दिल्ली के पालिका बाजार की तर्ज पर बना बेंगलुरु का विजयनगर अंडरग्राउंड बाजार दो साल बाद भी खाली पड़ा है। ₹13 करोड़ की लागत से बने इस बाजार में वेंडर्स की कमी और भारी किराए ने प्रशासन की योजना को अधर में लटका दिया है।
- ₹13 करोड़ की लागत से बना विजयनगर का अंडरग्राउंड बाजार खाली पड़ा है।
- 79 दुकानों में से केवल 4-5 में ही व्यापार हो रहा है।
- वेंडर्स का तर्क है कि किराया बहुत अधिक है और बारिश में पानी भरता है।
- सड़क किनारे के 120 से अधिक वेंडर्स का समूह अंदर जाने के लिए विभाजित है।
बेंगलुरु के पश्चिम क्षेत्र के विजयनगर में बना शहर का पहला अंडरग्राउंड एयर-कंडीशन बाजार, 'कृष्ण देवराय पालिका बाजार', वर्तमान में एक बड़ी विफलता के रूप में उभर रहा है। दिल्ली के प्रसिद्ध पालिका बाजार की तर्ज पर विकसित इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पूरा हुए दो साल बीत चुके हैं, लेकिन यहाँ अभी भी ग्राहकों और दुकानदारों की रौनक गायब है।
इस परियोजना पर लगभग ₹13 करोड़ खर्च किए गए थे। इसमें कुल 79 दुकानें बनाई गई हैं, जिनमें से कई आधुनिक एयर-कंडीशनिंग सुविधाओं से लैस हैं। अगस्त 2024 में इसका उद्घाटन किया गया था, लेकिन आज यह गलियारा सुनसान और उपेक्षित नजर आता है। वर्तमान में, केवल चार या पांच दुकानें ही सक्रिय रूप से संचालित हो रही हैं, जबकि बाकी हिस्से में रखरखाव की भारी कमी और जलभराव जैसी समस्याएं देखी जा रही हैं।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि यह मामला केवल एक बाजार का नहीं, बल्कि शहरी नियोजन (Urban Planning) की विफलता का प्रतीक है। जब बुनियादी ढांचे पर भारी निवेश किया जाता है, तो स्थानीय अर्थव्यवस्था और वेंडर्स की व्यवहार्यता (viability) को नजरअंदाज करना सार्वजनिक धन की बर्बादी की ओर ले जाता है।
उच्च किराया और मौजूदा सड़क किनारे के व्यापारिक ढांचे के साथ प्रतिस्पर्धा करने में असमर्थता ही इस अंडरग्राउंड बाजार की विफलता का मुख्य कारण है।
बेंगलुरु वेस्ट सिटी कॉर्पोरेशन (BWCC) ने दुकानों की नीलामी के लिए दो बार निविदाएं (tenders) जारी कीं, लेकिन किसी भी स्ट्रीट वेंडर ने इसमें रुचि नहीं दिखाई। वेंडर्स का कहना है कि किराया बहुत अधिक है और उन्हें डर है कि अंडरग्राउंड जाने से उनका व्यवसाय पूरी तरह ठप हो जाएगा।
विवाद का एक बड़ा कारण वेंडर्स के बीच का विभाजन है। विजयनगर पादाचारी हन्नू मथ्तु तरकारी व्यापरिगला क्षेमभिवृद्धि संघ के सदस्य नंजुंडा बी.आर. का कहना है कि वे अंदर जाने को तैयार हैं, लेकिन जब तक सड़क किनारे के अन्य वेंडर्स को नहीं हटाया जाता, तब तक ग्राहक नीचे नहीं आएंगे। दूसरी ओर, कर्नाटक प्रगतिपर बीदीबडी व्यापरिगला संघताने (KPBVS) के अध्यक्ष एस. बाबू का तर्क है कि किराया बहुत अधिक है और बारिश के दौरान दुकानों में पानी रिसता है।
ऐतिहासिक रूप से, यह प्रयास पहली बार नहीं है। पहले भी कुछ वेंडर्स ने दुकानों पर कब्जा करने की कोशिश की थी, लेकिन ग्राहकों की कमी के कारण 95% लोग एक महीने के भीतर ही बाहर निकल गए। वर्तमान में, सड़क किनारे के 120 से अधिक वेंडर्स के पास अदालत का स्टे ऑर्डर भी है, जिससे उन्हें हटाना प्रशासन के लिए एक कानूनी चुनौती बन गया है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: विजयनगर अंडरग्राउंड बाजार पर कितनी लागत आई है?
उत्तर: इस बाजार के निर्माण पर लगभग ₹13 करोड़ की लागत आई है।
प्रश्न 2: वेंडर्स बाजार के अंदर जाने से क्यों कतरा रहे हैं?
उत्तर: मुख्य कारणों में अत्यधिक किराया, बारिश में जलभराव और सड़क किनारे के मौजूदा ग्राहकों के खोने का डर शामिल है।