केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया है कि पूर्व पुलिस अधिकारी विवेक सिंह चौहान को प्रतिष्ठित राष्ट्रपति वीरता पदक प्रदान करने की मंजूरी दे दी गई है। यह निर्णय 2003 के एक साहसी ऑपरेशन के बाद लंबे कानूनी संघर्ष के बाद आया है।

  • केंद्र सरकार ने पूर्व पुलिस अधिकारी विवेक सिंह चौहान के लिए राष्ट्रपति वीरता पदक को मंजूरी दे दी है।
  • यह निर्णय 2003 में दो डकैतों के खिलाफ किए गए साहसी ऑपरेशन के लिए दिया जा रहा है।
  • सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र द्वारा मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेशों के पालन में की गई देरी पर नाराजगी जताई थी।

नई दिल्ली: भारत सरकार ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि पूर्व पुलिस अधिकारी विवेक सिंह चौहान को प्रतिष्ठित राष्ट्रपति वीरता पदक (President's Medal for Gallantry) प्रदान करने के लिए औपचारिक मंजूरी दे दी गई है। यह महत्वपूर्ण विकास तब हुआ जब सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र द्वारा मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन न करने पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की थी।

कानूनी संघर्ष और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

यह मामला 2003 का है, जब तत्कालीन थाना प्रभारी (SHO) विवेक सिंह चौहान ने ग्वालियर जिले के घाटगाँव पुलिस स्टेशन से एक साहसी ऑपरेशन का नेतृत्व किया था। खुफिया जानकारी मिलने के बाद, चौहान ने डकैतों के खिलाफ कार्रवाई की, जिसमें दो डकैत मारे गए और चौहान स्वयं भी घायल हुए थे। एक मजिस्ट्रेट जांच में उन्हें क्लीन चिट मिलने के बाद, उनके लिए पदोन्नति और वीरता पदक की सिफारिश की गई थी।

हालांकि, इस सम्मान को पाने के लिए उन्हें दशकों तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। 2018 में, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को केंद्र को उनका नाम भेजने का निर्देश दिया था। मध्य प्रदेश सरकार ने 2019 में सिफारिश की, लेकिन गृह मंत्रालय ने इसे खारिज कर दिया, जिससे मामला उच्च न्यायालय से होते हुए सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँच गया।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी और समाधान

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि यह मामला सरकारी तंत्र में निर्णय लेने की प्रक्रिया और न्यायिक आदेशों के अनुपालन की जटिलताओं को उजागर करता है। जुलाई में, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की ओर से मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में हो रही देरी पर असंतोष व्यक्त किया था।

न्यायिक आदेशों का समय पर पालन न करना शासन की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ को बताया कि गृह मंत्रालय ने 20 अगस्त, 2026 को एक संचार जारी किया है, जिसमें राष्ट्रपति ने पदक को मंजूरी दे दी है। यह पुरस्कार जल्द ही भारत के राजपत्र (Gazette of India) में अधिसूचित किया जाएगा।

पुरस्कारों के बीच अंतर का महत्व

इस कानूनी विवाद का एक मुख्य कारण पुरस्कारों की श्रेणी थी। उच्च न्यायालय ने पूर्व में कहा था कि 'वीरता पदक' (Gallantry Medal) और 'राष्ट्रपति वीरता पदक' (President's Medal for Gallantry) के बीच स्पष्ट अंतर है। उच्च न्यायालय के अनुसार, राष्ट्रपति वीरता पदक एक उच्च सम्मान है, जबकि वीरता पदक कई कर्मियों को एक साथ दिया जाता है।

क्या आप जानते हैं?: राष्ट्रपति वीरता पदक भारत के सर्वोच्च नागरिक वीरता पुरस्कारों में से एक है, जो असाधारण साहस के लिए दिया जाता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: विवेक सिंह चौहान को यह पदक क्यों दिया जा रहा है?
उत्तर: उन्हें 2003 में ग्वालियर में एक मुठभेड़ के दौरान असाधारण वीरता दिखाने के लिए यह पदक दिया जा रहा है।

प्रश्न 2: मामला सुप्रीम कोर्ट तक क्यों पहुँचा?
उत्तर: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद केंद्र द्वारा पदक देने में देरी करने के कारण यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँचा।