सुप्रीम कोर्ट ने छात्र विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा की जांच के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया है। साथ ही, CAA नागरिकता आवेदनों के लिए जिला कलेक्टरों को अधिकार दिए गए हैं और झारखंड हाई कोर्ट ने नियुक्तियों को रद्द करने के आदेश पर रोक लगा दी है।

  • सुप्रीम कोर्ट ने छात्र प्रदर्शनों में पुलिस हिंसा की जांच के लिए जस्टिस (सेवानिवृत्त) आर. सुभाष रेड्डी के नेतृत्व में उच्च-स्तरीय समिति बनाई है।
  • CAA नागरिकता आवेदनों की प्रक्रिया अब गुजरात, राजस्थान, पंजाब, पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के जिला कलेक्टरों के पास होगी।
  • झारखंड हाई कोर्ट ने 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षाओं के माध्यम से नियुक्त सरकारी कर्मचारियों को रद्द करने के अधिसूचना पर रोक लगा दी है।
  • सुप्रीम कोर्ट ने नए श्रम कोड के तहत 'उद्योग' की 1978 की पुरानी व्यापक व्याख्या को खारिज कर दिया है।

न्यायपालिका और नागरिकता संबंधी बड़े घटनाक्रम

आज के प्रमुख कानूनी घटनाक्रमों में सुप्रीम कोर्ट का निर्णय सबसे महत्वपूर्ण रहा। कोर्ट ने छात्र विरोध प्रदर्शनों, विशेष रूप से NEET-UG से संबंधित प्रदर्शनों के दौरान पुलिस द्वारा कथित अत्यधिक बल प्रयोग और हिंसा की जांच करने के लिए एक उच्च-स्तरीय जांच समिति (HPEC) का गठन किया है। इस समिति का नेतृत्व सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी करेंगे। समिति में पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रवि शंकर झा और पूर्व CBI निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला जैसे दिग्गज शामिल हैं।

नागरिकता के मोर्चे पर, गृह मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव किया है। अब नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत लंबित नागरिकता आवेदनों को संसाधित करने का अधिकार केंद्रीय समितियों के बजाय आठ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के जिला कलेक्टरों को दे दिया गया है। इनमें पश्चिम बंगाल, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, गुजरात, राजस्थान, पंजाब, असम और त्रिपुरा शामिल हैं। यह कदम प्रक्रिया को विकेंद्रीकृत करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

श्रम कानून और राज्य स्तरीय कानूनी निर्णय

सुप्रीम कोर्ट की एक नौ-न्यायाधीशों की पीठ ने एक ऐतिहासिक निर्णय देते हुए 1978 के 'उद्योग' संबंधी पुराने मिसाल को समाप्त कर दिया है। यह निर्णय नए औद्योगिक संबंध कोड, 2020 के तहत लागू होगा। इससे पहले, 1978 के 'बैंगलोर वाटर सप्लाई' मामले में श्रमिकों को व्यापक सुरक्षा प्रदान की गई थी, लेकिन अब नई व्याख्या के तहत इसके प्रभाव सीमित हो सकते हैं।

झारखंड में, झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के उस फैसले पर रोक लगा दी है जिसमें 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षाओं के माध्यम से नियुक्त किए गए कर्मचारियों और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की नियुक्तियों को रद्द कर दिया गया था। अदालत ने सरकार से 15 सितंबर तक जवाब मांगा है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि सुप्रीम कोर्ट का यह कदम लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार और पुलिस की जवाबदेही के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। वहीं, CAA प्रक्रिया का विकेंद्रीकरण जमीनी स्तर पर नागरिकता वितरण को तेज कर सकता है, लेकिन यह जिला प्रशासन पर भारी जिम्मेदारी भी डालता है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि श्रम कानूनों में बदलाव और नागरिकता प्रक्रियाओं का सरलीकरण भारत के भविष्य के सामाजिक-आर्थिक ढांचे को गहराई से प्रभावित करेगा।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

1978 का 'बैंगलोर वाटर सप्लाई' मामला भारतीय श्रम कानून के इतिहास में एक मील का पत्थर था, जिसने 'उद्योग' की परिभाषा को इतना व्यापक बना दिया था कि लगभग हर संगठित गतिविधि इसमें शामिल हो गई थी। वर्तमान निर्णय इस परिभाषा को आधुनिक औद्योगिक ढांचे के अनुरूप ढालने का प्रयास है।

Did You Know?: CAA के तहत नागरिकता प्रक्रिया को अब जिला स्तर पर स्थानांतरित कर दिया गया है ताकि आवेदकों को केंद्र सरकार के कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।

Frequently Asked Questions

Q1: छात्र विरोध प्रदर्शनों की जांच कौन कर रहा है?
A1: सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एक उच्च-स्तरीय समिति, जिसका नेतृत्व जस्टिस (सेवानिवृत्त) आर. सुभाष रेड्डी कर रहे हैं।

Q2: किन राज्यों के कलेक्टरों को CAA के लिए अधिकृत किया गया है?
A2: गुजरात, राजस्थान, पंजाब, पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख।