मदुरै जिले के किसानों ने कलेक्टर के समक्ष जल निकायों पर अवैध अतिक्रमण और सीवेज के बहाव को रोकने की गंभीर मांग उठाई है। उन्होंने स्थानीय बीज किस्मों के संरक्षण और सूखते जल स्रोतों के पुनरुद्धार की भी अपील की है।

  • किसानों ने जल निकायों और उनके इनलेट स्ट्रीम्स पर अवैध अतिक्रमण को हटाने की मांग की है।
  • सीवेज के पानी को जलाशयों में मिलने से रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की अपील की गई।
  • देशी बीजों की कमी और सूखते 'गुंडारू' जल स्रोत को लेकर चिंता व्यक्त की गई।

मदुरै जिले के किसानों ने प्रशासन से जल निकायों को बचाने के लिए तत्काल कार्रवाई करने का आग्रह किया है। शुक्रवार को मदुरै कलेक्ट्रेट में आयोजित किसान शिकायत निवारण बैठक में, कलेक्टर निशांत कृष्णा की अध्यक्षता में किसानों ने अपनी समस्याओं को प्रमुखता से रखा। किसानों का कहना है कि न केवल मुख्य जलाशय, बल्कि उन तक पानी लाने वाली छोटी धाराएं (inlet streams) भी अतिक्रमण की शिकार हो गई हैं।

विशेष रूप से, किसानों ने बताया कि नागामलाई से कल्याणपत्ति तक बहने वाली तीन महत्वपूर्ण इनलेट धाराएं अवैध कब्जे के कारण अवरुद्ध हो गई हैं। इससे जलाशयों में पानी की आवक कम हो गई है, जो कृषि के लिए एक बड़ा खतरा है। किसानों ने सुझाव दिया कि इन समस्याओं का समाधान ब्लॉक स्तर पर किया जा सकता है ताकि स्थानीय स्तर पर त्वरित कार्रवाई संभव हो सके।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि जल निकायों का क्षरण सीधे तौर पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा को प्रभावित करता है। यदि इनलेट स्ट्रीम्स और जलाशयों को अतिक्रमण से मुक्त नहीं किया गया, तो मदुरै के कृषि क्षेत्र में जल संकट गहरा सकता है, जिससे किसानों की आजीविका पर गंभीर संकट मंडराएगा।

जल निकायों का संरक्षण केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण समुदायों के अस्तित्व की लड़ाई है।

एक अन्य गंभीर मुद्दा सीवेज का प्रबंधन है। किसानों ने शिकायत की कि मदकुलम टैंक से जुड़ने वाली नहर में सीवेज बहाने को रोकने के लिए बनाई गई रिटेनिंग वॉल अचमपतु में टूट गई है। इससे जलाशयों में प्रदूषण का खतरा बढ़ गया है। इसके अलावा, कल्लनाई क्षेत्र के किसानों ने बताया कि हालांकि अवैध पत्थर उत्खनन पर कार्रवाई हुई है, लेकिन मुख्य जल स्रोत गुंडारू अब सूख चुका है, जिससे क्षेत्र में जल संकट पैदा हो गया है।

कृषि के लिए बीजों की उपलब्धता पर भी चर्चा हुई। किसानों ने शिकायत की कि बाजार में केवल हाइब्रिड बीज उपलब्ध हैं, जबकि त्योहारों के लिए आवश्यक देशी किस्म के फील्ड बीन्स मिलना मुश्किल हो गया है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि देशी बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

Did You Know?: पारंपरिक देशी बीज अक्सर हाइब्रिड बीजों की तुलना में जलवायु परिवर्तन और स्थानीय कीटों के प्रति अधिक लचीले होते हैं।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: किसान मुख्य रूप से किन समस्याओं के लिए विरोध कर रहे हैं?
उत्तर: किसान जल निकायों पर अतिक्रमण, सीवेज का प्रदूषण और देशी बीजों की कमी के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।

प्रश्न 2: प्रशासन ने किसानों को क्या आश्वासन दिया है?
उत्तर: प्रशासन ने शिकायतों की जांच करने और देशी बीज किस्मों को फिर से उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है।