रूस ने दावा किया है कि उसका Su‑35 लड़ाकू विमान 125 किलोमीटर दूर से यूएस‑निर्मित पैट्रियट एंटी‑एयर सिस्टम को मार गिराया। यह दावा Kh‑31PM एंटी‑रेडार मिसाइल के उपयोग को उजागर करता है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन को प्रभावित कर सकता है।
- रूसी Su‑35 ने Kh‑31PM मिसाइल से 125 किमी दूर से पैट्रियट को निशाना बनाया
- पैट्रियट सिस्टम यूक्रेन की वायु रक्षा का प्रमुख घटक है
- यह प्रहार क्षेत्रीय सैन्य तनाव को और बढ़ा सकता है
घटना का विवरण
रूस के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि एक Su‑35 लड़ाकू विमान ने Kh‑31PM एंटी‑रेडार मिसाइल का प्रयोग करके यूक्रेन में स्थित US‑निर्मित पैट्रियट एंटी‑एयर सिस्टम को 125 किलोमीटर की दूरी से निशाना बनाया। यह दावा Moneycontrol.com और News18 जैसे स्रोतों ने रिपोर्ट किया है।
तकनीकी विश्लेषण
Kh‑31PM एक उच्च-गति वाला एंटी‑रेडार (ARM) मिसाइल है, जो रडार तरंगों को ट्रैक कर लक्ष्य पर सटीक प्रहार करता है। इस मिसाइल की अधिकतम रेंज 150 किमी तक बताई जाती है, जिससे 125 किमी की दूरी से सफल प्रहार संभव हो पाया।
पैट्रियट सिस्टम की भूमिका
पैट्रियट एंटी‑एयर सिस्टम यूक्रेन की वायु रक्षा में केंद्रीय भूमिका निभाता है, विशेषकर रूसी एयरक्राफ्ट और मिसाइलों के खिलाफ। इसका नुकसान यूक्रेन की वायु सुरक्षा को गंभीर रूप से कमजोर कर सकता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष 2014 में क्रीमिया के विलय से तेज़ हुआ, और तब से दोनों पक्ष विभिन्न प्रकार की वायु रक्षा प्रणालियों को लक्ष्य बनाते आए हैं। 2022 में रूस ने बड़े पैमाने पर ड्रोन्स और क्रूज़ मिसाइलों का उपयोग किया, जबकि यूक्रेन ने पश्चिमी देशों से पैट्रियट सहित कई एंटी‑एयर सिस्टम खरीदे।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that a successful long‑range strike on a Patriot system signals a shift in tactical capabilities, potentially prompting NATO allies to reassess air‑defence deployments in Eastern Europe.
"Kh‑31PM की रेंज और सटीकता इसे आधुनिक युद्ध में एक डरावना हथियार बनाती है," कहते हैं रक्षा विशेषज्ञ इवान पетров।
Frequently Asked Questions
Q1: क्या पैट्रियट सिस्टम को फिर से सक्रिय किया जा सकता है?
A: हाँ, लेकिन इसके लिए विस्तृत मरम्मत और संभवतः अतिरिक्त घटकों की आवश्यकता होगी।
Q2: इस प्रहार के जवाब में NATO ने क्या कहा?
A: NATO ने अभी तक आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन कई सदस्य देशों ने स्थिति की करीबी निगरानी की घोषणा की है।