केरल के मलप्पुरम में मंदिर से होने वाले अत्यधिक शोर के खिलाफ राज्य मानवाधिकार आयोग (SHRC) ने पुलिस को सख्त निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने स्थानीय निवासी की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए ध्वनि प्रदूषण नियमों के कड़ाई से पालन का आदेश दिया है।

  • SHRC ने कोलापट्टू महाविष्णु मंदिर के खिलाफ ध्वनि प्रदूषण नियमों के उल्लंघन पर निर्देश जारी किए।
  • राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पुष्टि की कि मंदिर का शोर निर्धारित सीमा से अधिक है।
  • पुलिस को शोर कम करने और स्थानीय निवासी की निजता की रक्षा करने का आदेश दिया गया।
  • शिकायत में सीसीटीवी और सड़क अवरोध जैसे अन्य गंभीर मुद्दों की भी जांच का आदेश दिया गया है।

केरल के मलप्पुरम जिले के एडवन्ना में स्थित कोलापट्टू महाविष्णु मंदिर से होने वाले अत्यधिक ध्वनि प्रदूषण के मामले में राज्य मानवाधिकार आयोग (SHRC) ने हस्तक्षेप किया है। आयोग ने स्थानीय निवासी जयन द्वारा दायर एक शिकायत पर संज्ञान लेते हुए पुलिस को 'ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000' के तहत सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

कानूनी उल्लंघन और प्रदूषण बोर्ड की रिपोर्ट

मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा किए गए निरीक्षण में पाया गया कि मंदिर से निकलने वाली ध्वनि का स्तर सरकार द्वारा निर्धारित अनुमेय सीमा (Permissible Limit) से काफी अधिक था। आयोग के न्यायिक सदस्य के. बैजुनथ ने स्पष्ट किया कि एम्पलीफायर और लाउडस्पीकरों का उपयोग केवल कानून द्वारा निर्धारित सीमाओं के भीतर ही किया जा सकता है।

ध्वनि प्रदूषण केवल एक पर्यावरणीय समस्या नहीं है, बल्कि यह नागरिकों के शांति से रहने के मौलिक अधिकार का सीधा उल्लंघन है।

निजता और अन्य शिकायतों की जांच

आयोग ने केवल शोर तक ही अपनी जांच सीमित नहीं रखी है। एडवन्ना थाना प्रभारी (SHO) को निर्देश दिया गया है कि वे शिकायत में उठाए गए अन्य गंभीर मुद्दों की भी निष्पक्ष जांच करें। इनमें निजता का उल्लंघन, सीसीटीवी कैमरों का अनुचित उपयोग और सार्वजनिक सड़क के उपयोग में बाधा डालने जैसे आरोप शामिल हैं।

BozokMedia विश्लेषण: नागरिक अधिकारों की जीत

BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि यह मामला धार्मिक स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों के बीच संतुलन का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। आयोग ने जोर देकर कहा है कि श्री जयन और उनके परिवार को शोर के कारण किसी भी प्रकार की कठिनाई का सामना नहीं करना चाहिए।

आयोग ने पुलिस को दो महीने के भीतर अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि धार्मिक स्थलों पर भी पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के प्रावधानों का पालन अनिवार्य रूप से हो।

Frequently Asked Questions

1. मानवाधिकार आयोग ने क्या मुख्य निर्देश दिए हैं?
आयोग ने पुलिस को ध्वनि प्रदूषण नियमों को सख्ती से लागू करने और मंदिर के शोर को नियंत्रित करने का निर्देश दिया है।

2. शिकायतकर्ता ने अन्य कौन सी समस्याएं उठाई थीं?
शिकायतकर्ता ने सीसीटीवी के माध्यम से निजता के उल्लंघन और सार्वजनिक सड़क में बाधा डालने की भी शिकायत की थी।

Did You Know?: भारत में ध्वनि प्रदूषण को पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत नियंत्रित किया जाता है।