कोच्चि नगर निगम ने राजस्व विभाग से ऐतिहासिक परेड और सांता क्रूज़ मैदानों का नियंत्रण लेने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया है। वर्षों की उपेक्षा के कारण इन ऐतिहासिक स्थलों की स्थिति दयनीय हो गई है, जिससे स्थानीय युवाओं और खेल प्रेमियों में चिंता बढ़ गई है।
- कोच्चि नगर निगम ने परेड और सांता क्रूज़ मैदानों का नियंत्रण राजस्व विभाग से लेने हेतु राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा है।
- मैदानों की वर्तमान स्थिति अत्यंत दयनीय है, जिससे खेल गतिविधियों में बाधा आ रही है।
- नगर निगम इन मैदानों के रखरखाव के लिए CSR फंड या केंद्र के अर्बन चैलेंज फंड (UCF) का उपयोग करने की योजना बना रहा है।
कोच्चि के ऐतिहासिक फोर्ट कोच्चि क्षेत्र के दो प्रमुख खेल मैदानों—परेड ग्राउंड और सांता क्रूज़ ग्राउंड—के भविष्य को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है। कोच्चि नगर निगम परिषद ने एक औपचारिक प्रस्ताव पारित किया है, जिसमें मांग की गई है कि इन ऐतिहासिक मैदानों का प्रबंधन वर्तमान राजस्व विभाग के बजाय नगर निगम को सौंपा जाए।
यह निर्णय तब लिया गया है जब इन ऐतिहासिक स्थलों की स्थिति को लेकर जनता और स्थानीय खेल संगठनों से लगातार शिकायतें मिल रही हैं। इन मैदानों की उपेक्षा के कारण इनका स्वरूप बिगड़ रहा है। उल्लेखनीय है कि परेड ग्राउंड का अंतिम बार बड़े स्तर पर रखरखाव 2017 में किया गया था, जब इसे FIFA अंडर-17 विश्व कप के लिए अभ्यास मैदान के रूप में उपयोग किया गया था।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मुद्दा केवल खेल के मैदानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शहरी बुनियादी ढांचे के प्रबंधन और ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण के बीच के संघर्ष को दर्शाता है। यदि नियंत्रण का हस्तांतरण सफल होता है, तो यह स्थानीय युवाओं के लिए खेल सुविधाओं के विस्तार का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।
इन ऐतिहासिक मैदानों का उचित प्रबंधन न केवल खेल संस्कृति को बचाएगा, बल्कि फोर्ट कोच्चि की पहचान को भी बनाए रखेगा।
कोच्चि की मेयर वी.के. मिनिमोल ने स्पष्ट किया कि नगर निगम इन मैदानों को कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) फंडिंग या केंद्र सरकार के नए अर्बन चैलेंज फंड (UCF) के माध्यम से पुनर्जीवित करने का लक्ष्य रखता है। उनका उद्देश्य इन स्थानों को नियमित खेल और टूर्नामेंटों के लिए सुलभ बनाना है, जबकि वेली मैदान जैसे क्षेत्रों को केवल बड़े मुकाबलों के लिए सीमित रखा जाएगा।
हालाँकि, इस प्रस्ताव को राजनीतिक विरोध का भी सामना करना पड़ रहा है। पूर्व एलडीएफ पार्षद बेनेडिक्ट फर्नांडीस ने इसे केवल एक 'आंखों का धोखा' करार देते हुए कहा कि निगम की जिम्मेदारी है कि वह अपने बकाया वसूल कर सार्वजनिक मैदानों का रखरखाव करे, चाहे नियंत्रण किसी का भी हो। वहीं, अनुभवी कोच रफस डिसूजा ने सुझाव दिया कि नियंत्रण केवल प्रशासनिक बदलाव तक सीमित न रहे, बल्कि इसे अनुभवी खिलाड़ियों के संघ को सौंपा जाना चाहिए।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: वर्तमान में इन मैदानों का प्रबंधन कौन कर रहा है?
उत्तर: वर्तमान में इन मैदानों का प्रबंधन राजस्व विभाग द्वारा किया जा रहा है।
प्रश्न 2: नगर निगम इन मैदानों के रखरखाव के लिए धन कहाँ से लाएगा?
उत्तर: नगर निगम CSR फंडिंग और केंद्र के अर्बन चैलेंज फंड (UCF) का उपयोग करने की योजना बना रहा है।