मेरठ जिला जेल में 'रेडियो परवाज़' के माध्यम से कैदी अपने पसंदीदा पुराने हिंदी गीतों के जरिए अपनी भावनाओं को व्यक्त कर रहे हैं। यह पहल कैदियों के मानसिक तनाव को कम करने और उनके सुधार में मदद कर रही है।
- मेरठ जिला जेल में 'रेडियो परवाज़' नामक रेडियो स्टेशन शुरू किया गया है।
- कैदी प्यार, जुदाई और धोखे पर आधारित पुराने हिंदी गीतों की मांग सबसे अधिक करते हैं।
- यह पहल कैदियों के मानसिक स्वास्थ्य और सुधार (Rehabilitation) के लिए डिज़ाइन की गई है।
- इंडिया विजन फाउंडेशन इस कार्यक्रम के संचालन में मदद कर रहा है।
उत्तर प्रदेश के मेरठ जिला जेल में एक अनोखी लहर देखने को मिल रही है। यहाँ कैदी अब केवल सलाखों के पीछे कैद नहीं हैं, बल्कि वे 'रेडियो परवाज़' के माध्यम से अपनी भावनाओं, यादों और दर्द को संगीत के जरिए साझा कर रहे हैं। 8 मई को शुरू हुआ यह रेडियो स्टेशन कैदियों के लिए मनोरंजन और मानसिक शांति का एक प्रमुख स्रोत बन गया है।
संगीत के माध्यम से भावनाओं का इजहार
जेल प्रशासन के अनुसार, कैदी अपनी पसंद के गाने एक दिन पहले पर्चियों के माध्यम से जमा करते हैं। सबसे अधिक मांग 1970, 1980 और 1990 के दशक के सदाबहार गीतों की होती है। दिलचस्प बात यह है कि पुरुष कैदी अक्सर प्यार, जुदाई और धोखे के गीतों के साथ-साथ भक्ति संगीत की मांग करते हैं, जबकि महिला कैदी अपने परिवार, बच्चों और माँ की याद दिलाने वाले गीतों को प्राथमिकता देती हैं।
क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि जेल जैसे तनावपूर्ण वातावरण में संगीत एक 'थेरेपी' की तरह काम करता है। मेरठ के वरिष्ठ जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा ने बताया कि संगीत और सकारात्मक वातावरण कैदियों के मानसिक तनाव को कम करने और उनके पुनर्वास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
संगीत केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि कैदियों के मानसिक सुधार और समाज में उनकी वापसी के लिए एक सशक्त माध्यम है।
यह रेडियो स्टेशन केवल गानों तक सीमित नहीं है। इसमें प्रेरणादायक बातें, जीवन कौशल (Life Skills), भावनात्मक बुद्धिमत्ता और सामाजिक जागरूकता से जुड़े कार्यक्रम भी प्रसारित किए जाते हैं। इंडिया विजन फाउंडेशन द्वारा प्रशिक्षित एक कैदी ही रेडियो जॉकी (RJ) की भूमिका निभाता है, जिससे अन्य कैदियों में भी कौशल विकास की भावना जागती है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और विस्तार
रेडियो परवाज़ की अवधारणा केवल मेरठ तक सीमित नहीं है। इंडिया विजन फाउंडेशन उत्तर प्रदेश के 11 विभिन्न जेलों में इस कार्यक्रम का सफल संचालन कर रहा है, जिसमें आगरा, गाजियाबाद, वाराणसी और लखनऊ जैसी प्रमुख जेलें शामिल हैं। यह एक गैर-लाभकारी पहल है जिसका उद्देश्य कैदियों को मुख्यधारा के समाज में वापस लौटने के लिए मानसिक रूप से तैयार करना है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: रेडियो परवाज़ का संचालन कौन कर रहा है?
उत्तर: इसका संचालन जेल प्रशासन और इंडिया विजन फाउंडेशन के सहयोग से किया जा रहा है।
प्रश्न 2: क्या कैदी खुद रेडियो पर गा सकते हैं?
उत्तर: हाँ, इच्छुक कैदियों को स्टूडियो में आकर गाने गाने का अवसर भी दिया जाता है।