महाराष्ट्र परिवहन विभाग ने राज्य में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा के ज्ञान को अनिवार्य कर दिया है, जिसके तहत नियमों का पालन न करने वाले ड्राइवरों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
- महाराष्ट्र परिवहन विभाग ने ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का 'वर्किंग नॉलेज' अनिवार्य किया है।
- अब तक लगभग 13,000 ड्राइवरों का परीक्षण किया जा चुका है और हजारों को नोटिस दिए गए हैं।
- नियमों का पालन न करने पर चालक का लाइसेंस तीन महीने के लिए निलंबित किया जा सकता है।
महाराष्ट्र में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। महाराष्ट्र परिवहन विभाग ने राज्य के मोटर वाहन नियमों में संशोधन करते हुए ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का कार्यात्मक ज्ञान (Working Knowledge) अनिवार्य कर दिया है। 20 अगस्त, 2026 से शुरू हुए इस प्रवर्तन अभियान के तहत, उन चालकों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं जो बुनियादी मराठी संवाद करने में असमर्थ हैं।
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक के अनुसार, अब तक लगभग 13,000 ड्राइवरों का परीक्षण किया जा चुका है, जिनमें से 2,500 से अधिक को नोटिस दिए गए हैं। यदि कोई चालक भाषाई परीक्षण में विफल रहता है, तो उसे मराठी सीखने के लिए एक महीने का समय दिया जाता है। इस अवधि के भीतर सुधार न करने पर, चालक का लाइसेंस तीन महीने के लिए निलंबित किया जा सकता है।
क्यों जरूरी है यह नियम?
परिवहन विभाग का तर्क है कि स्थानीय भाषा का ज्ञान यात्रियों और चालकों के बीच बेहतर संवाद सुनिश्चित करेगा। आरटीओ (RTO) मार्शल अब रेलवे स्टेशनों, पेट्रोल पंपों और चेक नाकों पर ड्राइवरों से रोजमर्रा के सवाल पूछ रहे हैं, जैसे 'कितने पैसे हुए?', 'कहाँ जाना है?', 'मीटर चालू कीजिए?' और 'ऑनलाइन पेमेंट लेंगे क्या?'।
भाषा केवल संचार का माध्यम नहीं, बल्कि स्थानीय संस्कृति और नागरिक सम्मान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि इस नियम के लागू होने से राज्य के परिवहन ढांचे में एक बड़ा सांस्कृतिक बदलाव आ रहा है, लेकिन इसके क्रियान्वयन को लेकर भारी विवाद भी खड़ा हो गया है।
चालकों का विरोध और चुनौतियां
इस अभियान के खिलाफ ड्राइवरों ने मोर्चा खोल दिया है। बोरीवली और मलाड जैसे इलाकों में ड्राइवरों ने हड़ताल की है। चालकों का कहना है कि सरकार द्वारा प्रदान किए गए केवल चार प्रशिक्षण सत्र भाषा सीखने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। कई ड्राइवरों ने शिकायत की है कि वे ईएमआई (EMI) और घर के खर्चों के बोझ तले दबे हैं, ऐसे में लाइसेंस निलंबन उनके लिए जीवन का संकट बन सकता है।
एक और बड़ी समस्या प्रशिक्षण की पहुंच को लेकर है। महाराष्ट्र में लगभग 9.65 लाख लाइसेंस प्राप्त चालक हैं, लेकिन विभाग के आंकड़ों के अनुसार केवल 1.65 लाख ड्राइवरों को ही प्रशिक्षण दिया गया है। शेष 8 लाख ड्राइवरों के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
Frequently Asked Questions
1. यदि कोई ड्राइवर मराठी नहीं बोल पाता तो क्या होगा?
उसे एक महीने का नोटिस दिया जाएगा। यदि वह एक महीने में नहीं सीखता, तो उसका लाइसेंस 3 महीने के लिए निलंबित कर दिया जाएगा।
2. क्या यह नियम केवल मुंबई के लिए है?
नहीं, यह नियम पूरे महाराष्ट्र राज्य के ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों पर लागू होता है।