राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम में संशोधन को मंजूरी दे दी है, जिससे UPI और रुपे कार्ड लेनदेन पर शुल्क लगाने का कानूनी मार्ग प्रशस्त हो गया है। इसके साथ ही कराधान कानूनों में बदलाव से विदेशी निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
- राष्ट्रपति ने भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन को मंजूरी दी।
- UPI और रुपे कार्ड लेनदेन पर 'मर्चेंट डिस्काउंट रेट' (MDR) शुल्क लगाने का आधार तैयार।
- उपभोक्ताओं (Users) के लिए UPI भुगतान फिलहाल नि:शुल्क बना रहेगा।
- विदेशी इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए आयकर छूट को वित्त वर्ष 2040-41 तक बढ़ाया गया।
नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण विधायी घटनाक्रम में, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 'कराधान एवं अन्य कानून (संशोधन) अधिनियम, 2026' और 'भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007' में संशोधन करने वाले विधेयकों को अपनी आधिकारिक स्वीकृति दे दी है। संसद द्वारा 10 अगस्त को पारित किए गए इन विधेयकों के लागू होने से भारत के डिजिटल वित्तीय परिदृश्य और विदेशी निवेश नीति में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे।
सबसे महत्वपूर्ण बदलाव 'भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम' में किया गया है। इस संशोधन ने सरकार को UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) और RuPay कार्ड लेनदेन पर शुल्क (MDR) लगाने के लिए आवश्यक कानूनी ढांचा प्रदान कर दिया है। अब सरकार अधिसूचना के माध्यम से यह निर्धारित कर सकेगी कि किन विशिष्ट इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों को शुल्क से छूट दी जाएगी।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि यह कदम डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र के मुद्रीकरण (Monetization) की दिशा में एक रणनीतिक बदलाव है। हालांकि वर्तमान में बैंक और सेवा प्रदाता ग्राहकों से शुल्क नहीं ले सकते, लेकिन एनपीसीआई (NPCI) के नेतृत्व वाली समिति अब मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय ले सकेगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया है कि आम उपभोक्ताओं के लिए UPI भुगतान नि:शुल्क बना रहेगा, और शुल्क केवल कुछ विशिष्ट व्यावसायिक श्रेणियों पर ही लागू होगा।
डिजिटल बुनियादी ढांचे के रखरखाव के लिए व्यावसायिक लेनदेन पर शुल्क लगाना एक वैश्विक मानक है, जो भविष्य में सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने में मदद करेगा।
दूसरी ओर, 'कराधान एवं अन्य कानून (संशोधन) अधिनियम' का उद्देश्य भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाना है। इस कानून के माध्यम से विदेशी पूंजी को आकर्षित करने और घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को सशक्त बनाने के प्रयास किए गए हैं। विशेष रूप से, विदेशी कंपनियों के लिए भारत में अनुबंध विनिर्माण (Contract Manufacturing) पर मिलने वाली आयकर छूट को अब वित्त वर्ष 2040-41 तक बढ़ा दिया गया है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
यह नया कानून 5 जून, 2026 को जारी किए गए एक अध्यादेश का स्थान लेता है। उस अध्यादेश ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) को सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश से होने वाली आय पर कर लाभ प्रदान किया था। अब विधायी रूप से इसे स्थायी बना दिया गया है, जिससे मोबाइल फोन, लैपटॉप, सर्वर और उनके कलपुर्जों के निर्माण में शामिल वैश्विक दिग्गजों को भारत में निवेश करने के लिए दीर्घकालिक प्रोत्साहन मिलेगा।
Frequently Asked Questions
1. क्या मुझे UPI इस्तेमाल करने के लिए पैसे देने होंगे?
नहीं, सरकार के अनुसार आम उपभोक्ताओं के लिए UPI भुगतान नि:शुल्क बना रहेगा। शुल्क केवल कुछ व्यावसायिक लेनदेन पर लागू हो सकता है।
2. इस नए कानून का इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
आयकर छूट को 2040-41 तक बढ़ाने से विदेशी कंपनियां भारत में मोबाइल और कंप्यूटर जैसे उपकरण बनाने के लिए अधिक निवेश करेंगी।