गाजियाबाद स्थित क्राइस्ट यूनिवर्सिटी में प्रमोशन नीति के खिलाफ ABVP और छात्रों का विरोध प्रदर्शन दूसरे दिन भी जारी रहा। कानून के छात्रों द्वारा बैकलॉग के कारण चौथे वर्ष में प्रमोट न किए जाने के बाद तनाव बढ़ गया है।
- क्राइस्ट यूनिवर्सिटी के गाजियाबाद कैंपस में प्रमोशन नीति को लेकर ABVP का प्रदर्शन दूसरे दिन भी जारी रहा।
- 13 लॉ छात्रों को बैकलॉग के कारण चौथे वर्ष में प्रमोट करने से रोका गया है।
- विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि कानून विभाग की नीति बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों के अधीन है।
- छात्रों ने प्रशासन पर लापरवाही और छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ का आरोप लगाया है।
गाजियाबाद के मरियम नगर कैंपस में स्थित क्राइस्ट यूनिवर्सिटी में शनिवार को तनाव का माहौल बना रहा। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के सदस्यों और छात्रों ने विश्वविद्यालय की विवादित प्रमोशन नीति के खिलाफ दूसरे दिन भी जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने परिसर के बाहर नारेबाजी की और पुतलों का दहन भी किया।
क्या है पूरा विवाद?
विवाद की जड़ यूनिवर्सिटी की वह नीति है जिसके तहत BA LLB प्रोग्राम के छात्रों को चौथे वर्ष में प्रमोट करने से रोका गया है। लगभग 13 छात्रों के पास प्रथम या द्वितीय वर्ष के कुछ विषय (बैकलॉग) बकाया हैं, जिसके कारण उन्हें आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी गई है। हालांकि विश्वविद्यालय ने अन्य पाठ्यक्रमों के लिए नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत नियमों में ढील दी है, लेकिन कानून विभाग के छात्रों को इस राहत से बाहर रखा गया है।
प्रशासन का पक्ष और कानूनी पेच
विश्वविद्यालय प्रशासन का तर्क है कि कानून की पढ़ाई बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के नियमों के दायरे में आती है, इसलिए इसमें NEP के तहत बदलाव नहीं किए जा सकते। कैंपस के प्रशासन प्रभारी प्रोफेसर अखिलेश तिवारी ने बताया कि यह समस्या केवल गाजियाबाद तक सीमित नहीं है, बल्कि बैंगलोर जैसे अन्य परिसरों में भी छात्र इससे प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय एक समान नीति अपनाएगा और किसी एक कैंपस के लिए अलग निर्णय नहीं लिया जा सकता।
विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्र संगठनों के बीच का यह टकराव शिक्षा नीति और नियामक निकायों के बीच के जटिल तालमेल को दर्शाता है।
छात्रों के गंभीर आरोप
प्रदर्शनकारी छात्रों और ABVP के मीडिया समन्वयक तनिष्क सिसोदिया ने आरोप लगाया कि उपस्थिति (attendance) की कमी के कारण छात्र बैकलॉग का शिकार हो रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि भारी जुर्माना भरने वाले छात्रों को छूट दी जाती है, जबकि गरीब छात्र पिछड़ रहे हैं। वहीं, एक प्रभावित छात्रा अनिशिका जोशी ने आरोप लगाया कि जब उनके पिता ने प्रशासन से बात की, तो अधिकारियों ने बहुत ही असंवेदनशील टिप्पणी की।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल एक विश्वविद्यालय के नियमों का नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि कैसे नियामक संस्थाओं (जैसे BCI) के सख्त नियम छात्रों के शैक्षणिक करियर को प्रभावित कर सकते हैं। यदि इस समस्या का समाधान जल्द नहीं हुआ, तो यह छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और उनके भविष्य के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: छात्र क्यों विरोध कर रहे हैं?
उत्तर: छात्र बैकलॉग होने के कारण चौथे वर्ष में प्रमोट न किए जाने के खिलाफ विरोध कर रहे हैं।
प्रश्न 2: विश्वविद्यालय का क्या रुख है?
उत्तर: विश्वविद्यालय का कहना है कि कानून के छात्रों के लिए नियम BCI के अनुसार ही रहेंगे और वे सभी परिसरों के लिए एक समान नीति लागू करेंगे।