असम नागरिक मंच ने राज्य में हर साल आने वाली विनाशकारी बाढ़ के लिए केवल अस्थायी राहत के बजाय एक व्यापक वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने की मांग की है। साथ ही, CPI(M) ने बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की अपील की है।
- असम नागरिक मंच ने नदी और पारिस्थितिकी तंत्र के आधार पर वैज्ञानिक समाधान की मांग की है।
- CPI(M) ने बाढ़ को 'राष्ट्रीय आपदा' घोषित करने और मृतकों के परिवारों को ₹20 लाख मुआवजे की मांग की है।
- काजीरंगा नेशनल पार्क के इको-सेंसिटिव जोन को कम करने पर चेतावनी जारी की गई है।
- पर्यावरणविदों और विशेषज्ञों के साथ एक बड़े सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा।
गुवाहाटी: असम में हर साल आने वाली विनाशकारी बाढ़ ने एक बार फिर राज्य के अस्तित्व और सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। असम नागरिक मंच, जिसका नेतृत्व प्रसिद्ध शिक्षाविद हिरेन गोहेन और पूर्व डीजीपी हरेकृष्ण डेका कर रहे हैं, ने मांग की है कि सरकार केवल तटबंधों की मरम्मत और अस्थायी राहत कार्यों तक सीमित न रहे। इसके बजाय, राज्य को पूरे नदी तंत्र और पारिस्थितिक तंत्र का विश्लेषण करते हुए एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
बाढ़ का गहराता संकट और राजनीतिक मांग
शुक्रवार को, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) ने 'डिमांड डे' (मांग दिवस) आयोजित किया। पार्टी ने केंद्र सरकार से असम की बाढ़ को 'राष्ट्रीय आपदा' का दर्जा देने की मांग की है। CPI(M) ने न केवल नीतिगत बदलाव की मांग की है, बल्कि आर्थिक सहायता का भी प्रस्ताव रखा है, जिसमें बाढ़ में मारे गए लोगों के परिवारों के लिए ₹20 लाख, प्रभावित परिवारों के लिए ₹1 लाख और नष्ट हुए घरों के लिए ₹10 लाख तक की सहायता शामिल है।
पारिस्थितिक तंत्र और भौगोलिक चुनौतियां
फोरम ने स्पष्ट किया कि असम की भौगोलिक स्थिति इसे बेहद संवेदनशील बनाती है। आस-पास के पहाड़ी राज्यों से निकलने वाली नदियों के ऊपरी क्षेत्रों में हो रहे निर्माण, खनन और अन्य बड़े पैमाने की गतिविधियां असम में पानी के बहाव की गति और मात्रा को प्रभावित कर रही हैं। हाल ही में शिवसागर, चराइदेव और जोरहाट जिलों में देखी गई तबाही इसी का परिणाम है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि असम में बाढ़ अब केवल एक मौसमी घटना नहीं रह गई है, बल्कि यह गलत विकास मॉडल और पारिस्थितिक असंतुलन का परिणाम है। यदि ऊपरी क्षेत्रों में खनन और वनों की कटाई जारी रहती है, तो निचले इलाकों में जल स्तर का अनियंत्रित होना अपरिहार्य है।
बाढ़ का समाधान केवल तटबंध बनाना नहीं, बल्कि नदी के प्राकृतिक प्रवाह और पारिस्थितिकी की रक्षा करना है।
फोरम ने काजीरंगा नेशनल पार्क के आसपास के इको-सेंसिटिव जोन (ESZ) को 10 किमी से घटाकर केवल 1 किमी करने के प्रस्ताव पर भी कड़ी चेतावनी दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि काजीरंगा का संरक्षण असम की समग्र पारिस्थितिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
भविष्य की रणनीति: एक व्यापक सम्मेलन
असम नागरिक मंच ने एक बड़े सम्मेलन की घोषणा की है जिसमें पर्यावरणविद्, हाइड्रोलॉजिस्ट, भूविज्ञानी, इंजीनियर और सामाजिक वैज्ञानिक शामिल होंगे। इस सम्मेलन का उद्देश्य जलवायु परिवर्तन, बांधों के निर्माण, वनों की कटाई और नदियों के बदलते स्वरूप का गहन अध्ययन करना है ताकि एक स्थायी समाधान खोजा जा सके।
Frequently Asked Questions
1. असम नागरिक मंच क्या समाधान मांग रहा है?
मंच केवल अस्थायी राहत के बजाय नदी प्रणाली और पारिस्थितिकी तंत्र पर आधारित एक वैज्ञानिक और दीर्घकालिक समाधान की मांग कर रहा है।
2. CPI(M) की मुख्य मांगें क्या हैं?
CPI(M) बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने और प्रभावितों को भारी वित्तीय मुआवजा देने की मांग कर रही है।