जादवपुर विश्वविद्यालय में हुई हिंसक झड़पों की जांच के लिए गठित पैनल के अध्यक्ष प्रोफेसर शुभ शंकर सरकार ने अपनी नियुक्ति से इनकार कर दिया है। यह निर्णय RSS से जुड़े एक शिक्षक संगठन द्वारा पैनल की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए जाने के बाद आया है।
- प्रो. शुभ शंकर सरकार ने व्यक्तिगत कारणों और उम्र का हवाला देते हुए JU जांच पैनल की अध्यक्षता करने से इनकार कर दिया।
- RSS से संबद्ध ABRSM ने प्रो. सरकार के पिछले कानूनी विवादों (SSC मामला) के कारण उनकी नियुक्ति का विरोध किया।
- ABRSM ने डिप्टी रजिस्ट्रार डॉ. अबुल हसनत की पात्रता पर भी सवाल उठाए और सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की मांग की।
- यह विवाद SFI और ABVP समर्थकों के बीच एक छात्र संघ बैठक को लेकर शुरू हुआ था।
कोलकाता के जादवपुर विश्वविद्यालय (JU) में प्रशासनिक तनाव तब और बढ़ गया जब प्रोफेसर शुभ शंकर सरकार ने उच्च-स्तरीय जांच समिति के अध्यक्ष के रूप में अपनी नियुक्ति को अस्वीकार कर दिया। इस समिति का गठन स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के समर्थकों के बीच हुई हिंसक झड़पों की जांच के लिए किया गया था।
मामले में मोड़ तब आया जब अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (ABRSM), जो कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से संबद्ध एक शिक्षक संगठन है, ने पैनल की संरचना पर आपत्ति जताई। कुलपति डॉ. चिरंजीब भट्टाचार्य को लिखे एक पत्र में, ABRSM ने उल्लेख किया कि प्रो. सरकार को 2022 में स्कूल सेवा आयोग (SSC) में भर्ती अनियमितताओं के मामले में कलकत्ता उच्च न्यायालय की कार्यवाही के बाद हटा दिया गया था।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह घटना केवल एक प्रशासनिक विफलता नहीं है, बल्कि पश्चिम बंगाल के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के भीतर गहरी वैचारिक ध्रुवीकरण का प्रतिबिंब है। जब किसी जांच पैनल की विश्वसनीयता पर राजनीतिक रूप से संबद्ध निकायों द्वारा सवाल उठाए जाते हैं, तो इससे संस्थागत जवाबदेही कम होती है और परिसर में अस्थिरता बढ़ने का खतरा रहता है।
जहाँ ABRSM ने कानूनी विवादों पर ध्यान केंद्रित किया, वहीं प्रो. सरकार ने अपने इनकार के लिए व्यक्तिगत कारण बताए। 70 वर्षीय सेवानिवृत्त प्रोफेसर ने कहा कि जांच की प्रक्रिया लंबी है, जिसमें छात्रों और कर्मचारियों के साथ नियमित बातचीत की आवश्यकता होगी, जो उनकी उम्र और बाहरी निवास के कारण संभव नहीं है।
पश्चिम बंगाल में शैक्षणिक शासन और राजनीतिक संबद्धता का संगम अक्सर कैंपस विवादों को संस्थागत वैधता की बड़ी लड़ाई में बदल देता है।
प्रो. सरकार के अलावा, ABRSM ने विश्वविद्यालय के डिप्टी रजिस्ट्रार डॉ. अबुल हसनत की नियुक्ति की पात्रता पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। संगठन ने मांग की है कि एक नई और 'वास्तव में स्वतंत्र' समिति का गठन किया जाए जिसमें सेवानिवृत्त न्यायाधीश और अनुभवी जांच अधिकारी शामिल हों।
बता दें कि यह पूरा विवाद इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी संकाय के छात्र संघ की एक कथित अनधिकृत बैठक को लेकर शुरू हुआ था, जिसके बाद SFI और ABVP के बीच हिंसक झड़पें हुईं और पुलिस के साथ भी हाथापाई हुई।
हितधारकों का पक्ष
| संस्था/व्यक्ति | मुख्य चिंता | मांग |
|---|---|---|
| ABRSM (RSS सहयोगी) | विश्वसनीयता और पात्रता | सेवानिवृत्त न्यायाधीशों का पैनल |
| प्रो. एस.एस. सरकार | आयु और लॉजिस्टिक्स | नियुक्ति अस्वीकार की |
| JU प्रशासन | जांच की समयसीमा | नए अध्यक्ष का चयन |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: प्रो. शुभ शंकर सरकार ने पद क्यों ठुकराया?
उन्होंने व्यक्तिगत कारणों, अपनी उम्र (70 वर्ष) और शहर से बाहर रहने के कारण समय की कमी का हवाला दिया।
प्रश्न 2: जादवपुर विश्वविद्यालय में झड़प का मुख्य कारण क्या था?
SFI द्वारा इंजीनियरिंग संकाय में आयोजित एक विवादित जनरल बॉडी मीटिंग को लेकर ABVP और SFI समर्थकों के बीच टकराव हुआ था।