नीति आयोग की नवीनतम रिपोर्ट ने भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश पर सवाल खड़े कर दिए हैं। देश में 7.65 करोड़ युवा न तो पढ़ रहे हैं और न ही काम कर रहे हैं, जबकि 45.1% आबादी श्रम शक्ति का हिस्सा है।

  • भारत में 7.65 करोड़ युवा 'NEET' (Not in Education, Employment, or Training) श्रेणी में हैं।
  • केवल 8.25% स्नातकों को ही एक वर्ष के भीतर रोजगार मिल पाया है।
  • 80% डिग्रियों में उद्योग की मांग के अनुसार व्यावहारिक कौशल का अभाव है।

नीति आयोग की हालिया रिपोर्ट ने भारत के युवाओं के भविष्य को लेकर एक गंभीर संकट की ओर इशारा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, देश में लगभग 7.65 करोड़ युवा ऐसे हैं जो न तो किसी शैक्षणिक संस्थान में पढ़ रहे हैं, न ही किसी नौकरी में संलग्न हैं और न ही किसी व्यावसायिक प्रशिक्षण का हिस्सा हैं। इस समूह को 'NEET' (Not in Education, Employment, or Training) कहा जाता है, जो देश की आर्थिक क्षमता के लिए एक बड़ी चुनौती है।

रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि भारत की 45.1% आबादी श्रम शक्ति (Labor Force) का हिस्सा है, लेकिन कौशल की कमी के कारण एक बड़ा वर्ग हाशिए पर है। सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि केवल 8.25% स्नातकों को ही अपनी पढ़ाई पूरी करने के एक साल के भीतर नौकरी मिल सकी है। यह आंकड़ा बताता है कि उच्च शिक्षा और वास्तविक रोजगार के बीच एक बहुत बड़ी खाई मौजूद है।

कौशल अंतराल: डिग्री बनाम योग्यता

आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि लगभग 80% डिग्रियों में व्यावहारिक ज्ञान और उद्योग के अनुभव की भारी कमी है। छात्र डिग्री तो हासिल कर रहे हैं, लेकिन वे उस कौशल से लैस नहीं हैं जिसकी आधुनिक कॉर्पोरेट जगत को आवश्यकता है। यह स्थिति 'शिक्षित बेरोजगारी' के संकट को और गहरा कर रही है।

डिग्री और कौशल के बीच का यह असंतुलन भारत के 'डेमोग्राफिक डिविडेंड' को 'डेमोग्राफिक डिजास्टर' में बदल सकता है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यदि शिक्षा प्रणाली को तुरंत कौशल-आधारित प्रशिक्षण (Skill-based training) की ओर नहीं मोड़ा गया, तो भारत की कार्यशील जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा आर्थिक विकास में योगदान देने के बजाय सामाजिक बोझ बन सकता है। छठी कक्षा से ही व्यावसायिक प्रशिक्षण की शुरुआत करने की आवश्यकता पर बल दिया जा रहा है ताकि भविष्य की जरूरतों के अनुसार कार्यबल तैयार किया जा सके।

ऐतिहासिक संदर्भ और वर्तमान स्थिति

भारत ने पिछले दो दशकों में साक्षरता दर में महत्वपूर्ण सुधार किया है, लेकिन शिक्षा की 'गुणवत्ता' और 'रोजगारपरकता' हमेशा से एक बहस का विषय रही है। वर्तमान रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि केवल स्कूल और कॉलेज खोलना पर्याप्त नहीं है; शिक्षा का उद्देश्य रोजगार सृजन होना चाहिए।

Did You Know?: 'NEET' शब्द का उपयोग उन लोगों के लिए किया जाता है जो आर्थिक रूप से सक्रिय नहीं हैं, जिससे समाज की उत्पादकता पर असर पड़ता है।

Frequently Asked Questions

1. NEET श्रेणी का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है वे युवा जो न तो शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, न ही रोजगार में हैं और न ही किसी प्रशिक्षण कार्यक्रम का हिस्सा हैं।

2. रिपोर्ट के अनुसार मुख्य समस्या क्या है?
मुख्य समस्या डिग्री और उद्योग की व्यावहारिक आवश्यकताओं के बीच का बड़ा अंतर है।