पीएम केयर्स फ़ंड के ऑडिट आंकड़ों ने देश में हलचल मचा दी है। जहां फंड में 8,452 करोड़ रुपये जमा हैं, वहीं पिछले वित्तीय वर्ष में खर्च की गई राशि महज 87.85 लाख रुपये है, जिससे इसकी उपयोगिता और पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
- पीएम केयर्स फ़ंड में 31 मार्च 2025 तक कुल ₹8,452 करोड़ जमा हैं।
- वर्ष 2024-25 में फंड से केवल ₹87.85 लाख खर्च किए गए।
- फंड का 93% हिस्सा यानी ₹7,846 करोड़ फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में रखा गया है।
- पीएम केयर्स फंड को सूचना का अधिकार (RTI) के दायरे से बाहर रखा गया है।
पीएम केयर्स फ़ंड के हालिया ऑडिट आंकड़ों ने वित्तीय पारदर्शिता और आपदा प्रबंधन की रणनीति पर एक बड़ी बहस छेड़ दी है। साल 2020 में महज 2.25 लाख रुपये से शुरू हुआ यह फंड, 31 मार्च 2025 तक बढ़कर 8,452 करोड़ रुपये के विशाल भंडार में तब्दील हो चुका है। हालांकि, चौंकाने वाली बात यह है कि इतने बड़े संचय के बावजूद, वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान इस फंड से खर्च की गई राशि मात्र 87.85 लाख रुपये रही है।
सरकार द्वारा 18 अगस्त को जारी किए गए ऑडिट किए गए खातों के अनुसार, फंड की आय के स्रोतों में घरेलू दान (479.04 करोड़ रुपये) और विदेशी दान (92 लाख रुपये) शामिल हैं। इसके अलावा, फंड को ब्याज के रूप में 475.14 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि फंड का लगभग 93 प्रतिशत हिस्सा (7,846 करोड़ रुपये) फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में रखा गया है, जो यह दर्शाता है कि आपदा राहत के लिए बनाए गए इस कोष का सक्रिय उपयोग न के बराबर हो रहा है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि जब देश के विभिन्न हिस्सों में बाढ़, चक्रवात और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाएं बार-बार आती हैं, तो आपदा राहत के लिए समर्पित फंड का इतना कम उपयोग होना नीतिगत विफलता या निर्णय लेने की प्रक्रिया में कमी का संकेत दे सकता है। यदि आपदा के समय यह पैसा खर्च नहीं किया जा रहा है, तो इसका संचय केवल बैंक खातों तक सीमित रह जाता है, जिससे वास्तविक पीड़ितों को अपेक्षित सहायता नहीं मिल पाती।
"पीएम केयर्स फ़ंड पर्दानशीं पारदर्शिता है। सरकार की ऑडिट रिपोर्टें खोखली हैं क्योंकि वे वास्तविक जानकारी देने में विफल रहती हैं।" - प्रोफेसर रीतिका खेरा, अर्थशास्त्री।
आलोचकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने फंड की प्रकृति पर भी सवाल उठाए हैं। अंजलि भारद्वाज जैसी कार्यकर्ताओं का तर्क है कि शुरुआत में इसे केंद्र सरकार द्वारा बनाया गया बताया गया था ताकि पीएसयू से सीएसआर (CSR) फंड लिया जा सके, लेकिन बाद में इसे आरटीआई (RTI) के दायरे से बाहर रखने के लिए नियमों में बदलाव कर दिया गया। यह कदम सार्वजनिक जवाबदेही के सिद्धांतों के विरुद्ध माना जा रहा है।
खर्च का तुलनात्मक विश्लेषण
| वित्तीय वर्ष | कुल खर्च (करोड़ रुपये में) |
|---|---|
| 2020-21 | 3,976.17 |
| 2021-22 | 3,716.29 |
| 2022-23 | 437.87 |
| 2023-24 | 15.59 |
| 2024-25 | 0.87 (लगभग) |
आंकड़े स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि फंड से होने वाले खर्च में साल-दर-साल भारी गिरावट आई है। 2020-21 में जहां लगभग 4,000 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, वहीं अब यह राशि नगण्य स्तर पर पहुंच गई है। यह गिरावट इस सवाल को जन्म देती है कि क्या फंड का प्रबंधन करने वाली समिति और इसके निर्णय लेने की प्रक्रिया प्रभावी है?
Frequently Asked Questions
1. क्या पीएम केयर्स फंड आरटीआई के तहत आता है?
नहीं, सरकार ने इसे सार्वजनिक प्राधिकरण नहीं माना है, इसलिए यह आरटीआई के दायरे से बाहर है।
2. फंड का अधिकांश पैसा कहां रखा गया है?
फंड का लगभग 93% हिस्सा फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में सुरक्षित रखा गया है।