मणिपुर में जनगणना से पहले NRC अपडेट करने की मांग को लेकर तनाव बढ़ गया है। विभिन्न समुदायों के एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्र सरकार से मुलाकात करने के लिए दिल्ली जाने का निर्णय लिया है।
- मणिपुर के विभिन्न समुदायों का 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल NRC की मांग को लेकर दिल्ली रवाना हुआ।
- जनगणना (Census 2027) से पहले NRC अपडेट करने की मांग को लेकर इम्फाल घाटी में आंदोलन जारी है।
- कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए राज्य में शैक्षणिक संस्थान तीन दिनों के लिए बंद कर दिए गए हैं।
मणिपुर की इम्फाल घाटी में बढ़ते नागरिक असंतोष के बीच, विभिन्न समुदायों और संगठनों के नेताओं का एक 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल गुरुवार को नई दिल्ली के लिए रवाना हुआ। इस दल का मुख्य उद्देश्य केंद्र सरकार, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं और खुफिया ब्यूरो (IB) के अधिकारियों से मिलकर राज्य में 2027 की जनगणना से पहले राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को अपडेट करने की मांग करना है।
इस प्रतिनिधिमंडल में मेइती, पांगाल (मणिपुरी मुस्लिम), नागा और अन्य स्वदेशी समुदायों के प्रमुख सदस्य शामिल हैं। उनके प्रस्थान के साथ ही मणिपुर में केंद्रीय और राज्य सरकारी कार्यालयों का बहिष्कार भी शुरू हो गया है। 'कैम्पेन फॉर जस्ट एंड फ्री डेलिमिटेशन' (JFD) के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन ने इम्फाल घाटी के पांच जिलों में अनिश्चितकालीन बहिष्कार की घोषणा की है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि मणिपुर में NRC की मांग केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह राज्य की जनसांख्यिकीय सुरक्षा और पहचान का एक संवेदनशील मुद्दा बन गया है। यदि केंद्र सरकार इस मांग पर त्वरित प्रतिक्रिया नहीं देती है, तो राज्य में मौजूदा जातीय तनाव और गहरा सकता है।
मणिपुर में जनगणना से पहले NRC का क्रियान्वयन स्वदेशी समुदायों के अस्तित्व की रक्षा के लिए अनिवार्य माना जा रहा है।
आंदोलनकारियों ने असम और जम्मू-कश्मीर का उदाहरण देते हुए तर्क दिया है कि जनगणना जैसे कार्यों को NRC जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं के लिए स्थगित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि असम में असम आंदोलन के दौरान 1981 की जनगणना नहीं हो सकी थी, ठीक उसी तरह मणिपुर में भी प्राथमिकता तय करना आवश्यक है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
मणिपुर में जनसांख्यिकीय परिवर्तन और अवैध प्रवासन को लेकर लंबे समय से चिंताएं बनी हुई हैं। राज्य सरकार ने भी स्वीकार किया है कि अवैध प्रवासन के कारण होने वाले असंतुलन को रोकने के लिए NRC का कार्यान्वयन आवश्यक है। हालांकि, कुकी-जो (Kuki-Zo) परिषद ने 1951 को आधार वर्ष बनाने के प्रस्ताव पर गंभीर आपत्ति जताई है, जिससे समुदायों के बीच अनिश्चितता का माहौल बन गया है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: मणिपुर के नेता दिल्ली क्यों जा रहे हैं?
उत्तर: वे केंद्र सरकार से जनगणना से पहले NRC को अपडेट करने की मांग करने जा रहे हैं।
प्रश्न 2: क्या मणिपुर में स्कूल खुले हैं?
उत्तर: नहीं, कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए 22 अगस्त तक सभी शैक्षणिक संस्थान बंद रखे गए हैं।