हरियाणा सरकार ने पुलिस हिरासत में प्रताड़ना या लापरवाही के कारण होने वाली मौतों के लिए ₹7.5 लाख के मुआवजे की नई नीति अधिसूचित की है। दोषी अधिकारियों के वेतन से 50% राशि वसूलने का भी प्रावधान किया गया है।

  • हिरासत में प्रताड़ना या लापरवाही से मौत पर ₹7.5 लाख का मुआवजा मिलेगा।
  • दोषी पुलिस अधिकारी के वेतन से मुआवजे की 50% राशि वसूली जाएगी।
  • यह निर्णय हरियाणा मानवाधिकार आयोग के हस्तक्षेप के बाद लिया गया है।
  • प्राकृतिक बीमारी या भागने के प्रयास में हुई मौतें इस नीति के दायरे से बाहर हैं।

हरियाणा सरकार ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए पुलिस हिरासत में होने वाली मौतों के लिए मुआवजे की एक नई नीति अधिसूचित की है। इस नीति के तहत, यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु पुलिस प्रताड़ना, अमानवीय व्यवहार या लापरवाही के कारण होती है, तो उसके परिजनों को 7.5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।

यह महत्वपूर्ण कदम हरियाणा मानवाधिकार आयोग (HHRC) की सक्रियता के बाद उठाया गया है। आयोग ने पिंजौर के निवासी परवेश शर्मा द्वारा दायर एक शिकायत पर संज्ञान लिया था, जिसमें पुलिस द्वारा अवैध हिरासत और थर्ड-डिग्री टॉर्चर के गंभीर आरोप लगाए गए थे। आयोग ने स्पष्ट किया कि हिरासत में हिंसा मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है और केवल विभागीय कार्रवाई पर्याप्त नहीं है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह निर्णय?

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि यह नीति न केवल पीड़ितों को न्याय प्रदान करती है, बल्कि कानून प्रवर्तन अधिकारियों के बीच जवाबदेही भी सुनिश्चित करती है। पहली बार, मुआवजे की एक बड़ी राशि सीधे दोषी अधिकारी की जेब से वसूलने का प्रावधान किया गया है, जो पुलिस बल के भीतर अनुशासन बनाए रखने में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।

हिरासत में हिंसा के खिलाफ यह नीति राज्य में पुलिस सुधारों की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

नई नीति के अनुसार, मुआवजा केवल उन्हीं मामलों में दिया जाएगा जिनकी पुष्टि मजिस्ट्रेट जांच के माध्यम से की जाएगी। इसमें हिरासत में झगड़े, आत्महत्या, या पुलिस/चिकित्सा कर्मियों की लापरवाही से हुई मौतें शामिल हैं। हालांकि, यदि मृत्यु प्राकृतिक बीमारी, प्राकृतिक आपदा, या हिरासत से भागने के प्रयास के दौरान होती है, तो मुआवजे का दावा नहीं किया जा सकेगा।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत में हिरासत में होने वाली मौतों (Custodial Deaths) का मुद्दा लंबे समय से मानवाधिकार कार्यकर्ताओं द्वारा उठाया जा रहा है। मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 18 के तहत, आयोगों को पीड़ितों को राहत प्रदान करने के लिए निर्देश देने की शक्ति प्राप्त है। हरियाणा का यह निर्णय इस दिशा में एक मजबूत कानूनी ढांचा प्रदान करता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: मुआवजे की राशि दोषी अधिकारी से कैसे वसूली जाएगी?
उत्तर: नीति के अनुसार, यदि प्रताड़ना सिद्ध होती है, तो मुआवजे की कुल राशि का कम से कम 50% दोषी पुलिस अधिकारी के वेतन से काटा जाएगा।

प्रश्न 2: किन स्थितियों में मुआवजा नहीं मिलेगा?
उत्तर: प्राकृतिक बीमारी, प्राकृतिक आपदा, या हिरासत से भागने के दौरान हुई मौतों के लिए मुआवजा नहीं दिया जाएगा।