दिल्ली सरकार ने जेलों के भीतर से संचालित आपराधिक नेटवर्क को तोड़ने के लिए 'ट्रांसफर ऑफ प्रिजनर्स (पंजाब एमेंडमेंट) एक्ट, 2025' लागू करने का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत विचाराधीन हाई-रिस्क गैंगस्टरों को दूसरे राज्यों की जेलों में भेजा जा सकेगा।
- दिल्ली सरकार विचाराधीन हाई-रिस्क कैदियों के अंतरराज्यीय स्थानांतरण के लिए नया कानून लागू करेगी।
- इसका उद्देश्य जेलों के भीतर से संचालित गैंगवार, रंगदारी और आपराधिक साजिशों पर लगाम लगाना है।
- पंजाब एमेंडमेंट एक्ट, 2025 के मॉडल पर आधारित इस कदम से अपराधियों का स्थानीय नेटवर्क टूटेगा।
दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और संगठित अपराध पर प्रहार करने के लिए दिल्ली सरकार ने एक निर्णायक कदम उठाया है। राजधानी की जेलों में बंद ऐसे कुख्यात गैंगस्टरों और हाई-रिस्क कैदियों, जो अभी विचाराधीन (under-trial) हैं, उन्हें अब दूसरे राज्यों की जेलों में स्थानांतरित किया जा सकेगा। इसके लिए सरकार 'ट्रांसफर ऑफ प्रिजनर्स (पंजाब एमेंडमेंट) एक्ट, 2025' को लागू करने का प्रस्ताव लेकर आई है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार, यह पहल जेल सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और व्यापक जनहित को ध्यान में रखकर की जा रही है। वर्तमान में, दिल्ली की जेलों में कई ऐसे अपराधी बंद हैं जो जेल के भीतर से ही अपने गुर्गों को निर्देश देते हैं और आपराधिक साम्राज्य का संचालन करते हैं। इस नए कानून के माध्यम से उनके स्थानीय संपर्कों को पूरी तरह से काटने की योजना है।
क्यों पड़ी इस कानून की जरूरत?
मौजूदा कानूनी ढांचे, विशेषकर 'ट्रांसफर ऑफ प्रिजनर्स एक्ट, 1950' के तहत केवल उन कैदियों को दूसरे राज्य भेजने का प्रावधान था जो दोषी साबित हो चुके हों। विचाराधीन कैदियों के लिए ऐसा कोई प्रभावी तंत्र नहीं था, जिसका फायदा उठाकर कई गैंगस्टर जेल के अंदर रहकर भी सक्रिय रहे। मई 2026 के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में 26 चिन्हित गिरोहों के 188 सदस्यों की पहचान की गई थी, जो जेल के भीतर से नेटवर्क चलाने की क्षमता रखते थे।
"जब एक गैंगस्टर अपने गृह राज्य या प्रभाव वाले क्षेत्र की जेल में रहता है, तो उसके लिए बाहरी नेटवर्क से संपर्क साधना आसान होता है; अंतरराज्यीय स्थानांतरण इस मनोवैज्ञानिक और भौतिक शक्ति को नष्ट कर देता है।"
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि यह कदम केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि संगठित अपराध के खिलाफ एक रणनीतिक युद्ध है। जब अपराधी अपने परिचित भूगोल और नेटवर्क से दूर होगा, तो गवाहों को धमकाने और न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालने की उसकी क्षमता न्यूनतम हो जाएगी। यह कदम दिल्ली की जेलों को 'अपराध के कंट्रोल रूम' के रूप में इस्तेमाल होने से रोकेगा।
इस स्थानांतरण की प्रक्रिया मनमानी नहीं होगी। किसी भी कैदी को दूसरे राज्य भेजने का निर्णय संबंधित राज्यों की आपसी सहमति या गृह मंत्रालय की स्वीकृति के बाद लिया जाएगा। इसमें सुरक्षा संबंधी जरूरतों और जनहित को प्राथमिकता दी जाएगी, और पूरी प्रक्रिया भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के प्रावधानों के तहत संचालित होगी।
| विशेषता | पुराना कानून (1950 एक्ट) | प्रस्तावित व्यवस्था (2025 एमेंडमेंट) |
|---|---|---|
| स्थानांतरण पात्रता | मुख्यतः दोषी कैदी | दोषी और विचाराधीन (Under-trial) दोनों |
| क्षेत्राधिकार | सीमित कानूनी तंत्र | अंतरराज्यीय (Inter-state) स्थानांतरण |
| मुख्य उद्देश्य | प्रशासनिक सुविधा | गैंग नेटवर्क को तोड़ना और सुरक्षा |
Frequently Asked Questions
1. क्या सभी कैदियों को दूसरे राज्यों में भेजा जाएगा?
नहीं, यह केवल हाई-रिस्क गैंगस्टरों और उन कैदियों के लिए होगा जो जेल सुरक्षा या कानून-व्यवस्था के लिए खतरा माने जाते हैं।
2. क्या इसके लिए कोर्ट की अनुमति जरूरी है?
हाँ, मॉडल जेल कानून और नए प्रावधानों के अनुसार, विचाराधीन कैदियों के मामले में संबंधित ट्रायल कोर्ट की सहमति अनिवार्य होगी।