केंद्र सरकार NAMASTE योजना का दायरा बढ़ाकर अब ग्रामीण क्षेत्रों तक ले जाने की तैयारी में है। हालांकि, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) ने योजना के तहत सब्सिडी आवेदनों की भारी अस्वीकृति दर पर चिंता जताई है।

  • NAMASTE योजना का विस्तार अब शहरों से ग्रामीण इलाकों तक किया जाएगा।
  • योजना में अब नाली साफ करने वाले और STP कर्मियों को भी शामिल किया जाएगा।
  • NCSC ने पूंजीगत सब्सिडी के लिए आवेदनों की उच्च अस्वीकृति दर पर सवाल उठाए हैं।
  • सरकार ने इस विस्तार के लिए ₹498.73 करोड़ का बजट प्रस्तावित किया है।

भारत सरकार की महत्वाकांक्षी NAMASTE (National Action for Mechanised Sanitation Ecosystem) योजना अब शहरी सीमाओं को लांघकर ग्रामीण भारत की ओर बढ़ रही है। सामाजिक न्याय मंत्रालय ने एक प्रस्ताव पेश किया है जिसके तहत इस योजना के दायरे को बढ़ाकर अब गांवों के सफाई कर्मचारियों को भी इसका लाभ दिया जाएगा। इस विस्तार का मुख्य उद्देश्य सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान होने वाली मौतों को जड़ से मिटाना और स्वच्छता कार्य का मशीनीकरण करना है।

प्रस्तावित योजना के अनुसार, अब इसमें केवल सीवर कर्मचारी ही नहीं, बल्कि नाली साफ करने वाले (drain cleaners), सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के कर्मचारी और मल कीचड़ उपचार संयंत्र (faecal sludge treatment plants) में काम करने वाले कर्मियों को भी शामिल किया जाएगा। सरकार ने इस व्यापक विस्तार के लिए 2030-31 तक लगभग ₹498.73 करोड़ के परिव्यय का प्रस्ताव दिया है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि यह कदम केवल एक प्रशासनिक विस्तार नहीं है, बल्कि सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता का काम आज भी अत्यधिक जोखिम भरा है। यदि योजना का क्रियान्वयन सही ढंग से होता है, तो यह हजारों परिवारों को असुरक्षित श्रम से निकालकर सम्मानजनक स्वरोजगार की ओर ले जा सकता है।

सफाई कर्मचारियों का मशीनीकरण केवल तकनीक का मामला नहीं है, बल्कि यह उनके मानवाधिकारों और जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करने का एक अनिवार्य कदम है।

हालांकि, इस विस्तार के बीच एक गंभीर चुनौती उभर कर आई है। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) ने योजना के तहत स्वरोजगार और पूंजीगत सब्सिडी के लिए प्राप्त आवेदनों की भारी अस्वीकृति दर पर गहरी चिंता व्यक्त की है। आंकड़ों के अनुसार, लगभग 1 लाख सीवर और सेप्टिक टैंक श्रमिकों की पहचान की गई थी, लेकिन उनमें से केवल 810 को ही पूंजीगत सब्सिडी के लिए मंजूरी मिली, और उनमें से भी केवल 147 को ही वास्तविक धनराशि प्राप्त हुई है।

आयोग ने बार-बार सामाजिक न्याय मंत्रालय को पत्र लिखकर यह मांग की है कि सब्सिडी के आवेदनों के खारिज होने के कारणों की जांच की जाए। विशेष रूप से 'सफाई उद्यमी योजना' के तहत प्राप्त आवेदनों की उच्च अस्वीकृति दर इस योजना की सफलता पर प्रश्नचिह्न लगाती है।

विवरणपहचानी गई संख्यासब्सिडी स्वीकृतधनराशि प्राप्त
सीवर और सेप्टिक टैंक श्रमिक (SSWs)90,915810147
मैन्युअल स्कैवेंजर्स58,0002,652-

सरकार के आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 तक सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान 498 लोगों की जान जा चुकी है। इनमें से 90% से अधिक मामलों में श्रमिकों के पास सुरक्षा उपकरण (PPE) नहीं थे। वर्तमान में, सरकार ने 85,743 PPE किट और हजारों प्रशिक्षण कार्यशालाएं आयोजित की हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन की गति अभी भी धीमी है।

Did You Know?: NAMASTE योजना का लक्ष्य स्वच्छता कार्य को पूरी तरह से मशीनीकृत करके 'मैनुअल स्कैवेंजिंग' को पूरी तरह समाप्त करना है।

Frequently Asked Questions

1. NAMASTE योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य स्वच्छता कार्यों का मशीनीकरण करना और सीवर/सेप्टिक टैंक सफाई के दौरान होने वाली मौतों को रोकना है।

2. योजना में किन नए वर्गों को शामिल किया जा रहा है?
अब इसमें ग्रामीण क्षेत्रों के नाली साफ करने वाले और STP कर्मियों को भी शामिल किया जाएगा।