कर्नाटक में मनरेगा (MGNREGA) की जगह लागू की गई नई 'VB-G RAM G' योजना के तहत रोजगार के दिनों में भारी कमी देखी जा रही है। तकनीकी खामियों और स्पष्टता की कमी के कारण ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर संकट मंडरा रहा है।

  • MGNREGA की तुलना में VB-G RAM G के तहत रोजगार के दिनों में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
  • तकनीकी ग्लिच और कार्यान्वयन में स्पष्टता की कमी मुख्य बाधाएं हैं।
  • बेलगावी जैसे उच्च प्रदर्शन वाले जिले भी नई योजना के तहत पिछड़ रहे हैं।
  • केंद्र और राज्य के बीच फंड साझाकरण अनुपात में बदलाव ने बोझ बढ़ा दिया है।

कर्नाटक के ग्रामीण इलाकों से एक चिंताजनक तस्वीर सामने आ रही है। मनरेगा (MGNREGA) का स्थान लेने वाली नई VB-G RAM G (Viksit Bharat-Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission-Gramin) योजना अभी तक अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में विफल रही है। आंकड़ों के अनुसार, जुलाई और अगस्त 2025 में जहाँ मनरेगा के तहत क्रमशः 61.48 लाख और 36.15 लाख मानव-दिवस (person-days) सृजित किए गए थे, वहीं नई योजना के तहत यह संख्या घटकर क्रमशः 17.98 लाख और 26.27 लाख रह गई है।

विशेष रूप से बेलगावी जिला, जो पिछले तीन वर्षों से राष्ट्रीय स्तर पर रोजगार सृजन में अग्रणी रहा है, इस नई व्यवस्था में संघर्ष कर रहा है। जहाँ बेलगावी ने पूर्व में 1.25 करोड़ मानव-दिवस तक का रिकॉर्ड बनाया था, वहीं 1 जुलाई से नई योजना लागू होने के बाद अब तक केवल 3 लाख मानव-दिवस ही सृजित हो पाए हैं। यह गिरावट न केवल आंकड़ों में है, बल्कि ग्रामीण श्रमिकों के जीवन स्तर पर भी सीधा प्रभाव डाल रही है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि योजना में बदलाव के दौरान कार्यान्वयन की प्रक्रिया में सामंजस्य की कमी ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए घातक हो सकती है। जब एक स्थापित और मांग-आधारित प्रणाली को एक नई प्रशासनिक संरचना से बदला जाता है, तो शुरुआती दौर में 'सिस्टम शॉक' की संभावना बढ़ जाती है, जैसा कि वर्तमान में कर्नाटक में देखा जा रहा है।

नई योजना के तहत काम शुरू करने के लिए अब केवल मांग काफी नहीं है, बल्कि केंद्र से आवंटन और पूर्व मंजूरी की जटिल प्रक्रिया ने काम की गति को धीमा कर दिया है।

स्थानीय अधिकारियों और विशेषज्ञों के अनुसार, इस मंदी के पीछे कई कारण हैं। पहली बड़ी समस्या तकनीकी बाधाएं हैं। 'नोमिनल मस्टर रोल' (Nominal Muster Rolls) बनाने की प्रक्रिया मनरेगा की तुलना में अधिक जटिल हो गई है। इसके अलावा, इंजीनियरिंग, जल आपूर्ति और वन जैसे विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी भी एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है।

इसके अतिरिक्त, केंद्र और राज्य के बीच फंड साझा करने के अनुपात में हुए बदलाव ने राज्य सरकार पर वित्तीय बोझ बढ़ा दिया है। इससे राज्य प्रशासन नए कार्यों को लेने में हिचकिचा रहा है। ग्रामीण श्रमिक संघों का कहना है कि काम का प्रकार, समय और श्रमिकों की संख्या अब पूरी तरह से केंद्र द्वारा निर्धारित की जा रही है, जिससे स्थानीय जरूरतों की अनदेखी हो रही है।

Historical Background

मनरेगा (MGNREGA) पिछले दो दशकों से भारत की ग्रामीण सुरक्षा नेट का मुख्य आधार रहा है। यह पूरी तरह से 'मांग-आधारित' मॉडल पर काम करता था, जिससे स्थानीय स्तर पर तुरंत रोजगार सुनिश्चित किया जा सकता था। VB-G RAM G को इसी मॉडल को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से लाया गया है, लेकिन संक्रमण काल की समस्याओं ने इसके लाभों को फिलहाल सीमित कर दिया है।

Did You Know?: बेलगावी जिला कर्नाटक का वह जिला है जिसने कई बार राष्ट्रीय स्तर पर ग्रामीण रोजगार के मामले में शीर्ष स्थान प्राप्त किया है।

Frequently Asked Questions

1. VB-G RAM G क्या है?
यह मनरेगा का नया स्वरूप है जिसे विकसित भारत मिशन के तहत रोजगार और आजीविका सुनिश्चित करने के लिए लाया गया है।

2. रोजगार में कमी का मुख्य कारण क्या है?
मुख्य कारणों में तकनीकी खामियां, कार्यान्वयन में स्पष्टता की कमी और केंद्र से मंजूरी मिलने में देरी शामिल है।