सुप्रीम कोर्ट ने NEET विरोध प्रदर्शनों के दौरान महिलाओं के साथ हुए कथित यौन उत्पीड़न की शिकायतों को उच्च-स्तरीय जांच समिति द्वारा प्राथमिकता पर लेने का आदेश दिया है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल अंतरिम रिपोर्ट मांगी है।

  • सुप्रीम कोर्ट ने यौन उत्पीड़न की शिकायतों को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया।
  • जांच समिति को तत्काल एक अंतरिम रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है।
  • जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस की कथित हिंसा की जांच जारी है।

नई दिल्ली: भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए कहा कि NEET विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई की जांच करने वाली उच्च-स्तरीय जांच समिति को महिला प्रदर्शनकारियों द्वारा की गई यौन उत्पीड़न की शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश सूर्याकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले में तत्काल एक अंतरिम रिपोर्ट मांगी है।

यह निर्देश वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता की उस याचिका के बाद आया, जिसमें उन्होंने 20 जुलाई को जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान महिलाओं के साथ छेड़छाड़ और शारीरिक दुर्व्यवहार के गंभीर आरोपों पर स्वतः संज्ञान (suo motu) लेने की मांग की थी। अधिवक्ता गुप्ता ने सोशल मीडिया पर प्रसारित उन हृदयविदारक रिपोर्टों का हवाला दिया, जिनमें पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारी महिलाओं के साथ बर्बरता किए जाने के दावे किए गए थे।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि यह मामला न केवल कानून-व्यवस्था से जुड़ा है, बल्कि यह सार्वजनिक विरोध प्रदर्शनों के दौरान महिलाओं की सुरक्षा और पुलिस जवाबदेही के बीच के नाजुक संतुलन को भी रेखांकित करता है। यदि जांच समिति इन संवेदनशील शिकायतों को प्राथमिकता नहीं देती है, तो यह न्याय प्रणाली में जनता के विश्वास को प्रभावित कर सकता है।

न्यायपालिका की यह सक्रियता सुनिश्चित करती है कि विरोध प्रदर्शन के नाम पर महिलाओं की गरिमा के साथ समझौता न किया जाए।

न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहनन की पीठ ने स्पष्ट किया कि मामला पहले से ही समिति के समक्ष है। अदालत ने सुझाव दिया कि शिकायतों की गोपनीयता और सुलभता सुनिश्चित करने के लिए एक विशिष्ट तंत्र बनाया जाए, जिसमें एक समर्पित ईमेल आईडी या जिला न्यायाधीश को शिकायतें भेजने की व्यवस्था हो।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

NEET परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ जून से जुलाई के बीच देशव्यापी छात्र आंदोलन हुआ था। इन प्रदर्शनों का केंद्र जंतर मंतर था, जहां सुरक्षा बलों और छात्रों के बीच हिंसक झड़पें हुई थीं। तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद आंदोलन शांत हुआ, लेकिन पुलिस की बर्बरता के आरोप अभी भी जांच के घेरे में हैं।

Did You Know?: सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित यह उच्च-स्तरीय समिति पूर्व न्यायाधीशों और पूर्व CBI निदेशक जैसे अनुभवी विशेषज्ञों से बनी है।

Frequently Asked Questions

1. जांच समिति का नेतृत्व कौन कर रहा है?
इस उच्च-स्तरीय समिति का नेतृत्व पूर्व सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति आर. सुभाष रेड्डी कर रहे हैं।

2. समिति किन मुद्दों की जांच कर रही है?
समिति पुलिस द्वारा अत्यधिक बल प्रयोग और प्रदर्शनकारियों द्वारा पुलिस पर किए गए हमलों, दोनों की जांच कर रही है।