पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के लिए डॉक्टरों द्वारा अनुशंसित हृदय स्कैन (CT Angiography) न किए जाने पर उनकी पार्टी पीटीआई ने गंभीर सवाल उठाए हैं। पीटीआई का आरोप है कि सरकारी अस्पताल में सुविधाओं की कमी का बहाना बनाकर जानबूझकर इलाज में देरी की जा रही है।
- डॉक्टरों ने इमरान खान के लिए 'सीटी कोरोनरी एंजियोग्राफी' की सिफारिश की थी, लेकिन यह टेस्ट नहीं हुआ।
- पीटीआई का आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद खान को निजी अस्पताल के बजाय सरकारी अस्पताल (PIMS) ले जाया गया।
- प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस मामले की जांच के लिए एक समिति गठित की है।
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की गिरोह में स्वास्थ्य स्थिति को लेकर एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने आरोप लगाया है कि डॉक्टरों की स्पष्ट सलाह के बावजूद खान का महत्वपूर्ण हृदय परीक्षण (Heart Scan) नहीं किया गया। पार्टी का कहना है कि यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि उनके स्वास्थ्य के साथ एक सोची-समझी साजिश हो सकती है।
चिकित्सा संबंधी अनदेखी का मामला
PTI सूचना सचिव शेख वकास अकरम के अनुसार, 1 अगस्त को पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PIMS) के एक हृदय रोग विशेषज्ञ ने खान के उतार-चढ़ाव वाले रक्तचाप और बेचैनी को देखते हुए 'सीटी कोरोनरी एंजियोग्राफी' की सिफारिश की थी। हालांकि, जब 20 अगस्त को खान को अस्पताल ले जाया गया, तो अधिकारियों ने कथित तौर पर उपकरणों की अनुपलब्धता का बहाना बनाया, जबकि पीटीआई का दावा है कि अस्पताल के रेडियोलॉजी विभाग में आवश्यक सीटी स्कैनर मौजूद था।
इमरान खान के मामले में चिकित्सा प्रोटोकॉल का उल्लंघन न केवल मानवाधिकारों का मुद्दा है, बल्कि यह न्यायिक आदेशों की अवहेलना भी है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी?
विवाद का एक मुख्य केंद्र सुप्रीम कोर्ट का वह निर्देश है जिसमें कहा गया था कि खान का इलाज शिफा इंटरनेशनल अस्पताल में किया जाना चाहिए। BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि सरकार ने इस आदेश का पालन करने के बजाय खान को सरकारी अस्पताल PIMS में ले जाने का निर्णय लिया, जो पीटीआई के लिए संदेह का विषय बना हुआ है। पार्टी का तर्क है कि निजी अस्पताल में सुविधाएं उपलब्ध होने के बावजूद सरकारी अस्पताल ले जाना जानबूझकर किया गया फैसला था।
सरकार और परिवार का पक्ष
दूसरी ओर, सूचना मंत्री अताउल्लाह तारर ने स्पष्ट किया है कि डॉक्टरों की एक टीम ने खान की जांच की और उन्हें हिरासत में रहने के लिए फिट घोषित किया। वहीं, कानून मंत्री आजम नजीर तारर का तर्क है कि एक सजायाफ्ता कैदी का इलाज सरकारी अस्पताल में ही होना चाहिए। इमरान खान की बहन, उज़मा खान, ने भी रात के समय अचानक अस्पताल ले जाने और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना पर सवाल उठाए हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
इमरान खान पिछले काफी समय से कानूनी लड़ाइयों और जेल में रहने के कारण स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। जनवरी में उनकी आंखों की समस्या (Retinal Vein Occlusion) सामने आने के बाद से उनकी चिकित्सा देखभाल लगातार विवादों के केंद्र में रही है।
Frequently Asked Questions
1. पीटीआई इमरान खान के लिए किस अस्पताल की मांग कर रही है?
पीटीआई मांग कर रही है कि खान का परीक्षण स्वतंत्र विशेषज्ञों की देखरेख में शिफा इंटरनेशनल अस्पताल में किया जाए।
2. क्या सरकार ने इस मामले में कोई कार्रवाई की है?
हाँ, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस मामले की जांच के लिए एक विशेष समिति का गठन किया है।