बॉलीवुड के दिग्गज मुकेश खन्ना ने फिर से मंच पर विवाद खड़ा किया, जब उन्होंने कहा कि ‘जन गण मन’ भारत का राष्ट्रीय गान नहीं बन सकता और ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रीय गीत बनाया जाना चाहिए। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर भारी चर्चा और टकराव का कारण बना।

  • मुकेश खन्ना ने जन गण मन को राष्ट्रीय गान से बाहर करने की मांग की।
  • वंदे मातरम को राष्ट्रीय गीत के रूप में प्राथमिकता देने का उनका तर्क।
  • बयान के बाद सोशल मीडिया पर तेज़ी से फलीभूत टकराव और ट्रोलिंग।

बॉलीवुड के आइकॉनिक अभिनेता मुकेश खन्ना, जिन्हें ‘शक्तिमान’ के रूप में जाना जाता है, ने फिर से राष्ट्रीय गान को लेकर विवाद में धातू बना दिया है। उन्होंने कहा कि जन गण मन को भारत का राष्ट्रगान नहीं बनाया जाना चाहिए और इसके स्थान पर वंदे मातरम को राष्ट्रीय गीत बनाना चाहिए।

खन्ना का यह बयान 23 अगस्त 2026 को दिल्ली में एक इंटरव्यू के दौरान दिया गया, जहाँ उन्होंने बताया कि जन गण मन “अंग्रेज़ों के शासक‑ईलीज़ाबेथ के गुणगान” के रूप में लिखा गया था और यह “अधिनायक” शब्दों से भरा है। उन्होंने कहा, “यह गीत अंग्रेज़ों के शासन के दौरान लिखा गया था, जब जॉर्ज पाँच भारत पर राज कर रहे थे।”

इन टिप्पणियों के बाद इंटरनेट पर तेज़ टकराव शुरू हो गया। कई netizens ने खन्ना को ट्रोल किया, जबकि कुछ ने उनके तर्क को समर्थन दिया। कई प्लेटफ़ॉर्म पर #MukeshKhanna #NationalAnthem जैसे टैग्स ट्रेंड करने लगे।

वंदे मातरम के पक्ष में खन्ना ने तर्क दिया कि यह गीत “हमारी मातृभूमि के प्रति सम्मान और समर्पण” को अभिव्यक्त करता है। उन्होंने बताया कि यह गीत बंगाल के बंकिम चंद्र चटर्जी ने 1870 के आसपास लिखा था और 1950 में इसे राष्ट्रीय गीत घोषित किया गया था।

वास्तव में, जन गण मन 1911 में रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा लिखा गया था और 1950 में इसे राष्ट्रीय गान के रूप में अपनाया गया। जबकि वंदे मातरम को 1950 में राष्ट्रीय गीत की उपाधि दी गई, लेकिन इसे अभी तक राष्ट्रीय गान का दर्जा नहीं मिला है। इस विभाजन पर खन्ना का बयान कानूनी और सांस्कृतिक दोनों पहलुओं से प्रश्न उठाता है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that इस तरह के सार्वजनिक व्यक्तियों के बयान राष्ट्रीय पहचान और सांस्कृतिक धरोहर पर गहरी बहस को जन्म दे सकते हैं, जिससे सरकारी नीति‑निर्धारण और सार्वजनिक राय दोनों पर असर पड़ता है।

"राष्ट्रगान का चयन केवल ऐतिहासिक कारणों पर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता और भावनात्मक जुड़ाव पर भी निर्भर करता है," कहते हैं इतिहासकार डॉ. अनीता सिंह।
Did You Know?: वंदे मातरम को 1896 में पहली बार बंगाल में गाया गया था, जबकि जन गण मन को 1911 में पहली बार सार्वजनिक रूप से गाया गया।

Frequently Asked Questions

क्या वंदे मातरम को राष्ट्रीय गान बनाया जा सकता है?
वर्तमान में भारतीय संविधान में जन गण मन को राष्ट्रीय गान और वंदे मातरम को राष्ट्रीय गीत के रूप में निर्धारित किया गया है; इसे बदलने के लिए संसद में संविधान संशोधन आवश्यक होगा।

मुकेश खन्ना के इस बयान का कानूनी प्रभाव क्या हो सकता है?
एक निजी नागरिक के रूप में उनके बयानों पर कोई कानूनी प्रतिबंध नहीं है, लेकिन यदि सार्वजनिक असंतोष बढ़ता है तो सरकार को इस मुद्दे पर पुनः विचार करना पड़ सकता है।