सूचना अधिकार के तहत पता चला कि 2025-26 वित्त वर्ष में केंद्रीय मंत्रियों के दिल्ली बंगलों की मरम्मत पर रिकॉर्ड 92 करोड़ रुपये खर्च हुए। यह राशि पिछले 11 वर्षों में तीन गुना बढ़ी, जिससे सार्वजनिक खर्च पर सवाल उठे।
- 2025-26 में 92 करोड़ रुपये बंगलों की मरम्मत पर खर्च
- मुख्य कारण: जलरूप रिसाव और दीमक संक्रमण
- CJP ने खर्च पर रोक की मांग की
सूचना अधिकार (RTI) के जवाब में भारत टुडे ने खुलासा किया कि 2025-26 वित्तीय वर्ष में केंद्रीय मंत्रियों के दिल्ली स्थित बंगलों की मरम्मत पर कुल 92 करोड़ रुपये खर्च किए गए। यह राशि पिछले 11 वर्षों में सबसे अधिक है और पहले के रिकॉर्ड को तीन गुना पार कर गई है।
पिछले वर्षों में औसत वार्षिक खर्च लगभग 30 करोड़ रुपये था, जबकि 2024-25 में यह 60 करोड़ तक पहुंच गया था। इस तेज़ी से बढ़ते खर्च ने कई नागरिक समूहों और विपक्षी नेताओं को चौंका दिया है, जिन्होंने सरकारी खर्च पर अधिक पारदर्शिता की मांग की है।
विस्तृत जांच से पता चला कि इस बड़े खर्च का प्रमुख कारण बंगलों में जलरूप रिसाव, दरारें और दीमक के संक्रमण हैं। इन समस्याओं को ठीक करने के लिए संरचनात्मक मरम्मत, जलरोधक कार्य और कीट नियंत्रण के व्यापक उपायों की आवश्यकता पड़ी।
मुख्य न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश (CJP) ने इस खर्च को लेकर सार्वजनिक प्रतिक्रिया को गंभीरता से लिया है और उन्होंने “भव्य घरों की मरम्मत पर रोक” की मांग की है। विपक्षी पार्टियों ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि सार्वजनिक धन को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों जैसे स्वास्थ्य और शिक्षा में उपयोग किया जाना चाहिए।
वित्त मंत्रालय ने कहा कि बंगलों की मरम्मत आवश्यक है क्योंकि ये आधिकारिक आवास हैं, लेकिन उसने यह भी आश्वासन दिया कि भविष्य में खर्च को नियंत्रित करने के लिए एक नई नीति तैयार की जाएगी। इस बीच, सार्वजनिक बजट में इस प्रकार के खर्च की बढ़ोतरी से अन्य विकासात्मक परियोजनाओं पर दबाव बढ़ सकता है।
Historical Background
पिछली सरकारों में भी बंगलों की मरम्मत के लिए पर्याप्त निधि आवंटित की गई थी, लेकिन 2015-16 से 2024-25 तक औसत वार्षिक खर्च 28-35 करोड़ रुपये के बीच रहा। 2025-26 में 92 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी ने इस प्रवृत्ति को असामान्य बना दिया है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that unchecked expenditure on luxury official residences can erode public trust and divert funds from essential services, especially in a fiscal year marked by inflationary pressures.
"सरकारी बंगलों की मरम्मत में अतिरंजित खर्च लोकतंत्र की जड़ें कमजोर कर सकता है," वित्त विशेषज्ञ डॉ. अजय सिंह ने कहा।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या सभी केंद्रीय मंत्रियों के बंगलों की मरम्मत का खर्च समान है?
उत्तर: नहीं, खर्च बंगलों की स्थिति, आकार और आवश्यक मरम्मत के प्रकार के अनुसार अलग-अलग है।
प्रश्न 2: क्या इस खर्च को घटाने के लिए कोई नीति प्रस्तावित हुई है?
उत्तर: वित्त मंत्रालय ने एक नई दिशा-निर्देश जारी करने की योजना बताई है, जिसमें मरम्मत की आवश्यकता का सख्त मूल्यांकन और बजट सीमा निर्धारित की जाएगी।