तिरुपति में श्री वेंकटेस्वरा विश्वविद्यालय के छात्रों ने नशीले पदार्थों के खिलाफ एक विशाल जागरूकता रैली का आयोजन किया। इस रैली में प्रमुख प्रशासनिक अधिकारियों और शिक्षाविदों ने शामिल होकर युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश दिया।

  • तिरुपति के एनटीआर सर्कल तक छात्रों ने नशामुक्ति रैली निकाली।
  • TUDA अध्यक्ष, SVU कुलपति और TTD बोर्ड सदस्य रैली में शामिल हुए।
  • उद्देश्य आंध्र प्रदेश को पूरी तरह से नशा मुक्त बनाना है।
  • शैक्षणिक संस्थानों में निरंतर जागरूकता कार्यक्रमों पर जोर दिया गया।

तिरुपति: शनिवार को तिरुपति के शैक्षणिक गलियारों में एक शक्तिशाली संदेश गूँजा। श्री वेंकटेस्वरा विश्वविद्यालय (SVU) के छात्रों ने नशीले पदार्थों के बढ़ते खतरे के खिलाफ एकजुट होकर एक विशाल जागरूकता रैली का आयोजन किया। यह रैली SVU परिसर से शुरू होकर शहर के प्रमुख एनटीआर सर्कल तक पहुँची, जहाँ छात्रों ने नारों के माध्यम से समाज को नशे की विभीषिका के प्रति सचेत किया।

इस महत्वपूर्ण अभियान में केवल छात्र ही नहीं, बल्कि क्षेत्र के प्रभावशाली व्यक्तित्व भी शामिल हुए। तिरुपति शहरी विकास प्राधिकरण (TUDA) के अध्यक्ष सी. (डॉलर) दिवाकर रेड्डी, SVU के कुलपति प्रोफेसर टाटा नारायण राव और तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के बोर्ड सदस्य जी. भानु प्रकाश रेड्डी ने छात्रों के साथ कदम से कदम मिलाकर मार्च किया।

नशा मुक्त आंध्र प्रदेश का संकल्प

मीडिया से बात करते हुए, श्री दिवाकर रेड्डी ने स्पष्ट किया कि इस रैली का प्राथमिक लक्ष्य आंध्र प्रदेश को एक 'नशा मुक्त राज्य' और तिरुपति को एक 'नशा मुक्त शहर' बनाना है। उन्होंने कहा, "युवाओं को नशीले पदार्थों के जाल में नहीं फंसना चाहिए, क्योंकि यह न केवल व्यक्ति के जीवन को बल्कि उसके परिवार और पूरे समाज को नष्ट कर देता है।" उन्होंने युवाओं को सरकार द्वारा प्रदान किए जा रहे कौशल विकास और व्यावसायिक अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया।

युवाओं को नशे के बजाय देश के विकास में भागीदार बनना चाहिए।

SVU के कुलपति प्रोफेसर टाटा नारायण राव ने एक गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि मनोरंजन के लिए शुरू की गई एक छोटी सी आदत भी भविष्य में एक घातक समस्या बन सकती है। उन्होंने जोर दिया कि शैक्षणिक संस्थानों में निरंतर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि श्री वेंकटेस्वरा विश्वविद्यालय छात्रों को परामर्श (counseling) और आवश्यक सहायता प्रदान करने के लिए हर संभव कदम उठाएगा।

समाज और आध्यात्मिकता पर प्रभाव

TTD बोर्ड सदस्य जी. भानु प्रकाश रेड्डी ने तिरुपति की आध्यात्मिक पहचान का हवाला देते हुए अपील की कि इस पवित्र शहर को नशा मुक्त रखा जाए। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे अपनी ऊर्जा को खेल, शिक्षा और कौशल विकास जैसे सकारात्मक कार्यों में लगाएं।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि शैक्षणिक संस्थानों द्वारा इस तरह के जमीनी अभियान न केवल सामाजिक जागरूकता फैलाते हैं, बल्कि यह भी सुनिश्चित करते हैं कि नीतिगत निर्णय सीधे युवाओं तक पहुँचें। नशीली दवाओं का संकट एक वैश्विक समस्या है, और तिरुपति जैसी धार्मिक और शैक्षिक केंद्रों में इस तरह की पहल एक मॉडल के रूप में कार्य कर सकती है।

Did You Know?: भारत के कई राज्यों में नशीले पदार्थों के विरुद्ध सख्त कानून लागू हैं, लेकिन सामुदायिक जागरूकता ही सबसे प्रभावी ढाल मानी जाती है।

Frequently Asked Questions

1. इस रैली का मुख्य उद्देश्य क्या था?
इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं को नशीले पदार्थों के खतरों के प्रति सचेत करना और तिरुपति को नशा मुक्त बनाना है।

2. क्या विश्वविद्यालय छात्रों की मदद के लिए कोई कदम उठा रहा है?
हाँ, SVU ने छात्रों को परामर्श और सहायता प्रदान करने के लिए विशेष उपाय करने का वादा किया है।