कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड ने स्वदेशी रूप से निर्मित एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शालो वॉटरक्राफ्ट (ASW SWC) 'INS मंगरोल' को भारतीय नौसेना को सौंप दिया है। यह गुजरात के तटीय शहर मंगरोल के नाम पर रखा गया है।

  • INS मंगरोल आठ ASW SWC श्रेणी के जहाजों में से तीसरा है।
  • इसे कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) द्वारा पूरी तरह स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित किया गया है।
  • जहाज में आधुनिक हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी ASW रॉकेट और उन्नत सोनार सिस्टम लगे हैं।

कोच्चि: भारत की समुद्री सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ करते हुए, कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) ने शुक्रवार को उन्नत एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शालो वॉटरक्राफ्ट (ASW SWC) INS मंगरोल को आधिकारिक रूप से भारतीय नौसेना को सौंप दिया। यह इस विशेष श्रेणी के आठ जहाजों के निर्माण कार्यक्रम के तहत तीसरा जहाज है।

इस महत्वपूर्ण हस्तांतरण समारोह के दौरान, CSL के संचालन निदेशक हरिकृष्णन एस. और INS मंगरोल के नामित कमांडिंग ऑफिसर कमांडर यू. शरण कुमार ने आधिकारिक डिलीवरी प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए। यह उपलब्धि भारत के 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत रक्षा क्षेत्र में बढ़ती स्वदेशी क्षमता का एक प्रमाण है।

तकनीकी क्षमता और विशेषताएँ

INS मंगरोल को विशेष रूप से उथले पानी में पनडुब्बी रोधी युद्ध (Anti-Submarine Warfare) के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसमें अत्याधुनिक युद्ध प्रणालियाँ शामिल हैं, जिनमें हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी ASW रॉकेट और उन्नत शालो-वाटर सोनार सिस्टम शामिल हैं। ये उपकरण इसे दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने में अत्यधिक सक्षम बनाते हैं।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि ASW SWC श्रेणी के जहाजों की तैनाती हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति को मजबूत करेगी। ये जहाज विशेष रूप से तटीय क्षेत्रों और उथले पानी में पनडुब्बी खतरों से निपटने के लिए बनाए गए हैं, जो भारत की समुद्री सीमाओं की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं।

स्वदेशी रक्षा निर्माण में यह मील का पत्थर भारत को वैश्विक समुद्री शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत लंबे समय से अपनी नौसैनिक शक्ति को बढ़ाने के लिए स्वदेशी निर्माण पर जोर दे रहा है। कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड इस दिशा में अग्रणी भूमिका निभा रहा है, जो न केवल युद्धपोतों का निर्माण कर रहा है बल्कि जटिल रक्षा प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण में भी महत्वपूर्ण है।

Did You Know?: INS मंगरोल का नाम गुजरात के एक प्रसिद्ध तटीय शहर मंगरोल के सम्मान में रखा गया है।

Frequently Asked Questions

1. INS मंगरोल किस प्रकार का जहाज है?
यह एक एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शालो वॉटरक्राफ्ट (ASW SWC) है, जिसे उथले पानी में पनडुब्बियों का मुकाबला करने के लिए बनाया गया है।

2. इसे किसने बनाया है?
इसे पूरी तरह से कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित किया गया है।