सुप्रीम कोर्ट ने मनरेगा (MGNREGA) को एक प्रभावी और सराहनीय योजना बताते हुए कहा कि यह न तो मुफ्त की रेवड़ी है और न ही श्रमिकों का शोषण। अदालत ने नई 'वीबी-ग्राम जी' योजना के तहत रोजगार में आई गिरावट पर भी चिंता जताई है।

  • सुप्रीम कोर्ट ने मनरेगा को एक 'सराहनीय योजना' करार दिया।
  • अदालत ने स्पष्ट किया कि यह योजना न तो मुफ्त उपहार (freebie) है और न ही शोषण।
  • नई वीबी-ग्राम जी योजना के तहत रोजगार सृजन में 50% की गिरावट देखी गई है।
  • अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने काम के अधिकार को अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार बनाने की मांग की।

नई दिल्ली: भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक टिप्पणी करते हुए पूर्ववर्ती महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) की सराहना की। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि मनरेगा एक 'सराहनीय योजना' थी, जो ग्रामीण क्षेत्रों में प्रभावी ढंग से लागू की गई थी। अदालत ने इस विवाद को भी खारिज कर दिया कि यह योजना 'मुफ्त की रेवड़ी' है या श्रमिकों का शोषण करती है।

कानूनी बहस और मौलिक अधिकार

यह मामला सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रॉय द्वारा दायर एक याचिका से जुड़ा है, जिसमें मनरेगा के तहत बकाया मजदूरी और मुआवजे के भुगतान की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने तर्क दिया कि सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि यदि किसी को न्यूनतम मजदूरी से कम पर काम करना पड़ता है, तो वह 'बलात श्रम' (forced labour) के समान है।

हालांकि, पीठ ने इस पर विचार करते हुए सवाल उठाया कि क्या काम के अधिकार को अनुच्छेद 21 के तहत एक मौलिक अधिकार माना जा सकता है, या यह केवल नीति निर्देशक सिद्धांतों (DPSP) के तहत एक लोकतांत्रिक आकांक्षा है।

क्यों यह मामला महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि मनरेगा का प्रतिस्थापन, 'विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)' या VB-GRAM G Act, एक बड़े संरचनात्मक बदलाव का संकेत देता है। जहां मनरेगा मांग-आधारित और अधिकार-आधारित ढांचा था, वहीं नया मॉडल केंद्र-नियंत्रित है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि राज्यों पर वित्तीय बोझ 90:10 के अनुपात से बढ़कर 60:40 हो गया है, जिससे राज्यों की क्षमता प्रभावित हो रही है।

मनरेगा केवल एक योजना नहीं थी, बल्कि ग्रामीण भारत के लिए एक सुरक्षा कवच थी जिसने मांग-आधारित रोजगार सुनिश्चित किया था।

नई योजना बनाम मनरेगा: एक तुलना

विशेषताMGNREGAVB-GRAM G Act
मॉडल का प्रकारमांग-आधारित (Rights-based)केंद्र-नियंत्रित (Centrally controlled)
गारंटीकृत कार्य दिवस100 दिन125 दिन
केंद्र-राज्य फंडिंग अनुपात90:1060:40
रोजगार सृजन दरउच्च और प्रभावी50% की गिरावट की रिपोर्ट

LibTech की रिपोर्ट के अनुसार, योजना के संक्रमण के पहले पखवाड़े में ही श्रमिक रोल में 67.6 लाख की कमी आई है। अदालत ने वर्तमान याचिका को निपटाते हुए नए आंकड़ों और नई कानून के संदर्भ में नई याचिका दायर करने का निर्देश दिया है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. सुप्रीम कोर्ट ने मनरेगा के बारे में क्या कहा?
कोर्ट ने कहा कि मनरेगा एक प्रभावी और सराहनीय योजना थी जो न तो मुफ्त उपहार थी और न ही शोषण का जरिया।

2. नई VB-GRAM G योजना में क्या बदलाव आया है?
नई योजना में कार्य दिवस 125 कर दिए गए हैं, लेकिन राज्यों का वित्तीय बोझ बढ़ गया है और रोजगार सृजन में कमी आई है।

क्या आप जानते हैं?: मनरेगा को ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी कम करने और पलायन रोकने के लिए एक 'सुरक्षा जाल' के रूप में डिजाइन किया गया था।