नीलगिरी के गुडाலூர் में एक बाघ द्वारा दो व्यक्तियों की हत्या के बाद वन विभाग ने अलर्ट जारी किया है। ड्रोन कैमरों और पिंजरों के जरिए बाघ की पहचान करने और उसे पकड़ने के प्रयास जारी हैं।
- गुडाலூர் के ओ'वैली क्षेत्र में बाघ के हमले में दो पुरुषों की जान चली गई।
- वन विभाग ड्रोन के जरिए बाघ की निगरानी कर रहा है, लेकिन स्पष्ट तस्वीर न होने से पहचान में देरी हो रही है।
- बाघ को पकड़ने के लिए छह पिंजरे लगाए गए हैं और कुमकी हाथियों की मदद ली जा रही है।
नीलगिरी जिले के गुडाலூர் स्थित ओ'वैली क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों में हुई दो मानव शिकार की घटनाओं ने स्थानीय निवासियों और वन विभाग के बीच भारी दहशत पैदा कर दी है। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, हालांकि ड्रोन कैमरों की मदद से बाघ को देखा गया है, लेकिन जानवर की एक स्पष्ट तस्वीर प्राप्त न होने के कारण उसकी पहचान अभी तक नहीं हो पाई है।
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के M-STrIPEs (मॉनिटरिंग सिस्टम फॉर टाइगर्स) रिकॉर्ड के साथ बाघ के विशिष्ट आईडी (Unique ID) का मिलान करने की प्रक्रिया चल रही है। गुडालोर के प्रभागीय वन अधिकारी (DFO) पी. देवराज ने बताया कि यह संभावना है कि हमलावर एक नर बाघ है जो इस क्षेत्र में रहता है, लेकिन इस बात की भी प्रबल आशंका है कि क्षेत्र में एक से अधिक बाघ सक्रिय हो सकते हैं।
बढ़ता खतरा और जांच के पहलू
जांच में एक महत्वपूर्ण मोड़ सामने आया है। 9 अगस्त को एम. बालकृष्णन (58) की मृत्यु को शुरुआत में एक आकस्मिक मुठभेड़ माना गया था। हालांकि, दूसरी घटना में के. रविकुमार (51) की हत्या के दौरान बाघ के व्यवहार में बदलाव देखा गया है। BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि बाघ इस बार शिकार करने के उद्देश्य से सक्रिय रूप से पीछा (stalking) कर रहा था, जो कि एक अधिक आक्रामक व्यवहार की ओर इशारा करता है।
बाघ का शिकार करने का बदलता तरीका यह संकेत देता है कि वह अब मानव बस्तियों के करीब आने में अधिक सहज और आक्रामक हो गया है।
वन विभाग ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए युद्ध स्तर पर काम शुरू कर दिया है। वर्तमान में क्षेत्र में छह पिंजरे लगाए गए हैं और रविवार शाम तक दो और पिंजरे लगाने की योजना है। इसके साथ ही, बाघ को बेहोश करने और पिंजरे में फंसाने के लिए थेप्पकाडु हाथी शिविर से दो कुमकी हाथियों की सहायता भी मांगी गई है।
ऐतिहासिक संदर्भ: नीलगिरी का बाघ क्षेत्र
नीलगिरी बायोस्फीयर रिजर्व दुनिया के सबसे समृद्ध बाघ आवासों में से एक है। हालांकि, जैसे-जैसे मानव बस्तियां और कृषि क्षेत्र जंगली इलाकों के करीब बढ़ रहे हैं, मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं भी बढ़ती जा रही हैं। यह घटना इस क्षेत्र में सुरक्षा प्रोटोकॉल की आवश्यकता को फिर से रेखांकित करती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: वन विभाग बाघ की पहचान कैसे कर रहा है?
उत्तर: विभाग ड्रोन फुटेज और NTCA के M-STrIPEs डेटाबेस का उपयोग कर रहा है, लेकिन स्पष्ट तस्वीर के अभाव में पहचान अभी लंबित है।
प्रश्न 2: क्या क्षेत्र में सुरक्षा के लिए कोई उपाय किए गए हैं?
उत्तर: हाँ, पिंजरे लगाए गए हैं, ट्रैकिंग टीमें तैनात हैं और कुमकी हाथियों की मदद ली जा रही है।