एमनेस्टी इंटरनेशनल ने आरोप लगाया है कि दिल्ली और बिहार में छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पेलेट गन, आंसू गैस और इलेक्ट्रिक शॉक डिवाइस जैसे घातक हथियारों का इस्तेमाल किया गया। यह रिपोर्ट शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद आई है।
- एमनेस्टी इंटरनेशनल ने दिल्ली और बिहार में पुलिस द्वारा अत्यधिक बल प्रयोग की पुष्टि की है।
- रिपोर्ट में पेलेट-फायरिंग शॉटगन, आंसू गैस और इलेक्ट्रिक शॉक डिवाइस के उपयोग का उल्लेख है।
- सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस और प्रदर्शनकारियों दोनों की हिंसा की जांच के लिए एक पैनल का गठन किया है।
- यह घटना NEET-UG पेपर लीक के बाद हुए व्यापक छात्र आंदोलनों से जुड़ी है।
मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने सोमवार को एक चौंकाने वाली रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि दिल्ली और बिहार में चल रहे युवा नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस ने अत्यधिक बल का प्रयोग किया। एमनेस्टी का दावा है कि उन्होंने चश्मदीदों के बयान और विजुअल सबूतों की पुष्टि की है, जिनसे पता चलता है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पेलेट-फायरिंग शॉटगन, आंसू गैस के लॉन्चर, ग्रेनेड, लाठी और इलेक्ट्रिक शॉक डिवाइस का इस्तेमाल किया गया।
विरोध प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि
यह पूरा विवाद NEET-UG पेपर लीक के बाद भड़का था, जिसके कारण देशभर में छात्रों में भारी आक्रोश था। 20 जुलाई, 2026 को जब हजारों छात्र संसद की ओर मार्च करने की कोशिश कर रहे थे, तब स्थिति हिंसक हो गई। इस आंदोलन का दबाव इतना अधिक था कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा।
कानूनी टकराव और सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप
जहाँ एक ओर एमनेस्टी ने इसे 'भीड़ नियंत्रण के नाम पर राज्य-अनुमोदित हिंसा' करार दिया है, वहीं दिल्ली पुलिस का तर्क है कि बल का प्रयोग केवल तभी किया गया जब प्रदर्शनकारियों ने हिंसा का सहारा लिया। पुलिस का कहना है कि कुछ असामाजिक तत्वों ने छात्रों का भेष बदलकर सुरक्षा बलों को गंभीर चोटें पहुंचाईं। इस संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने 20 अगस्त, 2026 को पुलिस और प्रदर्शनकारियों, दोनों की ओर से की गई हिंसा की जांच के लिए एक विशेष पैनल गठित किया है।
BozokMedia विश्लेषण
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों और पुलिस जवाबदेही के बीच के संघर्ष का है। यदि एमनेस्टी के आरोप सही साबित होते हैं, तो यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की कानून प्रवर्तन छवि के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।
एमनेस्टी का दावा है कि हथियारों का उपयोग अंतरराष्ट्रीय कानून और घरेलू पुलिसिंग दिशानिर्देशों का उल्लंघन करता है।
हाल ही में, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी एक 19 वर्षीय घायल छात्र के साथ दिल्ली पुलिस स्टेशन के बाहर धरना दिया और पुलिस की कार्रवाई की जांच की मांग की। बिहार के सिवान जिले में भी पुलिस द्वारा घातक बल के अवैध उपयोग के मामले सामने आए हैं, हालांकि वहां कोई हताहत नहीं हुआ।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: एमनेस्टी इंटरनेशनल ने किन हथियारों के उपयोग का आरोप लगाया है?
उत्तर: एमनेस्टी ने पेलेट गन, आंसू गैस, ग्रेनेड और इलेक्ट्रिक शॉक डिवाइस के उपयोग की पुष्टि की है।
प्रश्न 2: सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में क्या कदम उठाया है?
उत्तर: सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस और प्रदर्शनकारियों दोनों की हिंसा की जांच के लिए एक पैनल नियुक्त किया है।