उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में प्रशासन ने अवैध निर्माण और सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण के आरोप में एक मदरसा आंशिक रूप से ध्वस्त कर दिया है। यह कार्रवाई उस समय हुई है जब यह संस्थान कथित धार्मिक धर्मांतरण के आरोपों के घेरे में है।
- मुजफ्फरनगर के फूलत गांव में मदरसा दारुल उलूम रहिमिया पर चला प्रशासन का बुलडोजर।
- सार्वजनिक ग्राम सभा की भूमि पर अवैध निर्माण का पाया गया प्रमाण।
- संस्थान पर जबरन धर्मांतरण के गंभीर आरोप और कानूनी मामले दर्ज।
- प्रशासन ने उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 के उल्लंघन का हवाला दिया।
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में प्रशासन ने रविवार को एक बड़ा कदम उठाते हुए मदरसा दारुल उलूम रहिमिया के कुछ हिस्सों को ध्वस्त कर दिया। प्रशासन की यह कार्रवाई फूलत गांव में स्थित इस मदरसे पर किए गए अवैध निर्माण और सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण के बाद की गई है।
यह मामला केवल अवैध निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संस्थान पिछले कुछ समय से कथित तौर पर हिंदू पुरुषों और महिलाओं के जबरन धार्मिक धर्मांतरण के गंभीर आरोपों के कारण जांच के दायरे में था। स्थानीय पुलिस ने इस संबंध में मदरसा संचालक मौलाना हफीजुर रहमान अंसारी और उनके दो बेटों, जुबैर अंसारी और जुनैद अंसारी के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
धर्मांतरण और कानूनी कार्रवाई
जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि धर्मांतरण के इस मामले में गंभीर उल्लंघन हुए हैं। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं और उत्तर प्रदेश धर्म परिवर्तन निषेध अधिनियम, 2021 के तहत मामला दर्ज किया है। इस मामले में जुनैद अंसारी को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है और मुजफ्फरनगर के एसएसपी संजय कुमार वर्मा के अनुसार, मामले में आरोप पत्र (chargesheet) भी दाखिल किया जा चुका है।
प्रशासनिक कार्रवाई यह स्पष्ट करती है कि सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण और अवैध धार्मिक गतिविधियां अब कड़ी कानूनी जांच के दायरे में हैं।
भूमि अतिक्रमण की जांच और परिणाम
धर्मांतरण के मामले के समानांतर, प्रशासन ने मदरसे की भूमि के स्वामित्व की भी गहन जांच की। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (ADM) कार्यालय और स्थानीय प्रशासन द्वारा की गई जांच में पाया गया कि मदरसा निर्माण उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 के प्रावधानों का उल्लंघन करता है।
जांच में यह स्पष्ट हुआ कि मदरसा परिसर का कुछ हिस्सा ग्राम सभा की सार्वजनिक भूमि पर अवैध रूप से बनाया गया था। अधिकारियों ने राजस्व संहिता की धारा 67/5 का उपयोग करते हुए निर्माण को अवैध घोषित किया और तत्काल ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू की।
BozokMedia विश्लेषण: कानून का सख्त रुख
BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि उत्तर प्रदेश में अवैध निर्माण और धर्मांतरण के मामलों में प्रशासन अब 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपना रहा है। मुजफ्फरनगर में हुई यह कार्रवाई केवल एक प्रशासनिक कदम नहीं है, बल्कि यह उन संस्थानों के लिए एक कड़ा संदेश है जो सरकारी भूमि का दुरुपयोग करते हैं या कानून के विरुद्ध गतिविधियों में लिप्त हैं।
एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने संकेत दिया है कि आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ अन्य सख्त कानूनी प्रावधानों का भी उपयोग किया जाएगा।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: मदरसा क्यों तोड़ा गया?
उत्तर: मदरसा सार्वजनिक ग्राम सभा की भूमि पर अवैध निर्माण करने के कारण तोड़ा गया।
प्रश्न 2: इस मामले में कौन से कानून लागू हुए हैं?
उत्तर: इस मामले में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 और उत्तर प्रदेश धर्म परिवर्तन निषेध अधिनियम, 2021 लागू हैं।