IIT दिल्ली में एक एमएससी छात्र की संदिग्ध मौत के बाद छात्र संगठनों ने संस्थान के बाहर प्रदर्शन किया है। प्रदर्शनकारियों ने 'संस्थागत उदासीनता' और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी का आरोप लगाया है।

  • IIT दिल्ली में दूसरे वर्ष के एमएससी छात्र की संदिग्ध मौत।
  • JNUSU और AISAS ने संस्थान के खिलाफ मोर्चा खोला।
  • छात्रों ने 'रोहित एक्ट' लागू करने और स्वतंत्र जांच की मांग की।
  • संस्थान ने घटना पर दुख व्यक्त किया और पुलिस जांच का हवाला दिया।

नई दिल्ली स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली में एक 31 वर्षीय एमएससी छात्र की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद कैंपस में तनाव का माहौल है। रविवार को, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (JNUSU) के सदस्यों ने संस्थान के मुख्य द्वार पर एकत्रित होकर प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि यह केवल एक व्यक्तिगत घटना नहीं है, बल्कि संस्थान की 'संस्थागत उदासीनता' का परिणाम है। छात्रों ने दावा किया कि इस वर्ष IIT दिल्ली में यह दूसरी छात्र मृत्यु है। प्रदर्शनकारी मांग कर रहे हैं कि प्रशासन इस पैटर्न की जांच करे जिसे वे अब तक नजरअंदाज करता आया है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि प्रतिष्ठित संस्थानों में छात्रों का बढ़ता मानसिक दबाव और आत्महत्या की दरें एक गंभीर राष्ट्रीय संकट की ओर इशारा कर रही हैं। शैक्षणिक उत्कृष्टता की दौड़ में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को दरकिनार करना भविष्य के लिए घातक हो सकता है।

संस्थानों को केवल शैक्षणिक परिणामों पर नहीं, बल्कि छात्रों के समग्र कल्याण और सुरक्षा तंत्र पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

JNUSU की अध्यक्ष अदिति ने मांग की कि 'रोहित एक्ट' को सख्ती से लागू किया जाए। उन्होंने कहा, "हम चाहते हैं कि छात्र जब इन संस्थानों में आएं, तो उन्हें केवल योग्यता के दबाव में न धकेला जाए, बल्कि उन्हें एक सहायक वातावरण मिले।"

वहीं, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) ने भी एक आधिकारिक बयान जारी कर मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है। उन्होंने परामर्श (counseling) ढांचे की पारदर्शिता और सुपरवाइजरों की मनमानी शक्तियों की समीक्षा करने पर जोर दिया है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत के प्रमुख इंजीनियरिंग और विज्ञान संस्थानों में छात्रों द्वारा आत्महत्या के मामले पिछले कुछ वर्षों में चिंता का विषय बने हुए हैं। अक्सर अत्यधिक प्रतिस्पर्धा, शोध का दबाव और प्रशासनिक सहयोग की कमी को इन घटनाओं के मुख्य कारणों के रूप में देखा जाता है।

Did You Know?: भारत सरकार ने मानसिक स्वास्थ्य सहायता के लिए 'Tele MANAS' हेल्पलाइन (14416) शुरू की है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: JNUSU की मुख्य मांग क्या है?
उत्तर: JNUSU मुख्य रूप से रोहित एक्ट के कार्यान्वयन और संस्थान की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहा है।

प्रश्न 2: IIT दिल्ली प्रशासन का क्या कहना है?
उत्तर: संस्थान ने दुख व्यक्त किया है और कहा है कि दिल्ली पुलिस मामले की जांच कर रही है।