केरल के सांसदों ने मंगलुरु क्षेत्र को पालक्कड़ से मैसूरु डिवीजन में बदलने के खिलाफ सत्त्याग्रह की घोषणा की। दोनों राज्यों में राजकीय राजस्व और रेल विकास को लेकर तीखी टकराव छिड़ गई है।
- मंगलुरु क्षेत्र को 1 अक्टूबर से पालक्कड़ से मैसूरु डिवीजन में बदल दिया जाएगा
- केरल के सांसदों ने आर्थिक नुकसान के अंदाज़े के साथ सत्त्याग्रह का ऐलान किया
- कर्नाटक के राजनैतिक और व्यावसायिक वर्ग ने इस कदम का स्वागत किया
निर्णय का विवरण
रेलवे बोर्ड ने 21 अगस्त को जारी आदेश में बताया कि मंगलुरु और उलाल तक के स्टेशन अब दक्षिणी रेलवे के पालक्कड़ डिवीजन के बजाय दक्षिण‑पश्चिमी रेलवे के मैसूरु डिवीजन के अंतर्गत आएँगे। यह परिवर्तन 1 अक्टूबर, 2024 से प्रभावी होगा।
केरल की प्रतिक्रियाएँ
केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशान ने इस निर्णय को "एकतरफ़ा और अस्वीकार्य" कहा। उन्होंने बताया कि मंगलुरु जंक्शन को हटाने से पालक्कड़ डिवीजन का वार्षिक राजस्व 1,000‑1,100 करोड़ रुपये तक गिर सकता है। इस कारण से कांग्रेस‑उड्फ़ के सांसद एम.के. राघवन, ई.टी. मोहम्मद बशीर और शफ़ी पराम्बिल ने शुक्रवार को सत्त्याग्रह की घोषणा की।
कर्नाटक का समर्थन
कर्नाटक के व्यावसायिक वर्ग और राजनेता इस बदलाव को स्वागत कर रहे हैं। ए.आर. इनफोसिस के पूर्व CFO टॉवी मोहनदास पाई ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री को "टाइगर ऑफ़ कर्नाटक" कहकर प्रदेश के हितों की रक्षा करने की अपील की। मंगलुरु सांसद बृजेश चोउटा ने बताया कि यह कदम रेल नेटवर्क को एकीकृत करेगा और विकास को गति देगा।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that the reassignment could shift freight revenue streams, affect infrastructure funding, and set a precedent for inter‑state railway realignments across India.
"रेलवे विभाजन में बदलाव न केवल राजस्व बल्कि स्थानीय विकास की गति को भी प्रभावित करता है," कहा रेलवे नीति विशेषज्ञ डॉ. अजय सिंह ने।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
पिछले दो दशकों में केरल‑कर्नाटक के बीच कई बार रेलवे रूटों और डिवीजन के पुनर्गठन को लेकर विवाद हुए हैं। 2007 में कोयम्बटूर सेक्शन को नई सलैम डिवीजन में स्थानांतरित किया गया था, जिससे उसी समय केरल में समान असंतोष पैदा हुआ था।
Frequently Asked Questions
Q1: इस बदलाव से केरल के यात्रियों को कौन‑सी समस्याएँ हो सकती हैं?
A: टिकट बुकिंग, समय‑सारिणी और माल ढुलाई में संभावित अस्थायी व्यवधान की आशंका है, लेकिन दीर्घकालिक लाभों के लिए सुधार की उम्मीद है।
Q2: क्या कर्नाटक में इस बदलाव से अतिरिक्त राजस्व की उम्मीद की जा रही है?
A: हाँ, कर्नाटक के अधिकारी मानते हैं कि एकीकृत डिवीजन से निवेश आकर्षित होगा और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।