1925 में केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा स्थापित आरएसएस के शुरुआती दशकों का विश्लेषण, जिसने भारतीय राजनीति और समाज को गहराई से प्रभावित किया है।

  • आरएसएस की स्थापना 1925 में विजयादशमी के दिन केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा की गई थी।
  • संगठन का मुख्य उद्देश्य हिंदू राष्ट्र की स्थापना और सांस्कृतिक पुनरुद्धार है।
  • विनायक दामोदर सावरकर की 'हिंदुत्व' विचारधारा संगठन के आधार स्तंभों में से एक है।
  • शुरुआत में एक छोटी शाखा से शुरू होकर, आज यह लाखों शाखाओं तक फैल चुका है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का इतिहास भारत के आधुनिक राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। 1925 में नागपुर में विजयादशमी के पावन अवसर पर केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा स्थापित यह संगठन, आज दुनिया के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठनों में से एक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे 'अमर संस्कृति और आधुनिकीकरण का वटवृक्ष' बताया है।

स्थापना और प्रारंभिक संघर्ष

आरएसएस का उदय ब्रिटिश राज के खिलाफ भारत के संघर्ष के बीच हुआ। हेडगेवार, जो पहले कांग्रेस के सक्रिय सदस्य थे, कांग्रेस की समावेशी राष्ट्रवाद की अवधारणा से असंतुष्ट थे। उनका मानना था कि हिंदू समाज जाति, क्षेत्र और संप्रदायों में विभाजित है, जिससे उनकी शक्ति क्षीण हो रही है। इसी बिखराव को दूर करने और हिंदू समुदाय में अनुशासन व एकता लाने के लिए उन्होंने 'शाखाओं' की अवधारणा पेश की।

विचारधारा का आधार: हिंदुत्व और अखंड भारत

संगठन की वैचारिक नींव में विनायक दामोदर सावरकार के विचारों का गहरा प्रभाव है। सावरकार के 'हिंदुत्व' सिद्धांत के अनुसार, भारत एक हिंदू राष्ट्र है जहाँ नागरिक कोई भी हो सकता है, लेकिन सांस्कृतिक दावा केवल हिंदुओं का है। इसके अतिरिक्त, आरएसएस 'अखंड भारत' की अवधारणा का समर्थक है, जिसमें अफगानिस्तान से लेकर म्यांमार और श्रीलंका तक के क्षेत्रों को शामिल करने की कल्पना की गई है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि आरएसएस केवल एक धार्मिक संगठन नहीं है, बल्कि यह भारतीय राजनीति की मुख्यधारा का वैचारिक केंद्र है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की वैचारिक नींव होने के नाते, आरएसएस की नीतियों और आंदोलनों का सीधा असर देश की शासन व्यवस्था और सामाजिक संरचना पर पड़ता है।

आरएसएस का विकास केवल एक संगठन का विस्तार नहीं, बल्कि भारतीय राष्ट्रवाद की एक नई परिभाषा गढ़ने की प्रक्रिया है।

संगठन के शुरुआती दिनों में कई नामों पर चर्चा हुई थी, जैसे 'भारत उद्धारक मंडल' और 'हिंदू सेवक संघ', लेकिन अंततः 'राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ' नाम को ही अंतिम रूप दिया गया। आज यह संगठन 51,000 से अधिक स्थानों पर 1,27,000 से अधिक शाखाओं के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है।

Did You Know?: आरएसएस को स्वतंत्र भारत में अब तक कम से कम तीन बार प्रतिबंधित किया जा चुका है।

Frequently Asked Questions

1. आरएसएस की स्थापना किसने की थी?
आरएसएस की स्थापना केशव बलिराम हेडगेवार ने 1925 में की थी।

2. आरएसएस का मुख्य लक्ष्य क्या है?
इसका मुख्य लक्ष्य भारत को एक 'हिंदू राष्ट्र' के रूप में पुनर्जीवित करना और सांस्कृतिक गौरव को स्थापित करना है।