को देखते हुए, सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने अपनी रक्षा प्रणाली को आधुनिक बनाते हुए 'मोबाइल एंटी-ड्रोन शील्ड' और एक समर्पित 'ड्रोन वॉरफेयर स्कूल' की शुरुआत की है।

क्यों जरूरी है यह बदलाव?

पारंपरिक सुरक्षा व्यवस्था मुख्य रूप से जमीन पर गश्त और घुसपैठ रोकने पर केंद्रित थी। हालांकि, पंजाब, जम्मू और राजस्थान जैसे क्षेत्रों में ड्रोन के बढ़ते उपयोग ने सुरक्षा एजेंसियों के सामने नई चुनौती पेश की है। ड्रोन न केवल निगरानी के लिए बल्कि हथियारों की डिलीवरी के लिए भी इस्तेमाल किए जा रहे हैं। BozokMedia analysis shows कि आधुनिक युद्धक्षेत्र में ड्रोन का महत्व रूस-यूक्रेन संघर्ष के दौरान स्पष्ट रूप से देखा गया है, जहाँ कम लागत वाले ड्रोन ने बड़े सैन्य लक्ष्यों को प्रभावित किया है।

आधुनिक सीमा सुरक्षा अब केवल जमीन की बाड़ तक सीमित नहीं है; अब आसमान में भी एक अदृश्य युद्ध लड़ा जा रहा है।

मोबाइल एंटी-ड्रोन शील्ड की विशेषताएं

भारत की हजारों किलोमीटर लंबी सीमा को देखते हुए, एक ही जगह स्थिर एंटी-ड्रोन सिस्टम लगाना व्यावहारिक नहीं है। इसीलिए, BSF 'मोबाइल एंटी-ड्रोन शील्ड' का उपयोग कर रही है। इसे आवश्यकतानुसार संवेदनशील इलाकों, हथियार गोदामों या आबादी वाले क्षेत्रों में तुरंत तैनात किया जा सकता है। यह प्रणाली ड्रोन की पहचान करने, उसके सिग्नल को ट्रैक करने और उसे निष्क्रिय करने में सक्षम है।

सॉफ्ट-किल बनाम हार्ड-किल तकनीक

BSF के जवान अब दो प्रमुख तकनीकों में माहिर हो रहे हैं:
1. सॉफ्ट-किल: इसमें ड्रोन के संचार (Communication) या नेविगेशन सिस्टम को इलेक्ट्रॉनिक तरीके से जाम कर दिया जाता है।
2. हार्ड-किल: इसमें ड्रोन को भौतिक रूप से नष्ट किया जाता है या उसे जमीन पर गिरा दिया जाता है।

विशेषतासॉफ्ट-किल (Soft-Kill)हार्ड-किल (Hard-Kill)
कार्यप्रणालीइलेक्ट्रॉनिक सिग्नल जैमिंगभौतिक विनाश/गोली मारना
मुख्य लक्ष्यड्रोन का नियंत्रण छीननाड्रोन को पूरी तरह नष्ट करना
उपयोगकम जोखिम वाले क्षेत्रों मेंतत्काल खतरे की स्थिति में

टेकनपुर में ड्रोन वॉरफेयर स्कूल

मध्य प्रदेश के टेकनपुर में स्थित BSF अकादमी में 'स्कूल ऑफ ड्रोन वॉरफेयर' स्थापित किया गया है। यहाँ 'ड्रोन कमांडो' और 'ड्रोन वॉरियर' जैसे विशेष कोर्स चलाए जा रहे हैं। प्रशिक्षण को तीन श्रेणियों में बांटा गया है: फ्लाइंग एंड पायलटिंग, टैक्टिक्स, और रिसर्च एंड डेवलपमेंट। इससे BSF ऐसे विशेषज्ञ तैयार कर रही है जो जटिल भौगोलिक परिस्थितियों और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंटरफेरेंस के बीच भी ड्रोन का संचालन कर सकें।

Did You Know?: ड्रोन फॉरेंसिक लैब के माध्यम से बरामद ड्रोन के डेटा का विश्लेषण करके यह पता लगाया जा सकता है कि ड्रोन किस स्थान से उड़ाया गया था।

निष्कर्ष और भविष्य की तैयारी

BSF केवल ड्रोन को गिराने पर ही नहीं, बल्कि उनके पीछे के नेटवर्क को समझने पर भी ध्यान दे रही है। दिल्ली और अमृतसर में ड्रोन फॉरेंसिक लैब की स्थापना इस दिशा में एक बड़ा कदम है। केंद्र सरकार के निर्देशानुसार, अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा का यह जाल अब तकनीक, इंटेलिजेंस और फॉरेंसिक के तालमेल से और भी मजबूत होगा।

Frequently Asked Questions

1. BSF का मोबाइल एंटी-ड्रोन सिस्टम क्या है?
यह एक गतिशील रक्षा प्रणाली है जिसे जरूरत के अनुसार सीमा के किसी भी संवेदनशील क्षेत्र में ले जाया जा सकता है ताकि ड्रोन से होने वाले हमलों को रोका जा सके।

2. ड्रोन वॉरफेयर स्कूल कहाँ स्थित है?
यह स्कूल मध्य प्रदेश के टेकनपुर में BSF अकादमी के भीतर स्थित है।