भारतीय वायुसेना के पूर्व वाइस चीफ एयर मार्शल नागेश कपूर ने तेजस लड़ाकू विमानों की भविष्य की क्षमता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि तकनीकी सुधार नहीं हुए, तो 2030 तक ये विमान युद्ध के लिए अप्रासंगिक हो सकते हैं।

  • पूर्व वायुसेना वाइस चीफ ने तेजस की भविष्य की उपयोगिता पर संदेह जताया है।
  • चेतावनी दी गई है कि 2030 तक तेजस की युद्धक क्षमता सीमित हो सकती है।
  • तेजस Mk-2 के विकास और इंजन आपूर्ति को लेकर भी चुनौतियां बनी हुई हैं।

भारतीय वायुसेना (IAF) के पूर्व वाइस चीफ, एयर मार्शल नागेश कपूर ने देश के स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम 'तेजस' को लेकर एक अत्यंत गंभीर और चिंताजनक बयान दिया है। कपूर के अनुसार, यदि विमानों के तकनीकी आधुनिकीकरण और मारक क्षमता में व्यापक सुधार नहीं किए गए, तो 2030 तक तेजस लड़ाकू विमानों की युद्धक प्रासंगिकता लगभग समाप्त हो सकती है।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी वायुसेना को आधुनिक बनाने के लिए तेजस Mk-1A और भविष्य के तेजस Mk-2 पर भारी निवेश कर रहा है। कपूर का तर्क है कि आधुनिक युद्धक्षेत्र में केवल विमान का होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी सेंसर क्षमता, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर (EW) प्रणाली और उन्नत मिसाइल प्रणालियों के साथ एकीकरण अनिवार्य है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह मुद्दा केवल एक विमान के बारे में नहीं है, बल्कि भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और रक्षा आत्मनिर्भरता से जुड़ा है। यदि स्वदेशी लड़ाकू विमानों को समय पर वैश्विक मानकों के अनुरूप नहीं बनाया गया, तो भारत को अपनी हवाई सुरक्षा के लिए विदेशी निर्माताओं पर निर्भर रहना पड़ेगा, जो भू-राजनीतिक दृष्टि से जोखिम भरा हो सकता है।

तकनीकी प्रगति की दौड़ में यदि हम पीछे छूट गए, तो स्वदेशी प्लेटफॉर्म केवल प्रशिक्षण विमान बनकर रह जाएंगे।

तेजस Mk-2 के विकास में एक बड़ी बाधा इंजन की आपूर्ति को लेकर भी देखी जा रही है। अमेरिकी कंपनी GE (General Electric) के साथ चल रही बातचीत और इंजन की विशिष्ट आवश्यकताओं ने HAL (Hindustan Aeronautics Limited) के सामने कई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बिना एक शक्तिशाली और विश्वसनीय इंजन के, तेजस का अगला संस्करण अपनी पूरी क्षमता प्रदर्शित नहीं कर पाएगा।

ऐतिहासिक रूप से, भारत ने स्वदेशी विमानन क्षेत्र में लंबी यात्रा तय की है, लेकिन तेजस के मामले में 'इंजन' हमेशा से एक कमजोर कड़ी रहा है। पिछले दशकों में भारत ने विभिन्न विदेशी इंजन प्रणालियों का परीक्षण किया है, लेकिन एक पूर्णतः स्वदेशी या उच्च-क्षमता वाले विदेशी इंजन का मिलना अभी भी एक बड़ी चुनौती है।

Did You Know?: तेजस को दुनिया के सबसे हल्के और फुर्तीले लड़ाकू विमानों में से एक माना जाता है, लेकिन इसकी सीमित पेलोड क्षमता इसकी एक बड़ी चुनौती रही है।

Frequently Asked Questions

1. एयर मार्शल नागेश कपूर की मुख्य चिंता क्या है?
उनकी मुख्य चिंता तेजस की तकनीकी क्षमता और 2030 तक आधुनिक युद्ध के मानकों पर खरा उतरने की उसकी क्षमता को लेकर है।

2. तेजस Mk-2 के लिए इंजन क्यों महत्वपूर्ण है?
शक्तिशाली इंजन विमान की गति, ऊंचाई पर उड़ने की क्षमता और अधिक हथियारों को ले जाने की क्षमता को निर्धारित करता है।