कोनासीमा जिले के वडलेरू से लापता सात मछुआरों को खोजने के लिए मछली पकड़ने वाले नाव मालिकों के संघ ने भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल से खोज अभियान बढ़ाने की मांग की है। संघ ने सरकार पर सुरक्षा प्रोटोकॉल में लापरवाही का आरोप लगाया है।

  • वडलेरू के सात मछुआरे 3 अगस्त से लापता हैं।
  • नाव मालिकों के संघ ने मानक खोज प्रोटोकॉल को अपर्याप्त बताया है।
  • नौसेना और तटरक्षक बल से व्यापक क्षेत्र में खोज जारी रखने की मांग की गई है।
  • मत्स्य पालन क्षेत्र में ट्रैकिंग डिवाइस और लाइसेंसिंग की गंभीर कमी उजागर हुई है।

आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में समुद्री दुर्घटनाओं की बढ़ती घटनाओं ने चिंता पैदा कर दी है। ईस्ट कोस्ट मेकेनाइज्ड फिशिंग बोट ओनर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष वासुपल्ली जनकराम ने शनिवार को विशाखापत्तनम में पत्रकारों से बात करते हुए राज्य सरकार पर बचाव कार्यों के प्रबंधन में लापरवाही का गंभीर आरोप लगाया।

मामला कोनासीमा जिले के अल्लवरम मंडल के वडलेरू से संबंधित है, जहाँ 3 अगस्त को एक फाइबर बोट से सात मछुआरे लापता हो गए थे। जनकराम ने तर्क दिया कि चूंकि यह एक फाइबर बोट है, इसलिए समुद्री धाराओं और हवाओं के कारण यह शुरुआती स्थान से बहुत दूर जा सकती है। उन्होंने मांग की कि भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक बल को तब तक खोज अभियान जारी रखना चाहिए जब तक कि मछुआरे मिल नहीं जाते।

क्यों यह मामला महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि समुद्री सुरक्षा केवल बचाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह तकनीकी बुनियादी ढांचे से भी जुड़ी है। वर्तमान में, कई मछुआरों के पास ट्रैकिंग डिवाइस नहीं हैं, जो आपातकालीन स्थिति में उनकी लोकेशन का पता लगाने के लिए अनिवार्य हैं।

मानक अल्पकालिक बचाव प्रोटोकॉल इन परिस्थितियों में पूरी तरह अपर्याप्त हैं; हमें एक व्यापक और निरंतर खोज रणनीति की आवश्यकता है।

संघ ने केवल खोज अभियान ही नहीं, बल्कि प्रणालीगत खामियों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने बताया कि केंद्रीय दिशा-निर्देशों के बावजूद, कई नावें ट्रैकिंग उपकरणों से लैस नहीं हैं। इसके अलावा, राज्य भर में सैकड़ों नावों के लाइसेंस लंबित हैं, जिससे मछुआरे असुरक्षित परिस्थितियों में काम करने को मजबूर हैं।

ऐतिहासिक संदर्भ और सुरक्षा अंतराल

पिछले महीने भी विशाखापत्तनम के पास एक दर्दनाक घटना हुई थी, जहाँ सात मछुआरे लापता हो गए थे और खोज अभियान को केवल तीन दिनों के बाद अचानक रोक दिया गया था। यह पैटर्न दर्शाता है कि वर्तमान समुद्री सुरक्षा नीतियां तटीय समुदायों की रक्षा करने में विफल रही हैं।

इसके अतिरिक्त, बीमा कवरेज की स्थिति भी चिंताजनक है। राज्य के लगभग 8 लाख मछुआरों और संबद्ध श्रमिकों के लिए व्यापक बीमा के प्रावधान के बावजूद, वर्तमान में केवल 2 लाख लोगों के पास ही कवरेज है। संघ ने सरकार से एक विशेष अभियान चलाने और सभी पात्र श्रमिकों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने का आग्रह किया है।

क्या आप जानते हैं?: समुद्री धाराओं की गति और दिशा के कारण, एक छोटी फाइबर बोट कुछ ही घंटों में कई किलोमीटर दूर जा सकती है, जिससे खोज अभियान अत्यधिक कठिन हो जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: मछुआरे कब से लापता हैं?
उत्तर: वडलेरू के सात मछुआरे 3 अगस्त 2026 से लापता हैं।

प्रश्न 2: संघ की मुख्य मांग क्या है?
उत्तर: संघ ने भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल से खोज अभियान के दायरे और अवधि को बढ़ाने की मांग की है।