मुंबई क्राइम ब्रांच के अधिकारी बनकर जालसाजों ने एक कोलकाता निवासी को 'डिजिटल अरेस्ट' का डर दिखाकर 3.26 करोड़ रुपये ठग लिए। पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

  • कोलकाता निवासी से 3.26 करोड़ रुपये की ठगी, जिसमें शेयर और म्यूचुअल फंड शामिल थे।
  • धोखेबाजों ने मुंबई क्राइम ब्रांच और CBI के फर्जी अधिकारियों का रूप धारण किया था।
  • बिधाननगर साइबर क्राइम पुलिस ने तीन आरोपियों—बिकु कुमार, डुरंत पात्रा और मोहम्मद ज़ायद को गिरफ्तार किया।

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में साइबर अपराध का एक रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक व्यक्ति को मानसिक रूप से प्रताड़ित कर उससे 3.26 करोड़ रुपये की भारी रकम हड़प ली गई। जालसाजों ने 'डिजिटल अरेस्ट' नामक एक नई और खतरनाक तकनीक का उपयोग किया, जिसमें पीड़ित को घर छोड़ने से मना किया गया और उसे विश्वास दिलाया गया कि वह एक गंभीर आपराधिक जांच के घेरे में है।

पुलिस जांच के अनुसार, ठगों ने पीड़ित से संपर्क किया और दावा किया कि उनका आधार विवरण 24 अपराधियों से जुड़े मामलों में लिंक है। जब पीड़ित ने अपनी बेगुनाही साबित करने की कोशिश की, तो आरोपियों ने फर्जी CBI आदेश और बैंक खाता फ्रीज करने के नोटिस भेजकर उसे डराया। उसे सख्त निर्देश दिए गए कि वह बिना अनुमति के घर से बाहर न निकले, अन्यथा उसे तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that 'Digital Arrest' is no longer just a scam but a form of psychological warfare. By mimicking administrative language and creating a state of constant fear, scammers bypass a person's logical thinking. The use of forged official documents makes the fraud appear legitimate, leading victims to liquidate their life savings in a panic.

"साइबर अपराधी अब तकनीकी कौशल से ज्यादा मनोवैज्ञानिक हेरफेर (Psychological Manipulation) का उपयोग कर रहे हैं, जिससे शिक्षित लोग भी शिकार हो रहे हैं।"

इस मामले में पीड़ित ने जनवरी में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद सात महीने की गहन तकनीकी जांच के बाद बिधाननगर साइबर सेल ने आरोपियों को दबोचा। आरोपियों ने पीड़ित को मजबूर किया कि वह अपने शेयर और म्यूचुअल फंड बेचकर पैसे उनके द्वारा बताए गए खातों में ट्रांसफर करे।

यह घटना ऐसे समय में आई है जब भारत में डिजिटल अरेस्ट के मामलों में तेजी आई है। गौरतलब है कि जुलाई 2025 में पश्चिम बंगाल की एक अदालत ने इस तरह के धोखाधड़ी के मामले में नौ लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जो राज्य और देश में अपनी तरह की पहली बड़ी सजा थी।

विशेषता वास्तविक पुलिस प्रक्रिया डिजिटल अरेस्ट धोखाधड़ी
संपर्क विधि औपचारिक समन या व्यक्तिगत उपस्थिति वीडियो कॉल और व्हाट्सएप संदेश
धन की मांग कभी नहीं मांगी जाती जांच के नाम पर ट्रांसफर की मांग
गोपनीयता कानूनी सलाह का अधिकार होता है परिवार से बात करने पर पाबंदी
क्या आप जानते हैं?: डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई कानूनी प्रावधान भारतीय कानून में नहीं है; पुलिस कभी भी वीडियो कॉल के जरिए किसी को 'अरेस्ट' नहीं करती।

Frequently Asked Questions

1. क्या पुलिस वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी कर सकती है?
नहीं, भारतीय कानून के तहत गिरफ्तारी के लिए शारीरिक उपस्थिति और वारंट/प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है।

p>2. यदि कोई ऐसी कॉल आए तो क्या करें?
तुरंत कॉल काटें और राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर रिपोर्ट करें।