वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने लोकसभा की विशेष समिति के समक्ष 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' योजना को असंवैधानिक और बेतुका कहा। उन्होंने इस प्रस्ताव के संभावित जोखिमों और संवैधानिक संशोधन की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
- एक राष्ट्र, एक चुनाव योजना पर चिदंबरम की तीव्र आलोचना
- योजना को असंवैधानिक बताया गया
- परिषद में संभावित संवैधानिक संशोधन की चर्चा
लोकसभा के विशेष समिति के समक्ष 28 जुलाई को आयोजित बैठक में वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने केंद्र सरकार की ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ (ONEE) पहल को “भयंकर और बेतुका” कहा। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव भारतीय संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है और देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को जोखिम में डाल सकता है।
चिदंबरम ने यह तर्क दिया कि विभिन्न राज्यीय चुनावों को केंद्रीय लोकसभा चुनावों के साथ मिलाने से चुनावी कैलेंडर में अनिश्चितता बढ़ेगी, प्रशासनिक खर्च बढ़ेगा और चुनावी अभियान में नीति‑निर्माण पर दबाव पड़ेगा। उन्होंने संसद में इस योजना को पुनः विचार करने की मांग की।
समिति के प्रमुख, वरिष्ठ विधायिका विशेषज्ञ डॉ. अजय सिंह ने कहा कि ONEE को लागू करने के लिये संविधान में बड़े पैमाने पर संशोधन आवश्यक होगा और सभी 28 राज्य एवं केन्द्र शासित प्रदेशों की सहमति अनिवार्य है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि 2029 तक इस योजना को लागू करने की संभावना तभी बनी रहेगी जब सभी राज्यों की राजनैतिक इच्छाएँ मेल खाएँ।
इतिहास में, ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ की अवधारणा पहली बार 1990 के दशक में चर्चा में आई थी, लेकिन वह कभी लागू नहीं हो पाई। 2009 में राष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त चुनावों के प्रस्ताव पर बहस हुई थी, परन्तु विविध जनसंख्या और क्षेत्रीय विविधताओं के कारण इसे रद्द कर दिया गया।
वर्तमान में, इस प्रस्ताव का समर्थन मुख्यतः राष्ट्रीय पार्टी गठबंधन और कुछ राज्य सरकारें दे रहे हैं, जबकि कई विपक्षी दल इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए खतरा मानते हैं। यदि लागू हो गया तो चुनावी खर्च में अनुमानित 30% की कटौती और प्रशासनिक बोझ में कमी का दावा किया जा रहा है, परन्तु इसके सामाजिक‑आर्थिक प्रभाव अभी स्पष्ट नहीं हैं।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that a shift to simultaneous elections could reshape India’s federal dynamics, concentrating power at the centre and potentially marginalising regional voices.
"संविधान में मूलभूत बदलाव बिना व्यापक सामाजिक संवाद के नहीं किए जाने चाहिए," कहा राजनीतिक विश्लेषक डॉ. राधिका मेहता ने।
Frequently Asked Questions
Q1: क्या ONEE के लिए संविधान में संशोधन अनिवार्य है?
A: हाँ, मौजूदा अनुच्छेदों को बदलने के लिये संसद में विशेष विधेयक पास करना पड़ेगा।
Q2: यदि सभी राज्यों की सहमति न हो तो क्या योजना रद्द हो जाएगी?
A: प्रस्ताव की वैधता के लिये सभी 28 राज्यों की राजनैतिक और कानूनी सहमति आवश्यक मानी गई है।