पर्यावरण संगठन 'परिसारकग्गी नावु' द्वारा मैसूर में मिट्टी के गणेश प्रतिमा बनाने की एक विशेष कार्यशाला आयोजित की जा रही है। इसका उद्देश्य प्लास्टर ऑफ पेरिस (PoP) के बजाय पारंपरिक मिट्टी की मूर्तियों के उपयोग को बढ़ावा देना है।

  • मैसूर के वोंटीकोप्पल में 'मातृमंडली विद्या संस्थान' में कार्यशाला का आयोजन।
  • 8 कुशल कारीगर 200 से अधिक छात्रों को मिट्टी की मूर्ति बनाना सिखाएंगे।
  • प्लास्टर ऑफ पेरिस (PoP) के प्रदूषण को कम करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास।

मैसूर: पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, पर्यावरण संगठन 'परिसारकग्गी नावु' (Parisarakkagi Naavu) आगामी सोमवार को मिट्टी के गणेश प्रतिमा बनाने पर एक विशेष कार्यशाला आयोजित कर रहा है। यह कार्यक्रम वोंटीकोप्पल स्थित मातृमंडली विद्या संस्थान (Mathrumandali Vidya Samsthe) में दोपहर 2:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक चलेगा।

इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को पारंपरिक और पर्यावरण के अनुकूल तरीकों से उत्सव मनाने के लिए प्रेरित करना है। आयोजन के बारे में जानकारी देते हुए, संगठन के पाराशुरामेगौड़ा (Parashuraramegowda) ने बताया कि मातृमंडली विद्या संस्थान के 200 से अधिक छात्र इस सत्र में भाग लेंगे। इस प्रशिक्षण के लिए आठ अनुभवी और कुशल कारीगरों को आमंत्रित किया गया है, जो छात्रों को बारीकी से मिट्टी को आकार देने की कला सिखाएंगे।

पर्यावरण और परंपरा का संगम

पिछले पांच वर्षों से, 'परिसारकग्गी नावु' लगातार इस प्रकार की कार्यशालाएं आयोजित कर रहा है। संगठन का प्राथमिक लक्ष्य सार्वजनिक जागरूकता पैदा करना है ताकि लोग प्लास्टर ऑफ पेरिस (PoP) से बनी मूर्तियों के बजाय मिट्टी से बनी मूर्तियों को प्राथमिकता दें। PoP की मूर्तियां जल निकायों में घुलती नहीं हैं और उनमें उपयोग किए जाने वाले रासायनिक रंग पानी को अत्यधिक प्रदूषित करते हैं, जिससे जलीय जीवन को गंभीर खतरा होता है।

मिट्टी के गणेश की ओर लौटना केवल परंपरा नहीं, बल्कि हमारे जल स्रोतों को बचाने के लिए एक अनिवार्य पारिस्थितिक आवश्यकता है।

BozokMedia विश्लेषण

BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि इस तरह की शैक्षणिक पहल समाज में व्यवहारिक परिवर्तन लाने के लिए अत्यंत प्रभावी हैं। जब छात्र स्वयं मिट्टी से मूर्ति बनाना सीखते हैं, तो वे न केवल एक कौशल सीखते हैं, बल्कि वे अपने परिवारों और समुदायों के लिए 'पर्यावरण दूत' के रूप में कार्य करते हैं। यह आंदोलन दीर्घकालिक रूप से त्योहारों के कार्बन फुटप्रिंट को कम करने में मदद कर सकता है।

Did You Know?: प्लास्टर ऑफ पेरिस (PoP) को पानी में घुलने में महीनों लग सकते हैं, जबकि प्राकृतिक मिट्टी कुछ ही घंटों में विसर्जित होकर मिट्टी में मिल जाती है।

Frequently Asked Questions

1. यह कार्यशाला कहाँ आयोजित की जा रही है?
यह कार्यशाला मैसूर के वोंटीकोप्पल में मातृमंडली विद्या संस्थान में आयोजित की जा रही है।

2. इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य छात्रों और जनता को PoP की मूर्तियों के नुकसान के बारे में जागरूक करना और मिट्टी की मूर्तियों के उपयोग को बढ़ावा देना है।