सेंटर फॉर विमेंस डेवलपमेंट एंड रिसर्च (CWDR) ने युवाओं के बीच यौन और प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़ी सामाजिक रूढ़ियों को खत्म करने के लिए 'पुथुयुगम पदैपोम' अभियान शुरू किया है।

  • यौन और प्रजनन स्वास्थ्य और अधिकारों (SRHR) को बढ़ावा देने के लिए चेन्नई में 'पुथुयुगम पदैपोम' अभियान का शुभारंभ।
  • अभियान का मुख्य ध्यान किशोरों के लिए मासिक धर्म गरिमा, शारीरिक स्वायत्तता और लैंगिक समानता पर है।
  • प्रसिद्ध अभिनेत्री और निर्देशक रेवती ने सामाजिक परिवर्तन के लिए इस पहल का उद्घाटन किया।

सामाजिक वर्जनाओं को तोड़ने की दिशा में एक साहसिक कदम उठाते हुए, सेंटर फॉर विमेंस डेवलपमेंट एंड रिसर्च (CWDR) ने 'पुथुयुगम पदैपोम' (आओ एक नई दुनिया बनाएं) नामक एक व्यापक नुक्कड़ नाटक अभियान शुरू किया है। चेन्नई से शुरू हुए इस अभियान का उद्देश्य यौन और प्रजनन स्वास्थ्य और अधिकारों (SRHR) से जुड़ी महत्वपूर्ण चर्चाओं को निजी कमरों से निकालकर सार्वजनिक मंचों पर लाना है।

इस अभियान का उद्घाटन रविवार को चेन्नई के 'मेदाई - द स्टेज' पर प्रसिद्ध अभिनेत्री और निर्देशक रेवती द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम में चेन्नई कलई कुझु के प्रलयन एस. द्वारा निर्देशित एक प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया गया। सार्वजनिक थिएटर का उपयोग करके, आयोजकों का लक्ष्य किशोरों और युवाओं को इस तरह से जोड़ना है, जो अक्सर पारंपरिक शैक्षिक सेटिंग्स में संभव नहीं हो पाता।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि रूढ़िवादी सामाजिक ढांचे में 'कला-आधारित वकालत' (art-based advocacy) का उपयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रदर्शन कला के माध्यम से, CWDR न केवल जानकारी प्रदान कर रहा है, बल्कि उस चुप्पी और गलत सूचनाओं को भी चुनौती दे रहा है जो अक्सर युवा महिलाओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं।

इस अभियान के उद्देश्य केवल बुनियादी स्वास्थ्य सुझावों तक सीमित नहीं हैं। यह मासिक धर्म गरिमा, शारीरिक स्वायत्तता के अधिकार और लैंगिक समानता की गहरी समझ विकसित करने का प्रयास करता है। इसके अलावा, नाटकों को लैंगिक आधारित हिंसा की रोकथाम को संबोधित करने के लिए तैयार किया गया है, ताकि युवा महिलाएं शोषण को पहचानने और उसकी रिपोर्ट करने में सक्षम हो सकें।

SRHR चर्चाओं को बंद कमरों से बाहर ले जाना लोकतांत्रिक समाज में महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा और स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की दिशा में एक मौलिक कदम है।

CWDR की के.आर. रेणुका ने जोर देकर कहा कि प्रजनन अधिकार महिला की समग्र शिक्षा और स्वतंत्रता से गहराई से जुड़े हुए हैं। यह अभियान केवल चेन्नई तक सीमित नहीं है; इसे पूरे तमिलनाडु में विस्तारित किया जाएगा, जिसमें शैक्षणिक संस्थानों और सामुदायिक केंद्रों को लक्षित किया जाएगा ताकि यह संदेश समाज के सबसे वंचित वर्गों तक पहुँच सके।

क्या आप जानते हैं?: भारत में स्वतंत्रता आंदोलन के समय से ही 'नुक्कड़ नाटक' सामाजिक सुधार का एक शक्तिशाली साधन रहा है, जिससे यह सिद्ध होता है कि जमीनी स्तर पर मानसिकता बदलने में कला, नीति से अधिक प्रभावी हो सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: 'पुथुयुगम पदैपोम' अभियान का प्राथमिक लक्ष्य क्या है?
इसका प्राथमिक लक्ष्य सार्वजनिक प्रदर्शनों के माध्यम से किशोरों और युवाओं के बीच यौन और प्रजनन स्वास्थ्य और अधिकारों (SRHR) के बारे में जागरूकता बढ़ाना और सामाजिक वर्जनाओं को चुनौती देना है।

प्रश्न 2: यह अभियान कहाँ लागू किया जाएगा?
चेन्नई में शुरू होने के बाद, इस अभियान को पूरे तमिलनाडु के विभिन्न समुदायों और शैक्षणिक संस्थानों में ले जाने की योजना है।