मुंबई प्रशासन जानता है कि किन पहाड़ियों पर भूस्खलन का खतरा है, लेकिन जानलेवा बस्तियों को हटाने के लिए कोई ठोस योजना नहीं है। बीएमसी और कलेक्टर कार्यालय के बीच अधिकार क्षेत्र की खींचतान में मासूमों की जान जा रही है।
- मुंबई के 287 स्थानों को भूस्खलन के प्रति संवेदनशील माना गया है।
- बीएमसी और कलेक्टर कार्यालय के बीच अधिकार क्षेत्र को लेकर विवाद बना रहता है।
- 1992 से 2026 के बीच इन क्षेत्रों में 340 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं।
- अवैध बस्तियां मुख्य रूप से पूर्व उपनगरों की पहाड़ियों और पुराने खदान क्षेत्रों में स्थित हैं।
मुंबई के कई हिस्सों में एक भयावह चक्र चल रहा है। प्रशासन जानता है कि कौन सी पहाड़ियाँ जानलेवा साबित हो सकती हैं, वे उनका मानचित्र तैयार करते हैं, निवासियों को नोटिस जारी करते हैं, और फिर आपदा आने के बाद इस बात पर बहस करते हैं कि उन लोगों को वहां से हटाने की जिम्मेदारी किसकी है। 12 अगस्त को कुर्ला की 'हिल नंबर 3' में हुए भूस्खलन ने आठ लोगों की जान ले ली, जिनमें दो मासूम बच्चे भी शामिल थे। यह कोई पहली घटना नहीं है; यह मुंबई की व्यवस्थागत विफलता का एक दर्दनाक चेहरा है।
अधिकार क्षेत्र की खींचतान और प्रशासनिक शून्यता
घटना के बाद, बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) और मुंबई कलेक्टर कार्यालय एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टालने में जुट गए। बीएमसी का तर्क है कि जिस भूमि पर ये संरचनाएं खड़ी हैं, वह उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आती, इसलिए वे कलेक्टर की अनुमति के बिना कार्रवाई नहीं कर सकते। वहीं, कलेक्टर कार्यालय का कहना है कि बीएमसी मुख्य नियोजन निकाय है और उनके पास इतने बड़े पैमाने पर निष्कासन अभियान चलाने के लिए संसाधन नहीं हैं।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि यह केवल प्रशासनिक देरी का मामला नहीं है, बल्कि यह जीवन और मृत्यु के बीच के अंतर को दर्शाता है। जब तक बीएमसी और राज्य राजस्व विभाग के बीच स्पष्ट समन्वय नहीं होता, तब तक 'चेतावनी' केवल एक कागज का टुकड़ा बनी रहेगी, जो वास्तव में लोगों को सुरक्षित नहीं बचा सकती।
चेतावनी देना और लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुँचाना, दो बिल्कुल अलग प्रक्रियाएं हैं। केवल नोटिस जारी कर देना प्रशासन की जिम्मेदारी पूरी नहीं करता।
भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण भारत (GSI) ने 2018 में ही एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें मुंबई के 45 अत्यधिक संवेदनशील स्थानों की पहचान की गई थी। बीएमसी के 'मुंबई जलवायु कार्य योजना' के अनुसार, 287 भूस्खलन संभावित स्थानों में से 209 अनौपचारिक बस्तियों के भीतर हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: पहाड़ियों का दोहन और अतिक्रमण
मुंबई के इतिहास को देखें तो शहर का विस्तार समुद्र से भूमि छीनकर और पहाड़ियों को खोदकर किया गया है। शहर के विकास के लिए पहाड़ियों से चट्टानें और मिट्टी निकाली गई, जिससे कई जगह गहरी खदानें बन गईं। आजादी के बाद, काम की तलाश में आए प्रवासियों ने इन छोड़ी गई खदानों और ढलानों पर बस्तियां बसा लीं। कम किराए की तलाश में लोग इन असुरक्षित ढलानों पर रहने को मजबूर हुए, जिससे आज का संकट पैदा हुआ है।
| संस्था | भूमिका | मुख्य चुनौती |
|---|---|---|
| BMC | नगर नियोजन और आपदा प्रबंधन | अधिकार क्षेत्र की सीमाएं और निष्कासन की शक्ति का अभाव |
| कलेक्टर कार्यालय | भूमि प्रशासन और राजस्व | बड़े पैमाने पर पुनर्वास के लिए संसाधनों की कमी |
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: मुंबई में भूस्खलन का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर: भारी मानसूनी बारिश, पहाड़ियों का अत्यधिक दोहन, और ढलानों पर असुरक्षित बस्तियों का निर्माण मुख्य कारण हैं।
प्रश्न 2: क्या प्रशासन को पता है कि कौन से क्षेत्र खतरनाक हैं?
उत्तर: हाँ, बीएमसी और GSI के पास भूस्खलन संभावित क्षेत्रों का विस्तृत डेटा और मानचित्र मौजूद हैं।