ओडिशा में आयोजित एक कार्यशाला में देश के प्रमुख स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने MASLD (मेटाबोलिक डिसफ़ंक्शन‑संबंधी लीवर रोग) की रोकथाम के लिए राष्ट्रीय दिशानिर्देश और रणनीति तैयार करने पर चर्चा की। इस पहल से भारत में इस उभरते रोग की पहचान और उपचार में क्रांतिकारी बदलाव की आशा है।

  • ओडिशा में विशेषज्ञों का समूह MASLD रोकथाम के राष्ट्रीय दिशानिर्देश तैयार कर रहा है।
  • दिशानिर्देशों में प्रारंभिक स्क्रीनिंग, जीवनशैली सुधार और सार्वजनिक जागरूकता पर जोर दिया गया।
  • सरकार इस रणनीति को अगले वित्तीय वर्ष में राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की योजना बना रही है।

नई दिल्ली – ओडिशा के राजधानी भुवनेश्वर में स्वास्थ्य विशेषज्ञों, एपीजीए (अटैच्ड प्रोफेशनल ग्रुप) और सरकारी अधिकारियों ने एकत्रित होकर भारत में बढ़ते MASLD मामलों को नियंत्रित करने हेतु राष्ट्रीय दिशानिर्देश और रोकथाम रणनीति तैयार करने का कार्य किया। यह पहल "मेटाबोलिक डिसफ़ंक्शन‑संबंधी स्टैटोटिक लीवर डिजीज" (MASLD) के बढ़ते बोझ को घटाने के उद्देश्य से चलाई गई है।

कार्यशाला में भारत के शीर्ष हेपेटोलॉजिस्ट, पोषण विशेषज्ञ और सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति निर्माता उपस्थित थे। उन्होंने रोग की वर्तमान प्रचलनता, जोखिम कारकों और मौजूदा उपचार अंतराल पर विस्तृत डेटा प्रस्तुत किया। रिपोर्ट के अनुसार, अगले पाँच वर्षों में MASLD के मामलों में 30% तक वृद्धि हो सकती है, जिससे स्वास्थ्य प्रणाली पर दबाव बढ़ेगा।

इतिहासिक पृष्ठभूमि: पिछले दो दशकों में भारत में लीवर रोगों की रिपोर्टिंग में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, विशेषकर मोटापा, टाइप‑2 डायबिटीज़ और असंतुलित आहार के कारण। 2019 में भारत सरकार ने NAFLD (नॉन‑अल्कोहॉलिक फैटी लीवर डिजीज) को एक सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरा मानते हुए प्रारम्भिक स्क्रीनिंग के लिए सिफ़ारिशें जारी की थीं, लेकिन MASLD की नई परिभाषा ने नीतियों को पुनः परिभाषित करने की आवश्यकता पैदा की।

दिशानिर्देशों में चार प्रमुख स्तंभों को रेखांकित किया गया है: (i) जोखिम समूहों की पहचान हेतु राष्ट्रीय स्क्रीनिंग प्रोग्राम, (ii) जीवनशैली परिवर्तन के लिए सामुदायिक शिक्षा, (iii) हेल्थकेयर प्रदाताओं के लिए प्रशिक्षण मॉड्यूल, तथा (iv) डेटा‑संचालित निगरानी प्रणाली। इन उपायों को लागू करने के लिए केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर वित्तीय आवंटन तय किया गया है।

भुवनेश्वर में आयोजित इस सभा में भारत के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के प्रतिनिधियों ने कहा कि "MASLD को रोकथाम के लिए एक समग्र राष्ट्रीय रणनीति बनाना अनिवार्य है, क्योंकि यह रोग आर्थिक उत्पादकता को सीधे प्रभावित करता है।" उन्होंने आगे बताया कि अगले तिमाही में इस रणनीति को सार्वजनिक रूप से जारी किया जाएगा।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that a coordinated national policy on MASLD could reduce liver‑related mortality by up to 15% within a decade, positioning India as a leader in tackling metabolic liver diseases in the developing world.

"अगर हम युवा आयु में जीवनशैली में बदलाव लाएँ, तो MASLD की भविष्यवाणी को काफी हद तक रोका जा सकता है," डॉक्टर अजय सिंह, प्रमुख हेपेटोलॉजिस्ट ने कहा।
Did You Know?: MASLD को 2020 में WHO द्वारा आधिकारिक तौर पर एक नई रोग वर्गीकरण के रूप में मान्यता मिली, जिससे विश्व स्तर पर अनुसंधान में 40% की वृद्धि हुई।

Frequently Asked Questions

MASLD के लिए राष्ट्रीय स्क्रीनिंग कब शुरू होगी? योजना के अनुसार, शुरुआती पायलट प्रोजेक्ट अगले वित्तीय वर्ष के Q2 में शुरू होगा, जिसमें प्रमुख राज्य अस्पताल शामिल होंगे।

क्या यह दिशानिर्देश सभी भारतीय राज्यों में समान रूप से लागू होंगे? हाँ, केंद्र सरकार ने एक समान मानक स्थापित किया है, लेकिन राज्य स्तर पर स्थानीय स्वास्थ्य चुनौतियों के अनुसार अनुकूलन की संभावना रहेगी।